‘जिसके हाथ में चाय का जूठा कप देना था, उसके हाथ में जनता ने देश दे दिया’

दिल्ली में चंद्रबाबू नायडू के धरने के दौरान उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के हाथ में कुछ ऐसे पोस्टर्स नज़र आए, जिन्होंने इस धरने को विवादों ने लाकर खड़ा दिया है।

राजनीति के स्तर को गिराते हुए अभी कुछ समय पहले मध्य प्रदेश में एनसीपी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कुत्तों के गले में देश के पीएम का नाम लटकाया था। और, अब आन्ध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए धरने पर बैठे टीडीपी के प्रमुख और आन्ध्र प्रदेश मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के समर्थकों ने इस दिशा में सारी हदों को पार कर दिया है।

दिल्ली में चंद्रबाबू नायडू के धरने के दौरान उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के हाथ में कुछ ऐसे पोस्टर्स नज़र आए, जिन्होंने इस धरने को विवादों ने लाकर खड़ा दिया है, और साथ ऐसी घटना से उनकी पार्टी की सोच पर भी सवालों का उठना स्वाभाविक ही है। दरअसल, इस धरने के दौरान वहाँ जो पोस्टर दिखे, उनपर लिखा था, ‘जिसके हाथ में चाय का जूठा कप देना था, उसके हाथ में जनता ने देश दे दिया।’

इस शर्मनाक घटना पर टीडीपी के जयादेव गल्ला ने सफ़ाई देते हुए कहा है कि धरना स्थल पर दिखे पोस्टर्स बिलकुल भी सही नहीं है, साथ ही वह इसका समर्थन भी नहीं करते हैं। उनका कहना है कि ऐसा बिलकुल भी नहीं किया जाना चाहिए। जयादेव ने साथ ही यह भी कहा कि यह कार्य उनकी पार्टी द्वारा नहीं किया गया है।

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ऐसी हरक़तों पर सवाल यह उठता है कि अगर धरना स्थल पर उनके समर्थकों ने ऐसी ओछी हरक़त नहीं की है तो फिर किसने की है…? ज़ाहिर है देश में पीएम के अगर समर्थक हैं तो उनके विरोधी भी हैं, लेकिन इस तरह की हरक़तें चुनाव के आने के साथ बढ़ती ही जा रही हैं। इन घटनाओं से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि राजनीति की आड़ में किस तरह राजनेता अपनी मानसिकता का उदाहरण दे रहे हैं।

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