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‘हम जिंदा हैं तब भी हमें मार दिया, हमारा वोट चोरी कर लिया’: AI वीडियो से SIR पर प्रोपेगेंडा फैला रही थी कॉन्ग्रेस, चुनाव आयोग ने कहा- बिहार के लोगों को न करें गुमराह

कॉन्ग्रेस द्वारा साझा की गई इस वीडियो का मकसद स्पष्ट तौर पर बिहार की जनता को भ्रमित करने का है, क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो चालाकी से छोटे फॉन्ट में एआई जनरेटेड नहीं लिखते। चुनाव आयोग ने भी इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ये वीडियो सिर्फ एआई से बनाई गई है जिसमें कोई सच्चाई नहीं है।

चुनाव आयोग ने AI की मदद से तैयार की गई कॉन्ग्रेस की वीडियो की मंशा पर सवाल उठाया है। इस वीडियो में एक बुजुर्ग महिला समेत कुछ लोग ‘वोट चोरी’ की बातें करते हुए अपना गुस्सा दिखा रहे हैं।

कॉन्ग्रेस ने यह वीडियो अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर साझा किया था। वीडियो में दिखाया गया कि एक बुजर्ग महिला कह रही है- “हम जिंदा है तब भी हमें मार दिया। हमारा वोट चोरी कर लिया गया। हमारा अधिकार चोरी कर लिया।”

ऐसे ही एक बुज़ुर्ग व्यक्ति ने दावा किया कि उसके घर पर 80 फर्जी मतदाता पंजीकृत हैं। इसके अलावा, कई अन्य लोगों की आवाजों के जरिए भी मतदाता सूची में गड़बड़ी और वोटिंग प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगाया गया।

बता दें कि ये वीडियो राहुल गाँधी की बिहार सासाराम में यात्रा शुरू होने से पहले जारी की गई थी। कैप्शन में लिखा था- “17 अगस्त से हमारे साथ आना है, वोट चोरों को गद्दी से हटाना है।”

कॉन्ग्रेस द्वारा साझा की गई इस वीडियो का मकसद स्पष्ट तौर पर बिहार की जनता को भ्रमित करने का है, क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो चालाकी से छोटे फॉन्ट में एआई जनरेटेड नहीं लिखते। चुनाव आयोग ने भी इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ये वीडियो सिर्फ एआई से बनाई गई है जिसमें कोई सच्चाई नहीं है। ये सिर्फ और सिर्फ बिहार के लोगों को भ्रमित करने के लिहाज से बनाई गई है।

सोशल मीडिया पर भी लोग इसे देख बोल रहे हैं कि कॉन्ग्रेसियों को अब झूठ बोलने से बाज आ जाना चाहिए। कुछ बोल रहे हैं कि कॉन्ग्रेस को आरोप सिद्ध करने के लिए वास्तविक लोग नहीं मिल रहे इसलिए वो AI वीडियो को जनरेट कर रही है।

विपक्ष के आरोप और चुनाव आयोग

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस और विपक्षी दलों का गठबंधन इंडी ब्लॉक लंबे समय से चुनाव आयोग पर पक्षपात और केंद्र सरकार के साथ मिलकर चुनाव प्रक्रिया में हेराफेरी करने के आरोप लगाता रहा है। हाल ही में राहुल गाँधी ने भी एक विरोध मार्च के दौरान वोट चोरी का मुद्दा उठाया था, जिसे चुनाव आयोग ने तथ्यात्मक रूप से गलत बताया था।

चुनाव आयोग ने इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही है। आयोग ने इसके सबूत भी सार्वजनिक किए हैं। इनमें विभिन्न राजनीतिक दलों राजद, कॉन्ग्रेस और भाकपा के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठकों के रिकॉर्ड, मसौदा मतदाता सूची पर उनकी प्रतिक्रियाएँ और प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।

आयोग का कहना है कि मतदाता सूची के प्रकाशन से पहले और बाद में सभी स्तरों पर राजनीतिक दलों से परामर्श किया गया और किसी भी गड़बड़ी की शिकायत का निवारण किया गया। तथ्य-जाँच से यह साफ हो गया कि कॉन्ग्रेस  का साझा किया गया ‘वोट चोरी’ का वीडियो वास्तविक नहीं है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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