Homeराजनीतिवरिष्ठ नागरिकों को नहीं भरना होगा ITR, प्रवासी मजदूरों को घर खरीदने में छूट:...

वरिष्ठ नागरिकों को नहीं भरना होगा ITR, प्रवासी मजदूरों को घर खरीदने में छूट: बजट 2021 में करदाताओं को ये सौगात

टैक्स रिटर्न्स के असेसमेंट को अब 6 वर्षों की बजाय 3 वर्षों में ही रीओपन किया जा सकता है। छोटे करदाताओं के लिए 'फेसलेस डिस्प्यूट रिजोल्यूशन कमिटी' के गठन का ऐलान किया गया। साथ ही डिजिटल लेन-देन के लिए टैक्स ऑडिट थ्रेसहोल्ड बढ़ाया गया।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार (फ़रवरी 1, 2021) को आम बजट पेश किया, जिसमें इनकम टैक्स को लेकर भी अहम ऐलान किए गए। केंद्रीय वित्त मंत्री ने बीते साल के बजट में नए टैक्स विकल्प का ऐलान किया था। जो लोग पुराने टैक्स स्ट्रक्चर में नहीं रहना चाहते हैं, उनके लिए नया टैक्स विकल्प लाए गए थे। नए टैक्स सिस्टम को 7 स्लैब्स में बाँटा गया था। अब सरकार ने करदाताओं के लिए आगे के ऐलान किए हैं।

वरिष्ठ नागरिकों को टैक्स रिटर्न्स पर छूट दी गई है। जो 75 वर्ष से ऊपर की उम्र के हैं, उनके लिए ‘Compliance Burden’ कम दिया गया। अगर कोई वरिष्ठ नागरिक केवल इंटरेस्ट से ही कमाई कर रहा है, या फिर पेंशन ही उसकी एकमात्र कमाई है – तो, ऐसी स्थिति में उन्हें किसी भी प्रकार के टैक्स रिटर्न्स फाइल करने की ज़रूरत नहीं है। इसे बुजुर्गों के लिए टैक्स में एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

इन सबके अलावा टैक्स रिटर्न्स के असेसमेंट को अब 6 वर्षों की बजाय 3 वर्षों में ही रीओपन किया जा सकता है। छोटे करदाताओं के लिए ‘फेसलेस डिस्प्यूट रिजोल्यूशन कमिटी’ के गठन का ऐलान किया गया। साथ ही डिजिटल लेन-देन के लिए टैक्स ऑडिट थ्रेसहोल्ड बढ़ाया गया। FPIs के लिए डिविडेंट टैक्स बर्डेन को भी घटाया गया है। अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए 1 साल तक पेमेंट का ब्याज घटाया गया।

जो माइग्रेंट मजदूर हैं, उन्हें नोटफाइड अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए टैक्स में छूट मिलेगी। साथ ही एयरक्राफ्ट लीजिंग कंपनियों को भी टैक्स से छूट देने का ऐलान किया गया है। हालाँकि, होम लोन की शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार करदाताओं पर कम से काम बोझ पड़े, इसके लिए प्रतिबद्ध है। औसत करदाता के हाथ में अधिक रुपए आने से अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

12 वर्ष पहले गोरखनाथ पीठ के पीठाधीश्वर, फिर देश के सबसे बड़े सूबे के CM: जनता तक पहुँच और समस्याओं पर तत्काल प्रतिक्रिया –...

योगी आदित्यनाथ की गोरखनाथ पीठाधीश्वर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक की यात्रा, विरासत को आगे बढ़ाने से लेकर विकसित होते UP की पूरी कहानी।

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।
- विज्ञापन -