Thursday, July 18, 2024
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ईसाई मिशनरियों के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले सांसद ने राम मंदिर के लिए दिए ₹4 लाख, पार्टी के लोगों ने दी थी धमकी

सांसद रघुराम कृष्णम राजू ने कहा कि देश-विदेश के करोड़ों हिन्दुओं की तरह वो भी उस क्षण का दर्शन करने को बेताब हैं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर की नींव रखेंगे और भूमि-पूजन करेंगे।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की पार्टी के बागी सांसद रघुराम कृष्णम राजू ने राम मंदिर निर्माण के लिए अपनी 3 महीने की सैलरी 3.96 लाख रुपए दान में दिए हैं। उन्होंने सोमवार (जुलाई 20, 2020) को इसकी घोषणा की।

बता दें कि अगस्त 5 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर का भूमि-पूजन करेंगे। सांसद रघुराम कृष्णम राजू ने राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के नाम पत्र लिख कर चेक सौंपा।

ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री मोदी 5 अगस्त की सुबह सुबह 11 बजे अयोध्या पहुँचेंगे। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजकर 10 मिनट तक अयोध्या में रहेंगे। 5 अगस्त को भूमि पूजन का कार्यक्रम सुबह 8 बजे शुरू होगा। विहिप का कहना है कि द्वितीया सह तृतीया तिथि अपने आप में सर्वार्थ सिद्धि योग वाली है। देश के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार नरेंद्र मोदी अयोध्या जाएँगे।

सांसद रघुराम कृष्णम राजू ने कहा कि देश-विदेश के करोड़ों हिन्दुओं की तरह वो भी उस क्षण का दर्शन करने को बेताब हैं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर की नींव रखेंगे और भूमि-पूजन करेंगे। हाल ही में उन्होंने आंध्र प्रदेश में गायों की देखभाल के लिए आवाज़ उठाई थी। सांसद ने मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी को पत्र लिख कर राज्य में गोशाला डेवलपमेंट कमिटियों के गठन की माँग की थी।

उन्होंने कहा था कि मंदिरों और कई गैर-सरकारी संगठनों ने गायों की देखभाल का जिम्मा ले रखा है लेकिन उनके गोशालों में गायें मर रही हैं, ऐसे में राज्य में गोशाला कमिटी की ज़रूरत है। उन्होंने गोरक्षा हेतु ऐसा करने की अपील की थी। सांसद रघुराम कृष्णम राजू ने कहा कि ये मुद्दा हिन्दुओं के दिल के काफी नजदीक है। वो अक्सर हिन्दुओं की भावनाओं के लिए आवाज़ उठाते रहते हैं।

रघुराम कृष्णम राजू उद्योगपति भी हैं, जिन्होंने बाद में राजनीति का रुख कर लिया। हाल ही में जब तिरुपति तिरुमला देवस्थानम बोर्ड ने मंदिर की संपत्ति को नीलाम करने का निर्णय लिया था, तब उन्होंने हिन्दुओं की भावनाओं को देखते हुए इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी। हाउस-साइट डिस्ट्रीब्यूशन और बालू बेचने में हुए भ्रष्टाचार को लेकर भी उन्होंने मंदिर प्रशासन पर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद उनकी अपनी ही पार्टी विधायकों के साथ तू-तू-मैं-मैं हुई थी।

मई 2020 में वो ‘टाइम्स नाऊ’ पर डिबेट के दौरान इस बात को ऑन एयर शो में मानते नज़र आए थे कि आंध्र प्रदेश में धर्मांतरण की प्रक्रिया तेजी से चालू है। लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि इसमें सरकार का कोई हाथ नहीं है। उन्होंने कहा था कि ऐसा नहीं है कि ये कन्वर्जन की प्रक्रिया सिर्फ आंध्र प्रदेश में चल रही है, बल्कि वो तो ये कह रहे हैं कि ये पूरे देश में हो रहा है। उन्होंने इसके मिशनरियों के ‘मनी-पॉवर’ को जिम्मेदार ठहराया था।

इसके बाद उन्हें अपनी ही पार्टी के नेताओं से जान से मार डालने की धमकी मिलनी शुरू हो गई थी। उनका कहना था कि चुनाव भी उन्होंने अपने ही दम पर जीता है, इसमें जगन मोहन रेड्डी के चेहरे का कोई योगदान नहीं है। बता दें कि रघुराम कृष्णम राजू पहले भाजपा में थे। इसके बाद चुनाव आते ही उन्होंने वाईएसआरसीपी (YSRCP) का दामन थाम लिया था। उससे पहले वो चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी में भी रहे थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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