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केजरीवाल सरकार ने ​सिविल डिफेंस वालंटियर्स की भर्ती का निकाला विज्ञापन, सिक्किम को आजाद देश बताया

केजरीवाल सरकार ने समाचार पत्रों में सिविल डिफेंस वालंटियर्स की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया। विज्ञापन करीब 200 वालंटियर्स की भर्ती के लिए है। विज्ञापन में सिक्किम को एक अलग इकाई बताते हुए भूटान और नेपाल की तरह ही संप्रभु देशों की श्रेणी में रखा गया है।

अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चाओं में रहने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने फिर से एक विवाद को जन्म दे दिया है। शनिवार (23 मई, 2020) को अरविंद केजरीवाल की नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम को एक स्वतंत्र देश बता दिया। इसे लेकर विवाद पैदा होना स्वाभाविक है।

दिल्ली सरकार ने विभिन्न दैनिक समाचार पत्रों में सिविल डिफेंस वालंटियर्स की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया। दिल्ली सरकार का यह विज्ञापन करीब 200 वालंटियर्स की भर्ती के लिए है। बहरहाल, इस विज्ञापन में सिक्किम को एक अलग इकाई बताते हुए भूटान और नेपाल की तरह ही संप्रभु देशों की श्रेणी में रखा गया है।

नीचे दिए गए विज्ञापन में आवेदन के लिए पात्रता बताई गई है। पात्रता मानदंड में कहा गया है कि भारतीय नागरिक या सिक्किम, भूटान, नेपाल और दिल्ली के लोग आवेदन कर सकते हैं।

दिल्ली सरकार द्वारा जारी विज्ञापन

सिक्किम 1975 में भारत का अभिन्न हिस्सा बना था। पूरी तरह से भारत में विलय होने के बाद यह देश का 22 वाँ राज्य बना। यह देश का दूसरा सबसे कम आबादी वाला राज्य है और पूर्वोत्तर में स्थित है।

जानें किस तरह हुआ भारत में सिक्किम का हुआ विलय

भारत ने 1947 में स्वाधीनता हासिल की। इसके बाद पूरे देश में सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में अलग-अलग रियासतों का भारत में विलय किया गया। इसी क्रम में 6 अप्रैल, 1975 की सुबह सिक्किम के चोग्याल राजा को अपने राजमहल के गेट के बाहर भारतीय सैनिकों के ट्रकों की आवाज़ सुनाई दी।

भारतीय सेना ने राजमहल को चारों तरफ़ से घेर रखा था। सेना ने राजमहल पर मौजूद 243 गार्डों पर तुरंत काबू पा लिया। इसके बाद चोग्याल को उनके महल में ही नज़रबंद कर दिया गया। फिर सिक्किम में जनमत संग्रह कराया गया। जनमत संग्रह में 97.5 फीसदी लोगों ने भारत के साथ जाने की वकालत की। इसके बाद सिक्किम को भारत का 22वाँ राज्य बनाने का संविधान संशोधन विधेयक 23 अप्रैल, 1975 को लोकसभा में पेश किया गया।

उसी दिन इसे 299-11 के मत से इसे पास कर दिया गया। राज्यसभा में यह बिल 26 अप्रैल को पास हुआ और 15 मई, 1975 को जैसे ही राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ने इस बिल पर हस्ताक्षर किए, चोग्याल राजवंश का शासन समाप्त हो गया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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