Homeराजनीतिनागालैंड में स्वशासन को लेकर ऐतिहासिक समझौता, 6 जिलों में बनेगी फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल...

नागालैंड में स्वशासन को लेकर ऐतिहासिक समझौता, 6 जिलों में बनेगी फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी: जानें- कैसे आएगी शांति, तेजी से होगा विकास

फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी बनाने के लिए MoA पर समझौता हुआ। यह कदम क्षेत्र में शांति, विकास, प्रशासनिक सुधार और स्थानीय लोगों के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक है।

केंद्र सरकार, नागालैंड सरकार और ईस्टर्न नागालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ENPO) के बीच गुरुवार (5 फरवरी 2026) को नई दिल्ली में एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता (MoA) हुआ। ENPO राज्य के पूर्वी छह जिलों की आठ प्रमुख नागा जनजातियों का प्रतिनिधित्व करता है।

यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शांतिपूर्ण और समृद्ध पूर्वोत्तर के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस करार पर नागालैंड के मुख्यमंत्री डॉ नेफ्यू रियो और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए।

समझौते के तहत फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (FNTA) की स्थापना का रास्ता साफ हुआ है, जो तुएनसांग, मोन, किफिरे, लॉन्गलेंग, नोकलाक और शामाटोर जिलों को कवर करेगी। इसके माध्यम से 46 विषयों से जुड़े प्रशासनिक अधिकारों का हस्तांतरण किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय विकास और स्वशासन को मजबूती मिलेगी।

फोटो साभार via idsa.in

नई दिल्ली में हुए इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्रालय और नागालैंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, नागालैंड के उपमुख्यमंत्री यंथुंगो पैटन, उनके कैबिनेट सहयोगी और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस करार को एक ऐतिहासिक समझौता बताते हुए कहा कि इससे पूर्वी नागालैंड के विकास को नई गति मिलेगी और वहाँ के लोगों को नए अवसर और समृद्धि प्राप्त होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता उत्तर-पूर्व में शांति, प्रगति और पूर्ण विकास के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

नागालैंड के मुख्यमंत्री ने भी अपनी सरकार, केंद्र और ENPO के बीच हुए ज़रूरी समझौते की खबर शेयर की।

एक सामंजस्यपूर्ण उत्तर पूर्व की ओर एक बड़ा कदम

नई दिल्ली में हुए इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्रालय और नागालैंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, नागालैंड के उपमुख्यमंत्री यंथुंगो पैटन, उनके कैबिनेट सहयोगी और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस करार को एक ऐतिहासिक समझौता बताते हुए कहा कि इससे पूर्वी नागालैंड के विकास को नई गति मिलेगी और वहाँ के लोगों को नए अवसर और समृद्धि प्राप्त होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता उत्तर-पूर्व में शांति, प्रगति और पूर्ण विकास के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

फोटो साभार – Freepik

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि उन्होंने 2021–2022 में ENPO प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर-पूर्व में शांति के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और उनकी चिंताओं का समाधान किया जाएगा। उन्होंने ENPO से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भरोसा बनाए रखने और यह विश्वास रखने का आग्रह किया कि उन्हें न्याय और सम्मान अवश्य मिलेगा।

अमित शाह ने विवाद के समाधान पर प्रसन्नता जताई और कहा कि गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने लंबे समय तक ENPO और नागालैंड सरकार के बीच सेतु की भूमिका निभाई, जिससे बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद मिली।

उन्होंने ENPO क्षेत्र के रणनीतिक महत्व पर भी जोर दिया और नागालैंड सरकार, मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो, उनके मंत्रिमंडल, राज्य के नागरिकों और नागालैंड के दोनों सांसदों को सफल वार्ता के लिए बधाई दी। शाह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर पूर्वी नागालैंड के विकास को तेजी से आगे बढ़ाएँगी।

वहीं, मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने इस समझौते को नागा समाज की जीत करार देते हुए कहा, “आज का यह समझौता नागा समाज की जीत है। मुझे उम्मीद है कि सभी वर्गों के बीच आपसी विश्वास और मजबूत होगा। मैं भारत सरकार का धन्यवाद करता हूँ कि उसने इस मुद्दे को निर्णायक निष्कर्ष तक पहुँचाया, और आशा करता हूँ कि भविष्य में भी हमें केंद्र सरकार का सहयोग मिलता रहेगा।”

फोटो साभार -मोकोकचुंग टाइम्स

समझौते के अनुसार, फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (FNTA) के तहत एक मिनी-सचिवालय स्थापित किया जाएगा, जिसका नेतृत्व अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रधान सचिव करेंगे। इसके तहत विकास से जुड़ा खर्च क्षेत्रफल और जनसंख्या के अनुपात में साझा किया जाएगा। हालाँकि, यह पूरी व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुच्छेद 371(A) के प्रावधानों के पूरी तरह अनुरूप रहेगी।

यह विशेष प्रशासनिक ढाँचा पूर्वी नागालैंड के विकास को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य बेहतर निर्णय-प्रक्रिया, वित्तीय स्वायत्तता, बुनियादी ढाँचे के तेज विकास, आर्थिक सशक्तिकरण और संसाधनों के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करना है।

गृह सचिव गोविंद मोहन के अनुसार, यह समझौता (MoA) वर्षों से चली आ रही लंबी वार्ता को समाप्त करने में मदद करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि संस्थागत शासन और विकास तंत्र पूर्वी नागालैंड के लोगों की अपेक्षाओं पर खरे उतरें।

