एक तरफ इंदिरा-नेहरू का दौर, जहाँ इनकम टैक्स रेट पहुँचा था 97.5% और आम जनता की कमाई कॉन्ग्रेस खाती थी। वहीं, पीएम मोदी के दौर में आम जनता अपनी मेहनत की कमाई को अपने पास रख सकती हैं।
टैक्स स्लैब इसलिए बनाए जाते हैं ताकि इनके आधार पर टैक्स का कैलकुलेशन किया जा सके। क्योंकि जब किसी की कमाई ₹12 लाख से ज्यादा होगी तो इस पर सीधे-सीधे टैक्स नहीं लगाया जाएगा बल्कि इसको अलग-अलग स्लैब में बाँटा जाएगा।
वित्तीय वर्ष 2013-14 में 50 लाख रुपये से ज्यादा कमाने वाले लोगों की संख्या 1.85 लाख थी, जो 2023-24 में बढ़कर 9.39 लाख हो गई है। इस आय वर्ग में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है।