‘हमारी लड़ाई बंग्लादेशी मुस्लिमों से है, ना कि भारतीय मुसलमानों से’

'बांग्लादेशी मुसलमान घुसपैठिए हमारे देश में आकर राजनीतिक समस्या को जन्म देते हैं क्योंकि वो यहाँ के समाज को अपना नहीं मानते हैं।'

केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 पारित होने के साथ ही इसका विरोध भी देखने को मिला। इस मुद्दे पर इंडियन एक्सप्रेस ने हेमंत बिस्वा शर्मा से बातचीत की। बता दें कि हेमंत बिस्वा शर्मा 23 साल तक कॉन्ग्रेस के साथ काम करने के बाद बीजेपी में शामिल हो गए थे। हेमंत ने दावा किया है कि आशंकाओं के बावजूद, पूर्वोत्तर के लोग मोदी सरकार के विकास कार्यों के लिए भाजपा को वोट देंगे।

इस दौरान जब हेमंत बिस्वा शर्मा से पूछा गया कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2016 के विरोध के बावजूद, भाजपा ने पूर्वोत्तर के लगभग सभी राज्यों में प्रमुख गठबंधन किए हैं। ये करने में वे कैसे सफल रहे? तो उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि जब पार्टी ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक को पारित करने की कोशिश की, तो कुछ लोगों ने इसका समर्थन किया और कुछ लोगों ने आरक्षण को मुद्दा बनाया। लेकिन उन्होंने परिणाम की चिंता किए बिना इस विधेयक को पारित करवाया, क्योंकि उनका मानना है कि किसी एक मुद्दे पर चुनाव नहीं लड़ा जा सकता है। और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वहाँ पर जो विकास कार्य हुआ है, उसके बाद कोई भी भाजपा के खिलाफ नहीं है। सभी को ऐसा लगता है कि उन्होंने सही किया है।

उनसे पाकिस्तान के बालाकोट पर भारतीय वायुसेना की तरफ से किए गए एयर स्ट्राइक पर पूछा गया कि क्या राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा चुनाव के सभी मुद्दों पर भारी पड़ेगा। क्या इससे भाजपा को कोई फायदा मिल सकता है? इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि सिर्फ इसी मुद्दे पर लोग वोट करेंगे। लोग सरकार के पूरे कामकाज के आधार पर वोट देंगे। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि अभी अगर सिर्फ पिछले 6 महीने की ही बात की जाए, तो आयुष्मान भारत, आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10% आरक्षण आदि कई ऐसे मुद्दे हैं, जो पीएम मोदी के पक्ष में है। सरकार जहाँ राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सक्रिय है, वहीं स्वास्थ्य और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को लेकर गंभीर भी। ऐसे में मतदाता पीएम मोदी को पूरे कामकाज के लिए वोट देंगे।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

असम में हुए आंदोलन को लेकर जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने इसके धार्मिक और सामाजिक दोनों पहलूओं को जवाब के तौर पर रखा। हेमंत बिस्वा शर्मा ने बताया कि असम आंदोलन में उन मुस्लिम प्रवासियों का हवाला दिया गया था, जिनकी वजह से असम के लोग अपनी पहचान खो रहे हैं। उनका कहना है कि हमारी पहचान से जुड़ा संकट बांग्लादेशी मुसलमानों से है, ना कि भारतीय मुसलमानों से। भारतीय मुसलमान हों या हिंदू या सिख-बौद्ध-जैन… इनसे आपको समस्याएँ इसलिए नहीं होती क्योंकि ये सभी लोग राजनीतिक रूप से भारतीय होते हैं और आपके सामाजिक ताने-बाने को तोड़ते नहीं हैं। जबकि बांग्लादेशी मुसलमान घुसपैठिए हमारे देश में आकर राजनीतिक समस्या को जन्म देते हैं क्योंकि वो यहाँ के समाज को अपना नहीं मानते हैं।

हेमंत बिस्वा शर्मा ने यह भी बताया कि पहले पूरे भारत में लोग इस बारे में खुलकर नहीं बोलना चाहते थे। क्योंकि उन्हें लगता था कि अगर वो कुछ बोलेंगे तो उनको धर्मनिरपेक्ष नहीं समझा जाएगा। मगर पिछले 10 वर्षों में, और खासकर भाजपा के सत्ता में आने के बाद, लोगों ने थोड़ा और खुलकर बोलना शुरू कर दिया है। लोग खुलकर बोलने लगे हैं कि हमारी पहचान से जुड़ा संकट बांग्लादेशी मुसलमानों से है, ना कि भारतीय मुसलमानों से।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

यू-ट्यूब से

बड़ी ख़बर

इनकी सावरकर से दुश्मनी केवल इसलिए है क्योंकि वह हिंदूवादी थे, और कॉन्ग्रेस की राजनीति मुस्लिम तुष्टिकरण की है। हिन्दूफ़ोबिया इनकी वैचारिक नसों में है, तो इसलिए हिन्दू हितों की बात करने वाले को खलनायक या कमज़ोर दिखाना तो हिन्दूफ़ोबिया की तार्किक परिणति होगा ही।

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

पति ने TIK-TOK चलाने से किया मना, पत्नी ने की आत्महत्या, रिकॉर्ड किया मौत का वीडियो

24 वर्षीय अनीता की शादी 29 साल के पलानीवेल के साथ हुई थी। उनके चार साल की एक बेटी और दो साल का एक बेटा भी है।
दीदी, सुरक्षा दो या इस्तीफा

सईद की मौत पर 200 दंगाईयों को बुलाकर डॉक्टरों पर हमला करने वालों को ममता क्यों बचा रही है?