अलगाव से समावेश तक: मोदी प्रशासन ने लंबे समय से चले आ रहे विवाद को कैसे सुलझाया

स्वतंत्रता के बाद से ही पूर्वी नागा जनजातियों को अलग प्रशासनिक पहचान देने की माँग लगातार उठती रही है। तुएनसांग मोन पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन, जिसे बाद में 2005 में ईस्टर्न नागा पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ENPO) नाम दिया गया, की शुरुआत 1994 में पूर्वी नागा जनजातियों के पिछड़ेपन और उपेक्षा के खिलाफ एक औपचारिक आंदोलन के रूप में हुई थी।

2010 में ENPO ने फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (FNTA) के गठन का प्रस्ताव रखा, जिसमें किफिरे, लॉन्गलेंग, मोन, नोकलाक, शामाटोर और तुएनसांग जैसे छह पूर्वी जिले शामिल हों। संगठन ने विकास और शासन में असमानता दूर करने के लिए एक अलग राजनीतिक व्यवस्था की माँग की, साथ ही वित्तीय, विधायी और कार्यकारी स्वायत्तता पर जोर दिया। उन्होंने सरकार में पूर्वी नागा जनजातियों के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व को लेकर भी आपत्ति जताई।

इस मुद्दे को लेकर चुनाव बहिष्कार, हड़तालें, कई दौर की बैठकें, आश्वासन और टकराव होते रहे। कई बार समाधान की दिशा में प्रगति हुई, लेकिन बार-बार अड़चनें भी आईं। इसके बावजूद, मोदी सरकार ने लगातार संवाद जारी रखा और ENPO की माँगों को गंभीरता से सुना, जिससे आखिरकार इस ऐतिहासिक समझौते का रास्ता साफ हुआ।

फोटो साभार – दृष्टि आईएएस

गृह मंत्रालय और ENPO के बीच 2022 में औपचारिक बातचीत की शुरुआत एक उच्चस्तरीय समिति द्वारा की गई थी, ताकि सहमति पर पहुँचने का प्रयास किया जा सके। हालाँकि, ENPO की अलग राज्य बनाने की लगातार माँग के कारण प्रारंभिक वार्ता किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पाई। आखिरकार संगठन केंद्र के प्रस्ताव पर सहमत हुआ, जिसके तहत FNTA ढाँचे के तहत अधिक स्वायत्तता वाला क्षेत्रीय प्राधिकरण बनाया जाएगा।

दिसंबर 2024 में आयोजित उद्घाटन बैठक में ENPO ने अस्थायी रूप से मोदी सरकार के FNTA निर्माण योजना को अनुच्छेद 371(A) के तहत स्वीकार किया, जिससे पूर्वी नागाओं को कार्यकारी, विधायी और बजटीय अधिकार सौंपे गए। इसके बाद कई बैठकें हुईं और संगठन ने अपनी माँगों को घटा दिया।

अंततः स्वतंत्र राज्य बनाने की इच्छा को पिछले साल की अंतिम वार्ता में स्थगित किया गया और नागालैंड राज्य के भीतर विशेष स्वायत्त प्रशासनिक इकाई FNTA बनाने का प्रस्ताव मंजूर किया गया। यह दस साल बाद पुनः समीक्षा के लिए निर्धारित है और विवादित मुद्दों को लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रक्रियाओं के माध्यम से सुलझाया जाएगा।

निष्कर्ष

उत्तर-पूर्व भारत भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस के शासन में गंभीर उपेक्षा का शिकार रहा है। इसके विपरीत, मोदी सरकार ने पूरे क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ने और इसके सबसे दूरदराज इलाकों में विकास को बढ़ावा देने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं, जिससे क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आए हैं।

इसके अलावा, विरोधी दलों द्वारा उठाए गए मुद्दों के समाधान के लिए कई बार सौहार्दपूर्ण प्रयास किए गए, जिससे लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा, राजनीतिक उथल-पुथल, हिंसा और अशांति कम हुई और क्षेत्र में स्थिरता और बेहतर भविष्य की राह बनी।

सरकार के अटल प्रयासों के कारण ENPO की अलग राज्य की माँग में भारी कमी आई, और उसने अनुच्छेद 371(A) के तहत सीमित स्वायत्तता वाली विशेष प्रशासनिक संरचना (FNTA) को स्वीकार किया। अब, इस क्षेत्र का एक बेहद विवादित इतिहास समाप्त हो गया है और नए सशक्त और आशापूर्ण युग की शुरुआत हुई है, जिसमें लंबे संघर्ष की जगह शांति और विकास ने ले ली है।

(मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Rukma Rathore
Rukma Rathore
Accidental journalist who is still trying to learn the tricks of the trade.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

प्रोपेगेंडा के खेल में The News Minutes ने छिपाए फैक्ट्स, एजेंडा था- ONGC के CSR फंड से ₹670 करोड़ का दान ‘RSS से जुड़े...

'द न्यूज मिनट' की रिपोर्ट में दिए गए तथ्य ओएनजीसी की अपनी वार्षिक रिपोर्ट से लिए गए हैं, लेकिन इसे इस तरह से पेश किया गया है कि यह अधूरा और भ्रामक है।

चंदन गुप्ता याद हैं? जिन्हें ‘भारत माता की जय’ बोलने पर मुस्लिमों की भीड़ ने उतारा मौत के घाट: समझें वंदे मातरम बिल की...

चंदन गुप्ता हत्याकांड को समझने के लिए जरूरी माना जाता है कि वंदे मातरम् बिल में संशोधन की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है।
- विज्ञापन -