Thursday, May 6, 2021
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32 लाख से ₹353 लाख… सिर्फ 10 साल में: वो MLA जिसकी सदस्यता खुद नीतीश ने करवाई थी रद्द, अभी भी हैं विधायक

2005 से ही सुपौल के छातापुर विधानसभा सीट से विधायक रहे नीरज कुमार सिंह बबलू के नाम पर कई केस दर्ज हैं। सुपौल में हुए दोहरे हत्याकांड में...

बिहार में बाहुबल का इतिहास काफी पुराना है। इसकी धमक सूबे के बाहर भी सुनी जाती रही है। एक वक्त था जब बाहुबलियों ने बिहार में अपनी समानांतर सरकारें भी चलाईं। धन और बाहुबल के जरिए इन्होंने सरकार बनाने से लेकर बिगाड़ने तक का खेल खेला। कभी राजनेताओं की जीत पक्की करने वाले बाहुबलियों को अपने दमखम पर इतना भरोसा हो गया कि उन्होंने खुद चुनावी राजनीति में किस्मत आजमाना शुरू कर दिया। 

अभी एक बार फिर से बाहुबलियों की चर्चा जोरों पर है। वजह है चुनाव का सिर पर होना। बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। 3 चरणों में राज्य में चुनाव होने हैं, जिसमें राजनीतिक पार्टियों के साथ ही बाहुबलियों ने भी जोर आजमाइश शुरू कर दी है। उत्तर पूर्व बिहार के कोसी क्षेत्र की राजनीति की बात हो तो यह बाहुबली नेता नीरज कुमार सिंह बबलू के बिना पूरी नहीं हो सकती। नीरज कुमार सिंह वर्तमान में सुपौल के छातापुर विधानसभा सीट से बीजेपी के विधायक हैं।

अभिनेता सुशांत के चचेरे भाई हैं नीरज कुमार

खास बात यह है कि देश के सबसे हॉट टॉपिक्स में से एक बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह की संदिग्ध मौत मामले के बाद नीरज कुमार सुर्खियों में बने हुए हैं। बताया जाता है कि सुशांत इनके चचेरे भाई थे। संदिग्ध स्थिति में सुशांत की मौत को लेकर इन्होंने शुरुआती समय में ही कहा था कि उन्होंने आत्महत्या नहीं की बल्कि उनकी हत्या की गई है।

बीजेपी विधायक नीरज बबलू ने सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में काफी मुखरता से आवाज उठाई थी। उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से व्यक्तिगत रूप से इस मामले की जाँच सीबीआई से करवाने की माँग की थी। वे सुशांत सिंह राजपूत के अंतिम संस्कार में शामिल होने मुंबई भी गए थे।

अपराधों से गहरा नाता

2005 से ही सुपौल के छातापुर विधानसभा सीट से विधायक रहे नीरज कुमार सिंह बबलू के नाम पर पुलिस थानों में कई केस दर्ज हैं। सुपौल में हुए दोहरे हत्याकांड में नाम सामने आने के बाद नीरज कुमार चर्चा में आ गए थे। तब पुलिस ने रेत के ढेर के नीचे से दो लाशें बरामद की थीं। मारे गए युवकों के परिजनों ने नीरज कुमार पर हत्या करवाने का आरोप लगाया था। इस मामले में जब विधायक नीरज बबलू से बात की गई तो उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा था कि बेटों के बिछड़ने के गम में परिजनों को मानसिक आघात लगा है, इस कारण उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

नीरज सुपौल के बड़े दबंग के तौर पर जाने जाते हैं और उनके खिलाफ कई संगीन मामले पुलिस थानों में दर्ज हैं। उन पर चोरी से संबंधित 3 (आईपीसी धारा -379), आपराधिक धमकी से संबंधित 1 (आईपीसी धारा -506), हत्या की धमकी से संबंधित 2 (आईपीसी धारा -386) अपहरण से संबंधित 1, चोट पहुँचाना, मारपीट (आईपीसी की धारा -452) से संबंधित 1, हत्या से संबंधित आरोप (IPC धारा -307), घर को नष्ट करने के इरादे से आग या विस्फोटक पदार्थ के इस्तेमाल से संबंधित (आईपीसी धारा -436) जैसे कई केस दर्ज हैं

2005 में उनके खिलाफ 15, 2010 में 6 और साल 2015 में 8 आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। हालाँकि इनमें से किसी भी मामले में उन पर आरोप साबित नहीं हुआ है और उन्हें किसी भी मामले में सजा नहीं मिली है।

