Homeराजनीतिपूजा की इजाजत नहीं, नमाज के लिए जगह भरपूर: केरल में CPIM के हिंदुओं...

पूजा की इजाजत नहीं, नमाज के लिए जगह भरपूर: केरल में CPIM के हिंदुओं और मुस्लिमों के लिए अलग-अलग नियम, कम्युनिस्टों का सनातन विरोधी चेहरा फिर आया सामने

आनंद नाम के यूजर ने इस वीडियो को साझा करते हुए दावा किया कि CPI(M) हिंदू और मुस्लिम अनुयायियों के साथ अलग-अलग व्यवहार करती है और धर्म के मुद्दे पर पाखंड दिखा रही है।

केरल की सत्ताधारी पार्टी सीपीआई(एम) का धर्म को लेकर जो रुख है, वो बार-बार सवालों के घेरे में आता है। ऐसा लगता है कि पार्टी हिंदुओं और मुस्लिमों के साथ एक जैसा व्यवहार नहीं करती। वह एक तरफ तो धर्मनिरपेक्षता की बात करती है, लेकिन जब बात हिंदू या इस्लाम की आती है, तो उसका रवैया अलग-अलग दिखता है।

हाल ही में केरल के पूर्व गृह मंत्री कोडियारी बालकृष्णन के बेटे और सीपीआई(एम) के सदस्य बिनीश कोडियारी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में एक टोपी पहने हुआ व्यक्ति, जिसने टोपी पहनी हुई थी, सीपीआई(एम) के पार्टी ऑफिस के अंदर नमाज़ अदा कर रहा था।

आनंद नाम के एक्स यूजर के मुताबिक, वीडियो में दिखने वाला शख्स कोल्लम का एक फेरीवाला है, जो चादर बेचकर अपनी आजीविका चलाता है। इस मुस्लिम शख्स ने बारिश की वजह से स्थानीय सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं से नमाज पढ़ने के लिए जगह माँगी थी। पार्टी ने तुरंत उसकी बात मान ली और उसे अपने ऑफिस में नमाज पढ़ने की इजाजत दे दी।

बिनीश ने अपने पोस्ट में सीपीआई(एम) की तारीफ की और कहा कि पार्टी ने उस शख्स को नमाज़ पढ़ने की जगह देकर उसकी धार्मिक भावनाओं का ख्याल रखा। उन्होंने इसे प्यार और भाईचारे का उदाहरण बताया और कहा कि यह केरल की ताकत है। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रहा, क्योंकि इससे पार्टी का एक खास रवैया सामने आया।

सीपीआई(एम) ने नमाज़ की घटना को बहुत सकारात्मक तरीके से पेश किया और इसे भाईचारे का प्रतीक बताया। लेकिन संयोग से हिंदुओं के मामले में ऐसी उदारता, सहनशीलता और समायोजन का रवैया अक्सर दिखाई नहीं देता। क्योंकि जब बात हिंदुओं की आती है, तो पार्टी का रवैया अक्सर अलग होता है। यह अंतर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनता है। कुछ उदाहरण हम आपके सामने रख रहे हैं।

CPIM ने रोक दिया था गणपति हवन

बता दें कि फरवरी 2024 में केरल के कोझिकोड जिले के नेदुमन्नूर एलपी स्कूल में आयोजित गणपति हवन पर CPIM ने आपत्ति जताई थी। जानकारी के अनुसार, CPIM से जुड़े लोगों को जब इस पूजा के बारे में पता चला तो उन्होंने वहाँ पहुँचकर अनुष्ठान रुकवा दिया और आयोजकों के साथ मारपीट भी की। इसके बाद पुलिस ने मामले को अपने हाथ में लिया और आयोजकों को गिरफ्तार कर लिया।

सीपीएम के गुंडों ने गणपति हवन रोका, आयोजकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया

घटना यहीं नहीं रुकी। सीपीआईएम कार्यकर्ताओं ने बाद में स्कूल तक विरोध मार्च भी निकाला। जबकि यह पूजा स्कूल प्रशासन की पूर्व अनुमति से हो रही थी और हर साल महानवमी के अवसर पर परंपरा के तौर पर आयोजित की जाती रही है।

इस बार, जब नियमित कार्यक्रम रद्द हो गया था, तब स्कूल ने गणपति हवन का आयोजन किया। लेकिन इसके बावजूद CPI M ने इस धार्मिक आयोजन को सहन नहीं किया और विरोध जताया।

CPIM ने मंदिर में प्रार्थना करने पर पार्टी नेता को फटकार लगाई

सितंबर 2017 में CPIM ने अपने ही मंत्री कडकम्पल्ली सुरेंद्रन को फटकार लगाई। वे त्रिशूर के प्राचीन श्री गुरुवायुर मंदिर गए थे और वहाँ परिवार के आग्रह पर पुष्पांजलि अर्पित की थी। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें वायरल हुईं, जिनमें वे पारंपरिक मुंडू और मेलमुंडू पहने हुए दिखे।

उनके माथे पर चंदनकुरी भी थी और उनके बच्चे भगवान कृष्ण की वेशभूषा में नजर आए। उस समय सुरेंद्रन केरल के देवस्वओम मंत्री के पद पर कार्यरत थे। इस घटना के बाद CPIM की आंतरिक समिति ने कहा कि उनका आचरण पार्टी के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।

मामले पर एक जाँच रिपोर्ट भी तैयार की गई। पार्टी ने साफ किया कि श्री गुरुवायुर मंदिर में पूजा-अर्चना करना माकपा के सिद्धांतों के खिलाफ है और सुरेंद्रन को पार्टी नेताओं की परंपरा का पालन करने की हिदायत दी गई।

