मध्य प्रदेश के बाद अब कर्नाटक सरकार पर भी संकट के बादल, राहुल गाँधी ने की बैठक

कर्नाटक विधानसभा में भी 104 विधायकों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है और 78 विधायकों के साथ दुसरे नंबर की पार्टी कॉन्ग्रेस उससे काफ़ी पीछे है।

लोकसभा चुनाव ख़त्म होने के साथ ही विभिन्न न्यूज़ चैनलों द्वारा एग्जिट पोल्स किए गए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाला राजग अधिकांश एग्जिट पोल्स में बहुमत का आँकड़ा पार करता दिख रहा है। मोदी लहर का असर अब भोपाल और बंगलौर के राजनीतिक गलियारों तक पहुँच गया है। दोनों राजधानियों में सियासी पारा उच्च स्तर पर पहुँच गया है। इन राज्यों में सत्ता पर काबिज कॉन्ग्रेस पार्टी के पास ख़ुद के दम पर बहुमत का आँकड़ा नहीं है और सहयोगियों के भरोसे सरकार चल रही है। जहाँ कर्नाटक में भाजपा को रोकने के लिए कॉन्ग्रेस ने अपने से काफ़ी कम विधायकों वाली पार्टी जेडीएस को मुख्यमंत्री पद सौंपा हुआ है, मध्य प्रदेश में बसपा और निर्दलीयों की मदद से कॉन्ग्रेस की सरकार चल रही है।

एग्जिट पोल्स के अनुसार, कर्नाटक में कॉन्ग्रेस-जेडीएस गठबंधन एक बड़ी हार की तरफ बढ़ रहा है। राज्य में 28 लोकसभा सीटें हैं और अधिकतर एग्जिट पोल्स में भाजपा 20 का आँकड़ा पार करती दिख रही है। राज्य की विधानसभा में भी 104 विधायकों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है और 78 विधायकों के साथ दुसरे नंबर की पार्टी कॉन्ग्रेस उससे काफ़ी पीछे है। लोकसभा चुनाव के परिणाम अगर एग्जिट पोल्स के अनुसार आते हैं, फिर राज्य में अधिकांश लोकसभा और विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्ज़ा होने के कारण गठबंधन के लिए सरकार चलाना बहुत मुश्किल हो जाएगा।

एक वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि कर्नाटक गठबंधन का पहला लक्ष्य अधिकतम लोकसभा सीट जीतने का था लेकिन अब यह लक्ष्य फेल होता दिख रहा है, ऐसे में गठबंधन को जारी रखने में कोई भलाई नहीं है। कर्नाटक कॉन्ग्रेस की कलह सतह पर न आ जाए, इस डर से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने पहले ही राज्य के नेताओं को गठबंधन बचाए रखने की नसीहत दे डाली है। इंडिया टुडे-एक्सिस के एग्जिट पोल की मानें तो भाजपा राज्य में 23 से 25 लोकसभा सीटें जीत सकती है, जबकि कॉन्ग्रेस को 3 से 5 सीटों के साथ संतोष करना पड़ेगा।

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उधर मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव ने राज्यपाल को पत्र लिख कर कमलनाथ सरकार को विधानसभा में बहुमत साबित करने की माँग की है। राज्य में 114 विधायकों वाली कॉन्ग्रेस और 109 विधायकों वाली भाजपा के बीच ज्यादा गैप नहीं है और कमलनाथ सरकार को समर्थन दे रहे कई अन्य विधायकों ने नाराज़गी जताते हुए लोकसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद अपना रुख स्पष्ट करने की बात कही है। मध्य प्रदेश सरकार 6 महीने पूरे हुए हैं, कर्नाटक में 1 वर्ष से कॉन्ग्रेस-जेडीएस की सरकार चल रही है। मार्च में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने कहा था कि अगर उनकी पार्टी को राज्य में 22 लोकसभा सीटें आ जाती हैं तो वो 24 घंटे के भीतर मुख्यमंत्री बन जाएँगे।

कर्नाटक के कई कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ दिल्ली में राहुल गाँधी की बैठक भी हुई, जिसमें चुनाव परिणाम के बाद के हालातों से निपटने के तरीकों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने तो एग्जिट पोल्स के लिए भी ईवीएम पर अपना गुस्सा निकाला। मध्य प्रदेश में भाजपा को उम्मीद है कि कॉन्ग्रेस के कुछ विधायक नाराज़ होकर कमलनाथ के पक्ष में वोट नहीं करेंगे और सपा-बसपा के विधायक भाजपा का समर्थन कर सकते हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए कॉन्ग्रेस द्वारा जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार किए जाने की बातें सामने आ रही हैं।

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