राजनीतिक करियर

छातापुर विधासभा सीट से 2015 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीत कर नीरज चौथी बार विधानसभा पहुँचे थे। बीते चुनाव में कोसी क्षेत्र में बीजेपी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था लेकिन नीरज ने काँटे की टक्कर देकर आरजेडी प्रत्याशी जहूर आलम को हराकर शानदार जीत दर्ज की थी।

नीरज ने करीब 11 हजार वोटों के अंतर से तत्कालीन जदयू-आरजेडी महागठबंधन के उम्मीदवार जहूर आलम को शिकस्त दी थी। नीरज कुमार सिंह साल 2005 से ही लगातार छातापुर विधानसभा सीट से चुनाव जीतते रहे हैं। बीजेपी में शामिल होने से पहले नीरज कुमार सिंह बबलू नीतीश कुमार की पार्टी जदयू का भी हिस्सा रह चुके हैं।

नीरज कुमार बबलू JDU के टिकट पर 3 बार विधायक रह चुके हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधानसभा से इनकी सदस्यता खत्म करवा दी थी, लेकिन कोर्ट ने उस आदेश को रद्द कर दिया था। जिसके बाद बबलू ने नीतीश से बगावत कर BJP का दामन थाम ‌लिया। अब विधानसभा चुनाव में ये BJP के टिकट पर छातापुर से उम्‍मीदवार हैं। RJD ने यहाँ से इनके मुकाबले मोहम्मद जफूर आलम को अपना उम्मीदवार बनाया है। नीरज कुमार सिंह को कोसी क्षेत्र में बीजेपी का बड़ा चेहरा माना जाता है।

साल 2017 में छातापुर के भाजपा विधायक नीरज कुमार बबलू ने कहा था कि उनसे कजाकिस्तान से फोन कर पाँच करोड़ रुपए रंगदारी माँगी गई है और नहीं देने पर गोली से छलनी कर देने की धमकी दी गई है।

राज्य के हाईवे प्रोजेक्ट को डील करने वाली कंपनी Gammon-India Ltd ने रंगदारी मामले में जनवरी 2008 में इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसमें बबलू के खिलाफ 9 लाख रुपए की रंगदारी माँगने की शिकायत की गई थी। बबलू कभी बिहार के एक दूसरे बाहुबली और राजपूतों के नेता आनंद मोहन के करीबी के रूप में जाने जाते थे।

कितनी है नीरज कुमार की संपत्ति

ADR की रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव में जो उन्होंने हलफनामा दिया था, उसके आधार पर साल 2005 में उनकी संपत्ति 32,41,534 रुपए थी। 2010 के चुनाव में उनकी संपत्ति बढ़कर 1,07,11,894 रुपए हो गई। वहीं साल 2015 के हलफनामे के मुताबिक अभी उनकी संपत्ति 3,53,73,770 रुपए है। उन पर अभी करीब 8 लाख रुपए की देनदारी है। उनके पास कृषि योग्य भूमि भी है।

उत्तर बिहार में भारी पड़ते रहे हैं बाहुबली

उत्तर बिहार में लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बाहुबली बंदूक के बल पर वोट बटोरते रहे हैं। बूथों पर बंदूकबाजों की चलती थी और लाशें भी गिरतीं थीं। एक वह भी दौर था, जब बिहार में होने वाले अधिकतर चुनाव रक्तरंजित होते थे। जब तक ईवीएम से मतदान आरंभ नहीं हुआ था, बाहुबली और उनके गुर्गे बूथों पर कब्जा जमाते थे। कई दशकों तक चुनाव में वीरेंद्र सिंह मोहबिया जैसे बाहुबलियों का बोलबाला रहा। 

गोपालगंज में काली पांडेय, सीवान में मोहम्मद शहाबुद्दीन, शिवहर में आनंद मोहन और मुजफ्फरपुर-वैशाली में कौशलेंद्र शुक्ला उर्फ छोटन शुक्ला जैसे बाहुबलियों की उम्मीदवारी से चुनावी बाजियाँ पलटती रहीं। चंपारण की धरती पर भी कई बाहुबलियों का आमना-सामना हुआ, जिसमें कई अब दिवंगत हो चुके हैं। चंपारण के जंगलों में भी दस्यु समूहों का काफी प्रभाव था, जो येन-केन-प्रकारेण चुनावी राजनीति को प्रभावित करने का प्रयास करते थे।

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