ज्योतिषी से मुलाकात के लिए CPIM नेता जाँच के घेरे में

अगस्त 2024 में CPIM के राज्य सचिव एम वी गोविंदन विवाद में आ गए। उन पर आरोप लगा कि वे महावा पोडुवल नामक एक हिंदू ज्योतिषी से ज्योतिष पर चर्चा करने गए थे। इस वजह से उन्हें पार्टी की नाराज़गी झेलनी पड़ी।

बाद में ज्योतिषी महावा पोडुवल ने सफाई दी कि गोविंदन सिर्फ उनके परिवार से मिलने और चाय पीने आए थे। उन्होंने कहा कि मुलाकात के दौरान ज्योतिष पर कोई चर्चा नहीं हुई। पोडुवल ने स्पष्ट किया, “व्यक्तिगत संबंधों को ज्योतिष से जोड़ना गलत है।

अगर कोई कहे कि गोविंदन गुरु ने ज्योतिष जाँच करवाई, तो यह असहनीय है।” उन्होंने यह भी बताया कि CPIM नेता एम वी गोविंदन और केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन दोनों से उनके व्यक्तिगत रिश्ते हैं।

हर ‘हिंदू’ चीज पर आपत्ति

जुलाई 2022 में CPIM ने राष्ट्रीय प्रतीक के अनावरण कार्यक्रम के दौरान किए गए पूजन-विधि पर आपत्ति जताई थी। पार्टी का मानना था कि ऐसे सरकारी कार्यक्रम धर्मनिरपेक्ष होने चाहिए।

इसके अलावा, CPIM नेपाल की राजनीति में भी सक्रिय रही है और उसने वहाँ की दुनिया की एकमात्र हिंदू राजशाही को खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाई थी।

CPIM का हिंदू विरोधी प्रचार

फरवरी 2025 में ऑपइंडिया ने खुलासा किया कि CPIM ने अपने 64 पन्नों के राजनीतिक मसौदे में हिंदू-विरोधी एजेंडा साफ तौर पर सामने रखा। मसौदे में नेपाल के हिंदू राष्ट्र और वहाँ की राजशाही समर्थक ताकतों के खिलाफ बयानबाजी की गई और दावा किया गया कि हिंदुत्व समर्थक और आरएसएस इन ताकतों का समर्थन कर रहे हैं।

पार्टी ने अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन को हिंदुत्व अभियान की निरंतरता बताया और काशी-मथुरा विवादों पर भी आपत्ति जताई। उसने धार्मिक जुलूसों को अल्पसंख्यक इलाकों में हिंसा फैलाने का साधन करार दिया और हिंदू समुदाय को दोषी ठहराने की कोशिश की।

पार्टी ने ग्रूमिंग जिहाद विरोधी कानूनों और आदिवासियों के धर्मांतरण पर लगाम लगाने की कोशिशों का भी विरोध किया। नए संसद भवन के उद्घाटन को हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों से जोड़ने पर भी पार्टी ने आपत्ति जताई और सेंगोल रखने का मजाक उड़ाया।

CPIM ने हिंदू इतिहास को पौराणिक कथा कहकर खारिज करने की कोशिश की और मीडिया, फिल्म और ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर हिंदुओं की सकारात्मक छवि दिखाए जाने को भी नकारात्मक बताया। मसौदे में RSS पर इतिहास को सांप्रदायिक नजरिए से फिर से लिखने का आरोप लगाया गया।

सीपीआई(एम) के ड्राफ्ट रिज़ॉल्यूशन का पेज 54 पर लिखा था, “इस्लामी कट्टरवादी और उग्रवादी संगठन जैसे जमात-ए-इस्लामी और एसडीपीआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का राजनीतिक विंग) मुस्लिम जनता के बीच अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। वे अल्पसंख्यक समुदाय के बीच अलगाव और डर का फायदा उठाते हैं, जो हिंदुत्व ताकतों के लगातार हमलों का शिकार हैं… हालाँकि अल्पसंख्यक सांप्रदायिकता को सत्ता में मौजूद हिंदुत्व सांप्रदायिक ताकतों के बराबर नहीं माना जा सकता, यह समझना ज़रूरी है कि अल्पसंख्यक उग्रवादी गतिविधियाँ केवल बहुसंख्यक सांप्रदायिकता को और मजबूत करती हैं।”

सीपीआई(एम) की बातों को सरल तरीके से समझें, तो उसका कहना है कि इस्लामी कट्टरवादी संगठन अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं, क्योंकि हिंदुत्व की ताकतें मुस्लिम समुदाय को परेशान कर रही हैं। उसका ये भी कहना है कि मुस्लिम कट्टरता को हिंदुत्व जितना बड़ा खतरा नहीं माना जा सकता। उसका साफ मानना है कि मुस्लिम कट्टरता दरअसल हिंदुत्व की वजह से बढ़ रही है। यह उनकी सोच को दिखाता है कि हिंदुत्व हर समस्या की जड़ है।

यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखी गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

कॉकरोचों के प्रदर्शन में घुसी नेहा बोरा कौन है? जानिए AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष का चिट्ठा- उमर खालिद को बताती है बेचारा, ब्राह्मणों से...

आइए जानते हैं CJP के प्रदर्शन में घुसकर वामपंथी एजेंडे को हवा देने वाली नेहा बोरा कौन हैं और कैसे वो ब्राह्मणों के खिलाफ जहर उगलती आईं हैं।

गाजियाबाद के सीवर प्लांट में पोलियो वायरस मिलने से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, किसी बच्चे में संक्रमण नहीं: जानिए पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने कैसे बढ़ाई...

गाजियाबाद के सीवर में पोलियो वायरस मिला। यह वायरस पोलियो वैक्सीन के कमजोर अंश से विकसित होता है जो कमजोर टीकाकरण वाले इलाकों में फैलता है।
- विज्ञापन -