‘आंदोलनजीवी’ सलीम उर्फ योगेंद्र यादव ने शेखी बघारने के फेर में ‘वोट चोरी’ पर राहुल गाँधी को ही बेनकाब कर दिया है। ‘द वायर’ से बातचीत में उन्होंने जो कुछ कहा है उससे स्पष्ट है कि कॉन्ग्रेस नेता जो आरोप लगाए हैं, उसके समर्थन में उनके पास ठोस कुछ नहीं है। सारी बातें हवा-हवाई हैं।
यादव ने जो कुछ कहा है उससे यह भी पता चलता है कि राहुल गाँधी की यह गलथोथी आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। पर किसी भी स्थिति में इस मामले को लेकर वे न तो अदालत जाएँगे और न ही हलफनामा दायर करेंगे।
दरअसल, पिछले कुछ महीनों से राहुल गाँधी ने कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को उठाया हुआ है। राहुल इस मुद्दे को इतना क्रांतिकारी समझ रहे हैं कि इस मुद्दे की तुलना कभी बम तो कभी हाइड्रोजन बम से कर रह हैं।
राहुल गाँधी जब आरोप लगाते हैं तो चुनाव आयोग उनका जवाब दे देता है। कुछ मामलों में उनसे शपथ पत्र दाखिल करने को भी कहा, लोग उनसे इस मुद्दे को अदालत में ले जाने पर सवाल पूछते हैं तो वो कतराने लगते हैं। अभी तक उन्होंने शपथ पत्र तक नहीं दिया है।
आपको लगेगा कि होना तो यही चाहिए, अगर राहुल गाँधी को लगता है कि चुनाव आयोग उनकी बात नहीं सुन रहा है तो अदालत जाएँ। अब यही उनके लिए गड़बड़ शुरू होती है, अदालत तो सबूत और साक्ष्य माँगती हैं लेकिन उसके नाम पर हैं सिर्फ मनगढ़ंत कहानियाँ। तो अब सवाल उठता है कि इस पूरी कार्रवाई की मकसद क्या है?
यह मकसद समझने के लिए राहुल गाँधी के कथित सलाहकार योगेंद्र यादव का एक वायरल बयान देखते हैं। योगेंद्र ने ‘द वायर’ से बातचीत में वोट चोरी के मुद्दे पर कहा, “कोर्ट-कचहरी, यह कहना कि आप कोर्ट जाइए, हलफनामा दीजिए, इसका कोई मतलब नहीं है क्योंकि ऐसा कुछ होगा नहीं।”
वो आगे कहते हैं, “वोट चोरी की बात नीचे तक जा रही है। साधारण लोग कह रहे हैं कि हाँ भाई मामला तो गड़बड़ है…लोगों की राय इस मुद्दे के साथ जुड़ रही है। इस हद तक लोग अभी सफल हुए हैं।”
The cat is out of the bag.
— Amit Malviya (@amitmalviya) September 21, 2025
Rahul Gandhi’s advisor Yogendra Yadav has struck again — openly admitting that the entire “vote chori” campaign has no proof. It is being peddled only to sow seeds of doubt, malign Prime Minister Modi, and project Rahul Gandhi in a favourable light.… pic.twitter.com/2hqPvxDfGx
योगेंद्र के बयान से यह साफ हो जाता है कि राहुल गाँधी सच की कोई क्रांतिकारी लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि वो राजनीतिक हवा बाजी के जरिए लोगों को उकसाने की कोशिश कर रहे हैं। अपने आस-पास के देशों में जिस तरह के हालात पिछले कुछ वर्षों में बने हैं उससे भी भारत में उनका समर्थक करने वाला एक तबका खुश है।
उनका बयान दिखाता है कि राहुल गाँधी और उनकी टीम के पास इन आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस तथ्य नहीं हैं। सारी कोशिश यही है कि वो बस किसी तरह वो हवा बना दें। राहुल गाँधी अपने ट्वीट्स में GenZ जैसे शब्दों का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं यह भी लोगों को स्पष्ट समझ आता है।
राहुल गाँधी ने कभी नोटबंदी को ‘आम जनता का विरोधी’ बताकर और कभी राफेल सौदे को ‘चौकीदार चोर है’ कहकर घोटाला साबित करने की कोशिश की है। असर के नाम पर ना तो नोटबंदी ने चुनावी नतीजों में मोदी सरकार को नुकसान पहुँचाया, ना राफेल ने कोई लहर बनाई। अब वही हाल ‘वोट चोरी’ का दिख रहा है।
जनता के बीच इस मुद्दे को लेकर कोई आंदोलन, धरना या गुस्सा नहीं है। जनता कहीं भी सड़कों पर नहीं है, बस यही हो रहा है कि कुछ कॉन्ग्रेस समर्थक सोशल मीडिया पर हैशटैग चला रहे हैं। ग्राउंड पर सन्नाटा है और यही सन्नाटा राहुल गाँधी के आरोपों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।
राहुल गाँधी ने बार-बार यह निराधार आरोपों के जरिए पीएम मोदी की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया है लेकिन इन सबमें राहुल की खुद की राजनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
लोगों को लगने लगा है कि राहुल गाँधी के मुद्दों में बस हवाई बातें रहती हैं कोई ठोस सबूत या तथ्य नहीं रहते। क्योंकि अगर जनता राहुल गाँधी की बातों को मानती, जनता को लगता कि वोट चोरी हो रही है तो क्या जनता चुप रहती? क्या चुनाव नतीजे इस तरह मोदी और बीजेपी के समर्थन में होते?
इस सब आरोपों के चलते नरेंद्र मोदी की राजनीतिक लोकप्रियता तो कम नहीं होती दिख रही इसके उल्ट राहुल गाँधी की अपनी साख पर सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं।


