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BMC चुनाव 2026 में BJP बनी शिवसेना का ‘बड़ा भाई’, मुंबई पर कब्जे के लिए ठाकरे ब्रदर्स आए साथ: जानें- सीट बंटवारे से लेकर इस ‘धनी’ सियासी जंग की हर अहम बात

BMC चुनाव में महायुति गठबंधन में भाजपा और एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना मुख्य पार्टनर हैं। कुल 227 सीटों में से भाजपा को 137 सीटें मिलीं। एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना को 90 सीटें मिलीं हैं।

देश की सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव अब सर पर आ गए हैं। 15 जनवरी 2026 को वोटिंग होगी और 16 जनवरी को नतीजे आएँगे। कुल 227 सीटों वाली इस निगम पर कब्जा करने की लड़ाई में सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी दलों के बीच काँटे की टक्कर होने वाली है।

नामांकन की आखिरी तारीख 30 दिसंबर 2025 से ठीक एक दिन पहले महायुति ने अपना सीट बँटवारा फाइनल कर लिया। इसी बीच विपक्ष में भी गठबंधन की तस्वीर साफ हुई है। यह चुनाव सिर्फ मुंबई की सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि मराठी अस्मिता, विकास और हिंदुत्व के मुद्दों पर भी बड़ा मुकाबला है। आइए विस्तार से समझते हैं कि सीट बंटवारा कैसे हुआ, कौन बड़ा भाई बना और शिवसेना के दो गुटों के बीच क्या जंग चल रही है।

महायुति में सीट बँटवारा, बीजेपी बनी बड़ा भाई

महायुति गठबंधन में भाजपा और एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना मुख्य पार्टनर हैं। अजित पवार की एनसीपी इस बार मुंबई में अलग लड़ रही है। लंबी खींचतान के बाद 29 दिसंबर 2025 को सीट बंटवारे पर मुहर लग गई। अब कुल 227 सीटों में से भाजपा को 137 सीटें मिली हैं, वहीं, एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना को 90 सीटें मिलीं।

दोनों दल अपने कोटे से कुछ सीटें छोटे सहयोगियों को दे सकते हैं। मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम ने कहा कि पहले 207 सीटों पर सहमति बनी थी, फिर बाकी 20 पर भी फैसला हो गया। अब संयुक्त प्रचार शुरू होगा।

बीजेपी और शिवसेना-शिंदे ने दिखाई मजबूती

यह बंटवारा भाजपा की मजबूती दिखाता है। पहले की बातचीत में शिंदे गुट 100 से 125 सीटें माँग रहा था, लेकिन भाजपा ने अपनी पकड़ मजबूत रखी। 2024 के विधानसभा चुनाव और हाल की नगर परिषद चुनावों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। उसकी संगठन शक्ति और केंद्र की ताकत ने उसे गठबंधन में ‘बड़ा भाई’ बना दिया।

पहले मुंबई की राजनीति में शिवसेना हमेशा बड़ा भाई रही थी। 2017 के बीएमसी चुनाव में अविभाजित शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनी थी और महापौर पद उसके पास था। लेकिन अब शिंदे गुट को भाजपा पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की कई बैठकों के बाद यह फॉर्मूला तय हुआ। महायुति का दावा है कि वे 150 से ज्यादा सीटें जीतकर मुंबई में अपना महापौर बनाएंगे।

शिवसेना बनाम शिवसेना, ठाकरे भाइयों का गठबंधन

इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत है दो शिवसेना गुटों का आमना-सामना। एक तरफ शिंदे गुट महायुति के साथ सरकारी ताकत और विकास के नाम पर वोट माँग रहा है। दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना (यूबीटी) ने राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) से गठबंधन किया है। 20 साल बाद ठाकरे भाई एक साथ आए हैं। उन्होंने ‘मराठी मानूस’ की अस्मिता और ‘बीजेपी की लूट’ के मुद्दे पर फोकस किया है।

सीट बंटवारे में उद्धव की शिवसेना (यूबीटी) को 145-150 सीटें मिली हैं, तो एमएनएस को 65-70 सीटें। हालाँकि कुछ सीटें शरद पवार की एनसीपी (एसपी) को भी दी जा सकती हैं, लेकिन बातचीत चल रही है।

भांडुप और विखरोली जैसे कुछ वार्डों पर दोनों दलों में थोड़ी खींचतान हुई, लेकिन बड़े हित में फैसला हो गया। उद्धव और राज ठाकरे ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करके गठबंधन का ऐलान किया। उनका कहना है कि मुंबई को मराठी लोगों का गढ़ बनाए रखना है और बीजेपी की ‘बाहरी’ सत्ता को रोकना है।

यह गठबंधन महायुति के लिए बड़ी चुनौती है। 2017 में एमएनएस ने 7 सीटें जीती थीं, जो बाद में उद्धव गुट में शामिल हो गईं। अब दोनों ठाकरे मिलकर मराठी वोटों को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं।

विपक्ष का दूसरा खेमा- कॉन्ग्रेस और वंचित बहुजन आघाड़ी का गठबंधन

महाविकास आघाड़ी (एमवीए) में दरार पड़ गई। जिसके बाद कॉन्ग्रेस ने उद्धव-राज के गठबंधन को ‘सांप्रदायिक’ बताकर अलग रहने का फैसला किया। ऐसे में कॉन्ग्रेस ने प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीए) से गठबंधन किया। यह गठबंधन दलित, अल्पसंख्यक और उत्तर भारतीय वोटों को जोड़ने की कोशिश है।

सीट बँटवारे में कॉन्ग्रेस को करीब 165 सीटें मिली हैं, तो वीबीए को 62 सीटें मिली हैं। इसके अलावा कुछ सीटें राष्ट्रीय समाज पक्ष और आरपीआई (गवई) को भी मिल सकती हैं।

कॉन्ग्रेस ने अपनी पहली लिस्ट में 87 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि यह विचारधारा का गठबंधन है, सत्ता की लड़ाई नहीं। लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं में थोड़ी नाराजगी है क्योंकि कई मजबूत सीटें वीबीए को दी गईं।

BMC चुनाव काफी अहम, विधानसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल

बीएमसी का बजट 74 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा है। यह एशिया की सबसे अमीर निगम है। सड़कें, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास के काम यहां के मुख्य मुद्दे हैं। पिछले चुनाव 2017 में अविभाजित शिवसेना ने 84 सीटें, भाजपा ने 82, कॉन्ग्रेस ने 31, एनसीपी ने 9 और एमएनएस ने 7 सीटें जीती थीं। उसके बाद शिवसेना टूटी और शिंदे गुट भाजपा के साथ चला गया।

अब महायुति विकास और हिंदुत्व के नाम पर वोट माँग रही है। विपक्ष मराठी अस्मिता, भ्रष्टाचार और बीजेपी की ‘केंद्र की ताकत’ के खिलाफ लड़ रहा है। नामांकन 23 दिसंबर से शुरू हो चुके हैं। कई दलों ने अपनी लिस्टें जारी कर दी हैं। भाजपा और कॉन्ग्रेस ने 60-80 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं।

यह चुनाव मुंबई की राजनीति का नया अध्याय लिखेगा। क्या भाजपा पहली बार सबसे बड़ी पार्टी बनकर महापौर पद हासिल करेगी? या ठाकरे भाई मिलकर पुरानी शिवसेना की ताकत लौटाएँगे? या कॉन्ग्रेस-वीबीए कोई सरप्राइज देंगे? 15 जनवरी को वोटिंग के बाद सब साफ हो जाएगा। मुंबईकरों की नजर इस रोचक मुकाबले पर टिकी है।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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