Tuesday, May 21, 2024
Homeराजनीतिसरकारी आवास कब्जाए बैठे 50 पूर्व सांसदों को दिल्ली पुलिस की मदद से निकाल...

सरकारी आवास कब्जाए बैठे 50 पूर्व सांसदों को दिल्ली पुलिस की मदद से निकाल बाहर करने की प्रक्रिया शुरू

इससे पहले अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि जो भी पूर्व सांसद सरकारी आवास खाली करने में आनाकानी कर रहे हैं, उनके घर में बिजली और पानी की सप्लाई काट दी जाए।

केंद्र सरकार ने उन सभी पूर्व सांसदों को सरकारी आवासों से निकाल बाहर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो नियमों को ताक पर रख कर डेरा जमाए हुए थे। ये सभी पूर्व सांसद सरकार द्वारा दिए गए समय की अवधि होने के बावजूद सरकारी आवासों में टिके हुए थे। अब सरकार ने दिल्ली पुलिस की मदद से उन्हें निकाल बाहर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन पूर्व सांसदों ने आवास खाली न करने के पीछे कई बहाने बनाए थे।

कुछ पूर्व सांसदों ने कहा था कि उनके बच्चे दिल्ली में पढ़ रहे हैं, इसीलिए वे सरकारी आवास खाली नहीं कर सकते। कुछ सांसदों ने अपने किसी परिवारजन के स्थानीय अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती होने का बहाना बनाया था। कुछ अन्य पूर्व सांसदों ने तो अजोबोग़रीब तर्क देते हुए कहा था कि वे दिल्ली में कहीं और आवास नहीं ढूँढ पा रहे हैं, इसीलिए वे सरकार आवास खाली नहीं कर सकते। शहरी मामलों के मंत्रालय ने अंत में दिल्ली पुलिस की मदद ली है और कुछ पूर्व सांसदों द्वारा कब्जाए गए सरकारी आवास खाली करा भी लिया गया है।

शुक्रवार (अक्टूबर 4, 2019) तक की बात करें तो कुल 50 पूर्व सांसद ऐसे थे, जिन्होंने अपने सरकारी बंगले खाली नहीं किए थे। इन लोगों को कई बार लीगल नोटिस दिया जा चुका था। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के सूत्रों के अनुसार, इस लिस्ट में जन अधिकार पार्टी के संस्थापक पप्पू यादव, उनकी पत्नी और कॉन्ग्रेस नेता रंजीता रंजन, दीपेंद्र सिंह हुड्डा, मेघालय के मुख्यमंत्री कोर्नाड संगमा और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम शामिल है।

अभी इस बात पर स्थिति साफ़ नहीं है कि पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और पूर्व भाजपा अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी अपने सरकारी आवासों में बने रह सकते हैं या नहीं। 91 वर्षीय आडवाणी और 85 वर्षीय जोशी के सुरक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार इस सम्बन्ध में निर्णय लेगी। अधिकारियों ने कहा है कि पूर्व सांसद जिस तरह से सरकारी आवासों में डेरा जमा कर बैठे हैं, उससे नए सांसदों को आवास उपलब्ध कराने में काफ़ी दिक्कतें आ रही हैं।

20 अगस्त को ख़बर आई थी कि जो भी पूर्व सांसद सरकारी आवास खाली करने में आनाकानी कर रहे हैं, उनके घर में बिजली और पानी की सप्लाई काट दी जाएगी। ऐसा करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दे दिया गया था। उस समय 200 ऐसे पूर्व सांसद थे जो सरकारी आवासों में जमे हुए थे। नियमानुसार, दोबारा चुन कर न आए सांसदों को लोकसभा भंग होने के एक महीने के भीतर अपना सरकारी आवास खाली करना होता है। राष्ट्रपति कोविंद ने 25 मई को ही पिछली लोकसभा भंग कर दी थी। इस हिसाब से देखें तो अब तक लगभग साढ़े 4 महीने हो चुके हैं।

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

J&K के बारामुला में टूट गया पिछले 40 साल का रिकॉर्ड, पश्चिम बंगाल में सर्वाधिक 73% मतदान: 5वें चरण में भी महाराष्ट्र में फीका-फीका...

पश्चिम बंगाल 73% पोलिंग के साथ सबसे आगे है, वहीं इसके बाद 67.15% के साथ लद्दाख का स्थान रहा। झारखंड में 63%, ओडिशा में 60.72%, उत्तर प्रदेश में 57.79% और जम्मू कश्मीर में 54.67% मतदाताओं ने वोट डाले।

भारत पर हमले के लिए 44 ड्रोन, मुंबई के बगल में ISIS का अड्डा: गाँव को अल-शाम घोषित चला रहे थे शरिया, जिहाद की...

साकिब नाचन जिन भी युवाओं को अपनी टीम में भर्ती करता था उनको जिहाद की कसम दिलाई जाती थी। इस पूरी आतंकी टीम को विदेशी आकाओं से निर्देश मिला करते थे।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -