Saturday, March 6, 2021
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गुपकार गठबंधन के लीडर बने फारूक अब्दुल्ला: 370 की बहाली के लिए महबूबा, सज्जाद के साथ मिलकर खाई कसम

फारूक अब्दुल्ला ने एलायंस के उद्देश्य को उजागर करते हुए कहा, “हम भाजपा के विरोधी हैं और इसका मतलब ये नहीं है कि राष्ट्र विरोधी हैं। यह राष्ट्र विरोधी जमात नहीं है।”

जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, पूर्व अलगाववादी और राजनेता सज्जाद लोन और कुछ अन्य लोगों ने एकजुट होकर ‘पीपल्स एलायंस फ़ॉर गुपकार डिक्लेरेशन’ का गठन किया है। गुपकार गठबंधन का उद्देश्य कथित तौर पर अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली के साथ ही जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिलाने का है।

‘पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन’ ने डॉ फारूक अब्दुल्ला को अपना अध्यक्ष और महबूबा मुफ्ती को 6 पार्टी समूह का उपाध्यक्ष घोषित किया है। यह निर्णय पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के गुपकार रोड पर स्थित निवास पर आयोजित अलायंस में शामिल घाटी के शीर्ष नेताओं की दो घंटे तक चली बैठक में लिया गया।

वहीं, सज्जाद लोन को गठबंधन का प्रवक्ता बनाया गया है। उन्होंने अलायंस के प्रवक्ता की जिम्मेदारी सँभालते हुए अधिकारिक तौर पर पत्रकारों के समक्ष अलायंस के नवनियुक्त पदाधिकारियों के नामों की घोषणा की। गठबंधन ने जम्मू-कश्मीर राज्य के पुराने झंडे को अपना प्रतीक माना है।

6 दलों के समूह से बना ‘गुपकार गठबंधन’ 

6 दलों – राष्ट्रीय सम्मेलन (नेकां), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), पीपुल्स सम्मेलन (पीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी (सीपीआई-एम), पीपुल्स मूवमेंट (पीएम) और अवध नेशनल कॉन्फ्रेंस (एएनसी) – इस महीने की शुरुआत में एक साथ आए थे ताकि गठबंधन का गठन किया जा सके और राज्य की विशेष स्थिति की बहाली के लिए शांति से काम किया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र के लोगों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ने की कसम खाई।

नया प्रभार सँभालने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने एलायंस के उद्देश्य को उजागर करते हुए कहा, “हम भाजपा के विरोधी हैं और इसका मतलब ये नहीं है कि राष्ट्र विरोधी हैं। यह राष्ट्र विरोधी जमात नहीं है। हमारा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों का अधिकार बहाल हो।”

बता दें कि महबूबा मुफ्ती के 13 अक्टूबर को नजरबंदी से रिहाई के बाद इसी माह 15 को फारूक के घर पर 6 दलों की पहली बैठक हुई थी। जिसमें महबूबा मुफ्ती ने भी भाग लिया गया था। उस दिन फारूक की तरफ से कहा गया था कि कुछ दिनों में बैठक करके आगे की रणनीति बनाई जाएगी।

उन्होंने कहा था, “जम्मू कश्मीर और लद्दाख से जो कुछ छीन लिया गया है, उसकी बहाली के लिए हम संघर्ष करेंगे। हमारी एक संवैधानिक लड़ाई है, हम चाहते हैं कि भारत सरकार 5 अगस्त, 2019 से पहले के राज्य के लोगों के अधिकारों को वापस करे।” उसके बाद शनिवार को बैठक हुई।

महबूबा मुफ्ती ने J&K के अलावा दूसरा झंडा उठाने से किया इनकार 

महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार (अक्टूबर 23, 2020) को श्रीनगर में अपने आवास पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि जब तक उनका झंडा (जम्मू कश्मीर का पुराना झंडा) वापस नहीं मिल जाता, तब तक वह दूसरा झंडा (तिरंगा) नहीं उठाएँगी। मुफ्ती ने कहा कि उनका झंडा डाकुओं ने ले लिया है।

14 महीने तक हिरासत में रहने के बाद हाल ही में रिहा हुई महबूबा मुफ्ती ने कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा था, “जब तक केंद्र सरकार हमारे हक (अनुच्छेद 370) को वापस नहीं करते हैं, तब तक मुझे कोई भी चुनाव लड़ने में दिलचस्पी नहीं है।” उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को बहाल करने तक उनका संघर्ष खत्म नहीं होगा। वह कश्मीर को पुराना दर्जा दिलवाने के लिए जमीन आसमान एक कर देंगी।

‘कश्मीरी चाहते हैं कि भारत पर चीन शासन करे’

वहीं ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस’ के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि चीन ने कभी भी अनुच्छेद 370 को लेकर भारत सरकार के फैसले को स्वीकार नहीं किया है। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि चीन की मदद से फिर से अनुच्छेद 370 को वापस लाया जा सकेगा।

उन्होंने वामपंथी साइट ‘द वायर’ को दिए इंटरव्यू में कहा था, “पिछले साल 5 अगस्त को उन्होंने (मोदी सरकार ने) जो किया, वह भारत के ताबूत में आखिरी कील था। आज जब चीन हमारी तरफ बढ़ रहा है, कश्मीरी लोग चाहते हैं कि वो भारत में घुस जाएँ जबकि उन्हें पता है कि चीन ने मुस्लिमों के साथ क्या किया है, फिर भी वो चीन में जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हम मुस्लिम बहुमत वाले राज्य थे, फिर भी हम पाकिस्तान नहीं गए। हम गाँधी के भारत में रहे, हमें मोदी का भारत नहीं चाहिए।” अब्दुल्ला ने कहा कि धारा 144 हटने के बाद लाखों कश्मीरी मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ भविष्य में सड़कों पर उतरेंगे।

गौरतलब है कि भाजपा सरकार जम्मू-कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 को रद्द करने के फैसले के बाद से ही विरोधी दल इस कदम के खिलाफ लगातार द्वेषपूर्ण अभियान चला रहे हैं। बता दें कि अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देता था, जो कि अब केंद्र शासित प्रदेश बन गया है। 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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