Tuesday, July 23, 2024
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हिंसा पर तमिलनाडु के सुर में बोलते रहे चाचा-भतीजा, मीडिया के सामने रोते रहे बिहारी मजदूर: अब टीम भेजेगी नीतीश सरकार

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा ने स्पष्ट कहा कि तमिलनाडु में मजदूरों के साथ दुखद घटनाएँ हो रही हैं और इस मामले में तमिलनाडु के DGP झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जमुई और मुंगेर के लोग सहमे हए हैं। पलायन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "अगर मामला गलत निकला तो मैं माफी माँगूँगा नहीं तो आपको सदन में माफी माँगनी पड़ेगी।"

तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों के साथ हत्या और मारपीट जैसी वारदातों को तमिलनाडु सरकार के साथ-साथ बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी नकारा है। हालाँकि, वहाँ से लौटने वाले लोगों ने अत्याचारों की कहानी जब सुनानी शुरू की तो तमिलनाडु के साथ-साथ बिहार सरकार की भद पीट गई। बिहार की नीतीश कुमार की सरकार की हर तरफ छीछालेदर होने लगी।

आलोचनाओं के बीच बिहार सरकार ने हकीकत का पता लगाने के लिए अधिकारियों की एक टीम तमिलनाडु भेजने की घोषणा की है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसके लिए मुख्य सचिव आमिर सुबहानी और डीजीपी आरएस भट्टी के साथ बैठक के बाद यह निर्णय लिया। वहीं, विपक्षी दल भाजपा ने अधिकारियों के साथ सर्वदलीय टीम भेजने की माँग की है।

इसके पहले तेजस्वी ने बिहारियों के साथ हिंसा को सिरे से नकार दिया था। इसे नकारने की वजह भी हो सकती है। जिस समय यह घटना मीडिया में आई, उस समय बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव उसी तमिलनाडु में बैठ कर राजनीतिक पींगे बढ़ा रहे थे। वे तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के जन्मदिन में शामिल होकर बर्थडे केक खा रहे थे।

जब मामला मीडिया में आया तो तेजस्वी ने एक शब्द भी कुछ नहीं कहा। सोशल मीडिया पर लोग उनसे सवाल पूछने लगे। इस बीच बिहार में विपक्षी पार्टी भाजपा इस मुद्दे पर सरकार को घेरने लगी। 2 मार्च 2023 को सदन में हंगामा हो गया। विपक्षी दलों ने मजदूरों के मुद्दे पर सदन से वॉकआउट कर दिया। मीडिया में सरकार की किरकिरी होने लगी। इसके बाद पीएम की कुर्सी खोज रहे सीएम नीतीश कुमार की तंद्रा टूटी।

नीतीश ने ट्वीट किया, “मुझे समाचार पत्रों के माध्यम से तमिलनाडु में काम कर रहे बिहार के मजदूरों पर हो रहे हमले की जानकारी मिली है। मैंने बिहार के मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक को तमिलनाडु सरकार के अधिकारियों से बात कर वहां रह रहे बिहार के मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निदेश दिया है।” विकास पुुरुष कहलाने वाले सीएम नीतीश कुमार को बिहारियों की दुर्दशा की जानकारी समाचार-पत्रों से मिली।

बिहार में जदयू-राजद गठबंधन सरकार की किरकिरी और स्टालिन सरकार पर सवाल उठता देख तमिलनाडु के डीजीपी शैलेंद्र बाबु ने बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बिहारी या हिंदीभाषी लोगों के खिलाफ हिंसा की घटनाएँ झूठी और अफवाह हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हिंसा के जो वीडियो शेयर किए जा रहे हैं, वे भी फर्जी हैं।

बिहार पुलिस ने अपनी तरफ से घटना को सत्यापित किए बिना ही तमिलनाडु के डीजीपी के बयान के आधार पर घटना को झूठा बता दिया। यह तब हुआ जब तमिलनाडु से लौट रहे पीड़ितों के नाम और पते के साथ समाचार पत्रों में उनकी तस्वीरें छप रही थीं। ये पीड़ित वहाँ की घटना के बारे में खुलकर मीडिया को बता रहे थे। बिहार पुलिस ने इन पीड़ितों से मिलकर हकीकत जानने के बजाय तमिलनाडु के डीडीपी के बयान पर भरोसा किया।

तमिलनाडु के डीजीपी के बयान के बाद बिहार पुलिस उनका संदर्भ देतेे हुए ट्वीट किया, “कुछ समाचार पत्रों तथा अन्य माध्यमों से प्रकाशित/प्रसारित सूचना कि तमिलनाडु राज्य में प्रवासी हिंदी भाषी श्रमिकों तथा कामकाजी लोगों के साथ कतिपय स्थानीय लोगों के द्वारा हमला की जा रही है का पुलिस महानिदेशक, तमिलनाडु द्वारा खंडन किया गया।”

