Wednesday, April 21, 2021
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‘गाँधीवादी, अहिंसा, एकता, प्रेम की बात करने वाला’ – उमर खालिद के लिए कॉन्ग्रेस, कॉन्ग्रेसी नेता और सेकुलरों का चालू है राग

“उमर खालिद एक शिक्षित और युवा नेता हैं। उसने खुलेआम कहा कि वह नास्तिक है। उसके भाषण में भी अहिंसा, एकता, प्रेम और भारतीय ध्वज का उल्लेख है। लेकिन काफी सिर्फ यही है कि उसका मुस्लिम नाम है और वह मुस्लिम परिवार में पैदा हुआ।”

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे मामले में उमर खालिद की गिरफ्तारी के बाद तथाकथित सेकुलर इस मुद्दे पर नरेंद्र मोदी सरकार को घेरने में जुटे हुए हैं। सोशल मीडिया पर खालिद को रिहाई दिलवाने के लिए बकायादा अभियान चल रहा है। इसमें कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता से लेकर मीडिया गिरोह के पत्रकार और बुद्धिजीवी भी शामिल हैं।

कर्नाटक कॉन्ग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकॉउंट पर इस संबंध में ट्वीट करते हुए लिखा है, “मोदी सरकार उन सभी धर्मनिरपेक्ष, उदारवादी, आवाजों को कुचलने में विश्वास करती है, जो उन्हें अपने निरंकुश राज्य के कार्यान्वयन में खतरा दिखते हैं।” ट्वीट में आगे लिखा है, “दिल्ली दंगों की जाँच में कई छात्र नेताओं और बुद्धिजीवियों को जेल में डाल दिया गया है, यह इस बात का सबूत है कि मोदी सरकार अपने विपक्षी को कुचलना चाहती है।”

इसी प्रकार दिग्विजय सिंह अपने ट्वीट में हर्ष मंदर का ट्वीट शेयर करते हैं, जिसमें उमर खालिद के समर्थन की बात है। दिग्विजय सिंह लिखते हैं, “हर्ष मंदर एक बहुत ही कर्तव्यनिष्ठ एवं ईमानदार मध्य प्रदेश काडर के IAS अधिकारी रहे हैं। मैं उनसे पिछले 35-40 वर्षों से परिचित हूँ। यदि वे उमर ख़ालिद के पक्ष में हैं तो मैं उनके साथ हूँ। गॉंधीवादी कभी हिंसक प्रवृत्ति का नहीं हो सकता। मैं #StandWithUmarKhalid का समर्थन करता हूँ।”

इसी तरह एमनेस्टी इंटरनेशनल के दक्षिण एशिया निदेशक बिराज पटनायक लिखते हैं कि उमर खालिद की गिरफ्तारी एक देशद्रोह है। हर दिन जो वो जेल में बिता रहा है, वो बहुत ज्यादा है। ये एक और अध्याय जुड़ा है, दिल्ली पुलिस द्वारा उनकी खोजी पड़तालों में।

पत्रकार सागरिका घोष लिखती हैं, “मोदी सरकार जितना अधिक छात्रों, प्रोफेसरों, कवियों को गिरफ्तार कर रही है, भारत का लोकतंत्र उतना ही कमजोर होता जा रहा है और वास्तविक खतरों को पहचानने और उनसे निपटने में असमर्थ हो रहा है। जब हम एक दूसरे पर हमला करने में व्यस्त हैं, तो भारत के असली दुश्मनों को हँसना चाहिए।”

लेखक हुसैन हैदरी लिखते हैं, “उमर खालिद एक शिक्षित और युवा नेता है। उसने खुलेआम कहा कि वह नास्तिक है। उसके भाषण में भी अहिंसा, एकता, प्रेम और भारतीय ध्वज का उल्लेख है। लेकिन ये सब बहुत तुच्छ लगते हैं। काफी सिर्फ़ यही है कि उसका मुस्लिम नाम है और वह मुस्लिम परिवार में पैदा हुआ।”

गौरतलब है कि दिल्ली दंगों के मामले में रविवार की रात उमर खालिद को गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने उसे 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर खालिद को दिल्ली पुलिस ने दंगों की साज़िश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया था। वह गैरक़ानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपित है। पुलिस ने कहा है कि बहुत जल्द इस मामले में चार्जशीट दाखिल की जाएगी। 

यहाँ बता दें कि लिबरल गैंग की प्रतिक्रिया खालिद गिरफ्तारी के बाद से ही सोशल मीडिया पर दिखने लगी थी। कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कह दिया था कि उसकी गिरफ्तारी सिर्फ इसलिए हुई है क्योंकि वह मुस्लिम है। लेकिन यह ध्यान रखने की बात है कि बार-बार खुद को नास्तिक कहने वाले उमर खालिद ने पिछले कुछ सालों में अपनी इस तरह की छवि खुद ही बनाई है। 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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