Tuesday, April 16, 2024
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नाटक कर रहे हैं राहुल गाँधी, मजदूरों की दुर्दशा के लिए कॉन्ग्रेस जिम्मेदार: मायावती

"वैसे ही वर्तमान में कॉन्ग्रेसी नेता द्वारा लॉकडाउन त्रासदी के शिकार कुछ श्रमिकों के दुःख-दर्द बाँटने सम्बंधी जो वीडियो दिखाया जा रहा है। वह हमदर्दी वाला कम व नाटक ज्यादा लगता है। कॉन्ग्रेस अगर यह बताती कि उसने उनसे मिलते समय कितने लोगों की वास्तविक मदद की है तो यह बेहतर होता।"

यूपी सरकार से बसों का किराया माँगने पर राजस्थान सरकार को निशाने पर लेने वाली बसपा प्रमुख मायावती ने राहुल गाँधी की एक वीडियो पर एक बार फिर कॉन्ग्रेस को अपने निशाने पर लिया है। इतना ही नहीं राहुल गाँधी के वीडियो को नाटक करार देते हुए मायावती ने प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा के लिए कॉन्ग्रेस को ही कसूरवार ठहराया है।

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कॉन्ग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए ट्वीट किया और लिखा, “आज पूरे देश में कोरोना लॉकडाउन के कारण करोड़ों प्रवासी मजदूरों की जो दुर्दशा दिख रही है। उसकी असली कसूरवार कॉन्ग्रेस है, क्योंकि आजादी के बाद इनके लम्बे शासनकाल के दौरान अगर रोजी-रोटी की सही व्यवस्था गाँव/शहरों में की होती तो इन्हें दूसरे राज्यों में क्यों पलायन करना पड़ता?”

मायावती ने एक दूसरे ट्वीट में राहुल गाँधी को अपने निशाने पर लिया और लिखा, “वैसे ही वर्तमान में कॉन्ग्रेसी नेता द्वारा लॉकडाउन त्रासदी के शिकार कुछ मजदूरों के दुःख-दर्द बाँटने सम्बंधी जो वीडियो दिखाया जा रहा है। वह हमदर्दी वाला कम व नाटक ज्यादा लगता है। कॉन्ग्रेस अगर यह बताती कि उसने उनसे मिलते समय कितने लोगों की वास्तविक मदद की है तो यह बेहतर होता।”

वहीं राहुल गाँधी की मजदूरों के साथ डॉक्यूमेंट्री पर बीजेपी ने भी पलटवार किया है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि राहुल गाँधी सॉल्यूशन नहीं पॉल्यूशन कर रहे हैं।

दरअसल राहुल गाँधी ने हाल ही में प्रवासी मजदूरों से दिल्ली के सुखदेव विहार में मुलाकात की थी। इस दौरान राहुल ने मजदूरों से उनका हाल-चाल लिया था। इसके बाद मुलाकात की एक वीडियो को राहुल गाँधी ने शनिवार(23 मई, 2020) को सोशल मीडिया पर शेयर किया।

आपको बता दें कि इससे पहले बीते शुक्रवार(22 मई, 2020) को बसपा सुप्रीमो मायावती ने कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान सरकार को अपने निशाने पर लिया था और ट्वीट करते हुए लिखा था, “राजस्थान की कॉन्ग्रेसी सरकार द्वारा कोटा से करीब 12000 युवा-युवतियों को वापस उनके घर भेजने पर हुए खर्च के रूप में यूपी सरकार से 36.36 लाख रुपए और देने की जो माँग की है, वह उसकी कंगाली व अमानवीयता को प्रदर्शित करता है। दो पड़ोसी राज्यों के बीच ऐसी घिनौनी राजनीति अति-दुखद है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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