तमिलनाडु सरकार और बिहार पुलिस का सहारा मिलते ही बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव नींद से जागे और तमिलनाडु की घटना के लिए भाजपा और एवं मीडिया को दोषी ठहराने लगे। तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा, “बीजेपी, बीजेपी समर्थित मीडिया और इनके नेताओं का तथ्य और सत्य से कोई नाता नहीं है। इनकी झूठ फिर पकड़ी गयी। भ्रम, झूठ, नफ़रत, हिंसा और अफवाह फैलाना ही भाजपाइयों का मुख्य धंधा और पूँजी है।”

सोशल मीडिया पर शेयर की जाने वाली तस्वीरें झूठी हो सकती हैं। लोगों के बयान झूठे हो सकते हैं, लेकिन तमिलनाडु से लौट रहे लोग झूठ क्यों बोलेंगे यह समझ से परे है। सरकार ने लौटे दर्जनों लोगों में किसी से मिलने और वहाँ की वास्तविक स्तिथि को जानने का प्रयास नहीं किया। सरकार बस इस मामले की लीपापोती में लगी हुई है।

अगर तमिलनाडु के डीजीपी सच बोल रहे हैं, तो बिहार सरकार ने यह जानने का प्रयास क्यों नहीं किया कि जो लौट तमिलनाडु से लौट रहे हैं वेे हिंदी बोलने की वजह क्यों बता रहे हैं। क्यों इतने लोग अचानक घर लौटने लगे? आखिर इनके पीछे कौन लोग हैं? हालाँकि, इसकी छानबीन तो दूर सरकार ने इसे झुठलाने का काम शुरू कर दिया।

अब भाजपा एवं अन्य विपक्षी दलों के दबाव में बिहार सरकार अधिकारियों की टीम वहाँ भेजकर स्थिति जानना चाह रही है। वहीं, भाजपा का कहना है कि अधिकारियों के दल के साथ सर्वदलीय टीम भी भेजी जाए। हालाँकि, इसको लेकर सरकार सहमत हुई है या नहीं, अभी जानकारी सामने नहीं आई है।

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा ने स्पष्ट कहा कि तमिलनाडु में मजदूरों के साथ दुखद घटनाएँ हो रही हैं और इस मामले में तमिलनाडु के DGP झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जमुई और मुंगेर के लोग सहमे हए हैं। पलायन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “अगर मामला गलत निकला तो मैं माफी माँगूँगा नहीं तो आपको सदन में माफी माँगनी पड़ेगी।”

धनबाद-एलेप्पी एक्सप्रेस से बुधवार (1 मार्च 2023) को हिंदी भाषियों का एक जत्था राँची लौटा। राँची लौटे एक व्यक्ति ने बताया कि वहाँ पिछले 20 दिन से माहौल खराब है। वहाँ के स्थानीय लोग पकड़-पकड़कर लोगों से पूछ रहे हैं कि वे कहाँ से हैं। अगर वे हिंदीभाषी राज्य से बताते हैं तो उन्हें तमिल में गालियाँ दी जाती हैं और मारपीट की जाती है। तमिलनाडु में रहने वाले बिहारी लोगों का कहना है कि वे बाहर निकलने से कतरा रहे हैं।

तमिलनाडु की सरकार भले ही इन घटनाओं को नकारे, लेकिन हाल के कुछ दिनों में हुई हत्याएँ वहाँ की स्टालिन सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। सिकंदरा थाना क्षेत्र में दो युवकों की मौत तथा दो के घायल होने की खबर है। वहीं, 21 फरवरी 2023 को त्रिपुर में धधौर निवासी कामेश्वर यादव के पुत्र पवन यादव की हत्या नारियल काटने वाले धारदार हथियार से कर दी गई थी।

कामेश्वर यादव को बचाने की चेष्टा कर रहे भाई नीरज के सिर पर भी धारदार हथियार से प्रहार किया गया था। उसके ममेरे भाई भुल्लो निवासी बलिराज की भी पिटाई करके गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था। सिकंदरा रविदास टोला के युवक की भी संदिग्ध मौत हो गई थी। कहा जा रहा है कि युवक का शव 26 फरवरी 2023 को फंदे से झूलता हुआ मिला था।

अपडेट: दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में तमिलनाडु में हिंदी भाषिक श्रमिकों की हत्या, अंगुलियाँ काटने, फाँसी पर लटकाने जैसे दावे किए गए थे। हमने स्पष्ट रूप से दैनिक भास्कर को क्रेडिट देते हुए ये दावे प्रकाशित किए थे। लेकिन राष्ट्रव्यापी विवाद के बाद दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट अपडेट करते हुए वे दावे हटा लिए हैं। चूँकि भास्कर अपनी पूर्व की रिपोर्ट में किए गए दावों से पीछे हट गया है, इसलिए हमने भी अपनी रिपोर्ट में आवश्यक बदलाव किए हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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