पथराव शुरू हुआ, डॉक्टरों पर जानलेवा हमले हुए तो पुलिस ने क्यों नहीं रोका? क्यों डॉक्टरों की जान बचाने के लिए दंगाईयों पर नियंत्रण के लिए कड़ी कार्रवाई नहीं की गई? जवाब हम सब को पता है। क्योंकि हमलावर मुसलमान थे- अगर उन्हें कुछ हो जाता तो ममता के वोट बैंक को खतरा था।
दि प्रिंट और दीपक कल्लाल

सेक्स ही सेक्स… भाई साहब आप देखते किधर हैं, दि प्रिंट का सेक्सी आर्टिकल इधर है

बढ़ते कम्पटीशन के दौर में सर्वाइवल और नाम का भार ढोते इन पोर्टलों के पास नग्नता और वैचारिक नकारात्मकता के अलावा फर्जीवाड़ा और सेक्स ही बचता है जिसे हर तरह की जनता पढ़ती है। लल्लनपॉट यूनिवर्सिटी से समाज शास्त्र में पीएचडी करने वाले ही ऐसा लिख सकते हैं।
कमांडो निराला (फाइल फोटो)

देश के लिए बलिदान हुए थे कॉर्पोरल निराला, गरुड़ कमांडो ने पैसे जुटाकर कराई बहन की शादी

कमांडो निराला की बहन की शादी के लिए गरुड़ कमांडो यूनिट ने आपस में चंदा कर ₹5 लाख इकठ्ठा किए थे। यही नहीं, शादी की रस्म पूरी करने के लिए कमांडोज़ ने शादी में शिरकत भी की।

NDTV के प्रणय रॉय और राधिका रॉय को झटका, SEBI ने 2 साल के लिए किया बैन

NDTV पिछले कई सालों से वित्तीय अनियमितताओं और टैक्स फ्रॉड के कारण जाँच एजेंसियों के रडार पर थी। सेबी ने सिक्योरिटी एक्सचेंज मार्केट में लेन-देन और NDTV मैनेजमेंट में किसी भी पोस्ट से 2 साल के लिए बाहर कर दिया है।
सावरकर (साभार: इंडियन एक्सप्रेस)

सावरकर ‘वीर’ तब तक नहीं होंगे जब तक हिन्दू अपनी कहानियाँ खुद सुनाना नहीं सीखते

इनकी सावरकर से दुश्मनी केवल इसलिए है क्योंकि वह हिंदूवादी थे, और कॉन्ग्रेस की राजनीति मुस्लिम तुष्टिकरण की है। हिन्दूफ़ोबिया इनकी वैचारिक नसों में है, तो इसलिए हिन्दू हितों की बात करने वाले को खलनायक या कमज़ोर दिखाना तो हिन्दूफ़ोबिया की तार्किक परिणति होगा ही।

सरकारी डॉक्टर की जान बनाम मुस्लिम वोटबैंक को निहारती निर्मम ममता जो दंगे पीती, खाती और सोती है

ये भीड़ इतनी जल्दी कैसे आती है, कहाँ हमला करती है और किधर गायब हो जाती है? क्या पुलिस ने नहीं देखा इन्हें? क्या हॉस्पिटल में सुरक्षा के लिए पुलिस आदि नहीं होती या फिर इस पहचानहीन भीड़ का सामूहिक चेहरा ममता की पुलिस ने पहचान लिया और उन्हें वो करने दिया जो वो कर गए?
ममता बनर्जी

घमंडी, फासीवादी, सांप्रदायिक, स्वेच्छाचारी, हिंसक, असंवैधानिक, तानाशाह, भ्रष्ट, अलगाववादी: यही हैं ममता

यह इकोसिस्टम कुतर्क में उस्ताद है। बंगाल की हर हिंसा में तृणमूल के साथ बराबर का भागीदार भाजपा को बना देता है। सांप्रदायिकता में भी यही रवैया अपनाता है।
अमित शाह, जदयू प्रवक्ता

अमित शाह और BSF को कोसने के बाद JDU प्रवक्ता ने खुद दिया इस्तीफ़ा

11 तारीख़ को आलोक ने ट्विटर पर एक पोस्ट किया था। इस पोस्ट में उन्होंने बांग्लादेशी शरणार्थियों के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह पर तंज कसा था। साथ ही एक ट्वीट में उन्होंने बीएसएफ अधिकारियों पर भी निशाना साधा था।
सौम्या पुष्पाकरन की हत्या

पुलिसकर्मी एजाज़ ने सिविल पुलिस अधिकारी सौम्या पर तलवार से हमला कर जलाया

आग लगने से सौम्या की मौक़े पर ही मौत हो गई जबकि एज़ाज 40 फ़ीसदी तक जल गया। फ़िलहाल, उसे अलाप्पुझा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आईसीयू में भर्ती कराया गया।

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

50,219फैंसलाइक करें
8,766फॉलोवर्सफॉलो करें
69,736सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

शेयर करें, मदद करें: