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केजरीवाल सरकार ने किसान आंदोलन के समय दर्ज हुए 17 मामले वापस लेने को दी मंजूरी, इसमें एक मामला लाल किला हिंसा का भी

इन मामलों में सैकड़ाें की संख्या में प्रदर्शनकारियों और 25 ट्रैक्टरों के जरिए लाल किला पहुँचने का मामला भी है। जिसके चलते टिकट काउंटरों और सुरक्षा जाँच उपकरणों को नुकसान हुआ था।

केजरीवाल सरकार ने 2020-21 में हुए किसान आंदोलन के दौरान दिल्लीपुलिस की ओर से दर्ज किए गए 17 मामलों को वापस लेने की मंजूरी दे दी है। बता दें कि इन मामलों में गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा से जुड़ा हुआ एक मामला भी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने नवंबर 2020 से दिसंबर 2021 के दौरान दर्ज किए गए 54 मामलों में से 17 को वापस लेने का फैसला किया था। इन मामलों में सैकड़ाें की संख्या में प्रदर्शनकारियों और 25 ट्रैक्टरों के जरिए लाल किला पहुँचने का मामला भी है। जिसके चलते टिकट काउंटरों और सुरक्षा जाँच उपकरणों को नुकसान हुआ था।

जानकारी के अनुसार, अधिकारी ने बताया कि उपराज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय द्वारा गृह मंत्री सत्येंद्र जैन को 31 जनवरी को भेजी गई मामलों से संबंधित फाइल को सोमवार को कानून विभाग की राय लेने के बाद मंजूरी दे दी गई।

रिपोर्ट के अनुसार, 150-175 ट्रैक्टरों पर सवार होकर उत्तर प्रदेश के लोनी से दिल्ली में प्रवेश करने वाले किसानों के खिलाफ भी उत्तर-पूर्वी दिल्ली के ज्योति नगर पुलिस थाने में एक मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि उन किसानों ने पुलिसकर्मियों के कर्तव्यों में बाधा डाली और उन पर हमला किया था। यह मामला भी दिल्ली सरकार द्वारा वापस लिया गया है।

इसके अलावा अधिकतर मामले दिल्ली के सिंघू, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ एक साल तक चले किसान आंदोलन के दौरान कोविड-19 नियमों और दिशा-निर्देशों के उल्लंघन से संबंधित हैं।

गौरतलब है कि आंदोलनकारी किसानों ने संसद द्वारा पारित कृषि कानूनों को वापस लेने की माँग करते हुए नवंबर 2020 में दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाल दिया था। वहीं मोदी सरकार द्वारा कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के बाद किसानों ने दिसंबर 2021 में आंदोलन खत्म कर दिया था। तब सरकार ने नवंबर 2020 से दिसंबर 2021 के बीच प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की संयुक्त किसान मोर्चा की माँग पर भी सहमति जताई थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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