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नुपूर शर्मा मामले में भड़काऊ बयानबाजी को लेकर ओवैसी पर केस, दिल्ली पुलिस की FIR में यति नरसिंहानंद का भी नाम

दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में असदुद्दीन ओवैसी का नाम भी जोड़ा गया है। ओवैसी पर ये कार्रवाई उनके द्वारा दिए गए बयान पर हुई। उनके साथ एफआईआर में स्वामी यति नरसिंहानंद का भी नाम है।

नुपूर शर्मा केस में ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की भड़काऊ बयानबाजी के बाद दिल्ली पुलिस की IFCO यूनिट ने उनके ऊपर एफआईआर दर्ज की है। उनके अलावा स्वामी यति नरसिंहानंद के ऊपर भी केस दर्ज हुआ है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया एनालाइस करने के बाद उन लोगों केे विरुद्ध कार्रवाई की जो सोशल मीडिया पर लोगों को भड़काने और बाँटने का काम कर रहे थे। इसी क्रम में पुलिस ने नुपूर शर्मा समेत अन्य सोशल मीडिया शख्सियतों पर आईपीसी की धारा 153, 295, 505 के तहत केस को दर्ज किया है। जल्द ही सभी लोगों को इस बाबत नोटिस भेजा जाएगा

बता दें कि इससे पहले दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने अलग-अलग प्रावधानों के तहत समाज में नफरत फैलाने वालों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की थी। एफआईआर में नुपूर शर्मा और नवीन कुमार जिंदल के अलावा शादाब चौहान, सबा नकवी, मौलाना मुफ्ती नदीम, अब्दुर रहमान, गुलजार अंसारी, अनिल कुमार मीणा, पूजा शकुन का नाम शामिल है। अब ओवैसी और स्वामी यति नरसिंहानंद को मिला कर इस लिस्ट में 11 लोग शामिल हो चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि एक ओर जहाँ पुलिस ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया का विश्लेषण करने के बाद जो एफआईआर दर्ज की वो उन लोगों के विरुद्ध है जो सार्वजनिक शांति के खिलाफ लगातार पोस्ट शेयर कर रहे हैं और भड़काऊ भाषणों से लोगों को उकसा रहे हैं। वहीं इस एफआईआर में ओवैसी का नाम देख उनके समर्थक दिल्ली के संसद मार्ग पर पहुँच कर विरोध प्रदर्शन कर नुपूर शर्मा की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं। इस दौरान कई कार्यकर्ताओं को हंगामा करने पर पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की बात भी जनसत्ता की रिपोर्ट में प्रकाशित हुई है।

मालूम हो कि नुपूर शर्मा केस में ओवैसी लगातार समुदाय के लोगों को ये बताने में लगे हैं कि अगर पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी मामले में नुपूर ने माफी माँगी है तो वो माफी नहीं है। वहीं जो भाजपा ने उन्हें पार्टी से निलंबित किया है वो भी घटना के दस दिन बाद किया है जो कि जाहिर है देश के मुसलमानों की बात सुनकर नहीं, बल्कि बाहरी दबाव में आकर किया गया है

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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