Tuesday, June 28, 2022
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बंगाल: रायगंज में मुस्लिम बहुल गाँव के हिन्दुओं को मतदान करने से रोका गया

इलाक़े में बड़े पैमाने पर छद्म वोटिंग हुई है। कुछ हिन्दुओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें पुरुषों के समूहों द्वारा मतदान केंद्र के पास जाने से रोका गया। अन्य हिन्दुओं ने दावा किया है कि जब वे मतदान केंद्र तक पहुँचने में कामयाब रहे, तो उन्हें पता चला कि उनके नाम पर पहले ही डाले जा चुके हैं।

आज लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के शुरू होते ही पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर राजनीतिक हिंसा और चुनावी हिंसा की ख़बरें सामने आ रही हैं। इस बीच, एक ख़बर सामने आई है कि राज्य के रायगंज निर्वाचन क्षेत्र में एक मुस्लिम बहुल गाँव के हिन्दू निवासियों को मतदान करने से रोक दिया गया।

न्यूज़ चैनल के दल ने बूथ के प्रभारी और पहचान अधिकारी के साथ-साथ उन लोगों को भी सामने किया, जिन्होंने आरोप लगाया था कि उनके नाम पर छद्म-वोट (proxy-vote) डाले गए हैं। बूथ के स्टाफ ने कोई जवाब नहीं दिया।

टाइम्स नाउ की ख़बर बताती है कि रायगंज निर्वाचन क्षेत्र के बूथ संख्या 191 पर पीठासीन अधिकारी को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि वे लोग कौन थे जिन्होंने अपना वोट डाला, जबकि गाँव के लगभग 600 हिन्दुओं ने यह दावा किया कि वे अपना वोट डालने में असमर्थ थे।

ख़बर में यह भी स्पष्ट किया गया कि इलाक़े में बड़े पैमाने पर छद्म वोटिंग हुई है। कुछ हिन्दुओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें पुरुषों के समूहों द्वारा मतदान केंद्र के पास जाने से रोका गया। अन्य हिन्दुओं ने दावा किया है कि जब वे मतदान केंद्र तक पहुँचने में कामयाब रहे, तो उन्हें पता चला कि उनके नाम पर पहले ही डाले जा चुके हैं।

पहला मतदान अधिकारी, जो पहचान अधिकारी भी है, इस बात पर कोई जवाब नहीं दे पाया कि इस तरह का छद्म वोटिंग कैसे हुई। पीठासीन अधिकारी ने कथित तौर पर दावा किया है कि मतदाताओं की पहचान की पुष्टि करना उनकी ज़िम्मेदारी नहीं है।

द टाइम्स नाउ के दल ने बड़े पैमाने पर छद्म मतदान का खुलासा किया, जिसमें पीठासीन अधिकारी द्वारा कथित रूप से दुर्व्यवहार और धमकी भी दी गई थी। ख़बर में कहा गया है कि हिन्दुओं के छद्म-वोटिंग और ज़बरदस्ती उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने से रोकने जैसे मामले निर्वाचन क्षेत्र के अन्य कई गाँवों में भी हुए हैं।

भाजपा पश्चिम बंगाल ने इस मुद्दे को उठाया है और इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग में गए हैं। यहाँ यह बात ध्यान देने वाली है कि रायगंज निर्वाचन क्षेत्र से पहले भी हिंसा और चुनावी कदाचार की खबरें आ रही थीं। भाजपा उम्मीदवार देबाश्री चौधरी ने आरोप लगाया था कि TMC कार्यकर्ता मुस्लिमों के समूह के साथ प्रचार कर रहे थे और उन्होंने वहाँ एक बूथ पर क़ब्ज़ा करने की कोशिश भी की थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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