Monday, May 20, 2024
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2023-24 में ₹3.5 लाख करोड़ कम हुआ भारत का व्यापार घाटा, ₹45,000 करोड़ बढ़ा इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात: जानें कैसे मोदी सरकार में बदला विदेश व्यापार का लेखा-जोखा

वित्त वर्ष 2023-24 में भारत का व्यापार घाटा 78.12 बिलियन डॉलर (लगभग ₹6.40 लाख करोड़) रहा। इससे पहले 2022-23 में यह घाटा 121.6 बिलियन डॉलर (लगभग ₹10 लाख करोड़) रहा था। यानी बीते वर्ष के मुकाबले में इसमें 43.48 बिलियन डॉलर (लगभग ₹3.5 लाख करोड़) की कमी आई है।

भारत की विदेशों पर निर्भरता मोदी सरकार में लगातार कम हो रही है। विदेशों से भारत में आने वाला सामान लगातार कम हो रहा है जबकि भारत का निर्यात इसी दौरान बढ़ रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और दवाई जैसे क्षेत्रों में भारत अपनी धमक दुनिया में दर्ज करवा रहा है। इन क्षेत्रों में भारत चीन को अब चुनौती दे रहा है। एप्पल जैसी बड़ी कम्पनियाँ अब भारत से बड़े स्तर पर निर्यात कर रही हैं। दूसरे देशों से निर्भरता घटाने के साथ ही भारत वैश्विक दबाव का सामना भी बखूबी कर रहा है।

हाल ही में भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 के आयात-निर्यात के आँकड़े जारी किए हैं। इनसे पता चलता है कि भारत की विदेशों पर निर्भरता घटते जा रही है। भारत विदेशों से कम सामान मँगा रहा है जबकि विदेशों में अधिक सामान भेज रहा है। इसी के साथ भारत का आईटी क्षेत्र भी मजबूत हो रहा और विदेशों में भारत के सेवा क्षेत्र के निर्यात भी बढ़ रहे हैं। भारत ने आंतरिक जरूरतों का ध्यान रखते हुए कई सामानों के निर्यात पर रोक भी लगाई और जब उसके दोस्तों को आवश्यकता हुई तो उसने निर्यात की अनुमति भी दी।

विदेशी व्यापार घाटा ₹3.5 लाख करोड़ घटा

यदि किसी देश का विदेशों से होने वाला आयात उसके निर्यात से अधिक है तो इसके बीच के अंतर को व्यापार घाटा कहते हैं। यदि किसी देश का निर्यात उसके आयात से अधिक होता है तो वह व्यापार अधिभार (ट्रेड सरप्लस) कहा जाता है। भारत के सम्बन्ध में हमेशा आयात, निर्यात से अधिक रहता है क्योंकि हम ईंधन के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हैं। हालाँकि, भारत ने इन सब चुनौतियों से लड़ते हुए 2023-24 में अपना व्यापार घाटा घटाने में सफलता पाई है।

भारत व्यापार घाटा

वित्त वर्ष 2023-24 में भारत का व्यापार घाटा 78.12 बिलियन डॉलर (लगभग ₹6.40 लाख करोड़) रहा। इससे पहले 2022-23 में यह घाटा 121.6 बिलियन डॉलर (लगभग ₹10 लाख करोड़) रहा था। यानी बीते वर्ष के मुकाबले में इसमें 43.48 बिलियन डॉलर (लगभग ₹3.5 लाख करोड़) की कमी आई है। यानी देश का ₹3.5 लाख करोड़ देश से बाहर जाने से बचा। विदेशी व्यापार घाटे के कारण देश के खजाने पर जोर पड़ता है, इस बार यह कम हुआ है।

2023-24 के दौरान देश के भीतर विदेशों से आने वाले सामानों में 2022-23 के मुकाबले 38 बिलियन डॉलर (लगभग ₹3.1 लाख करोड़) की कमी आई है। इसका अर्थ है कि हम अपनी जरूरत का सामन देश के भीतर ही बना रहे हैं और विदेशों से कम मँगा रहे हैं। दूसरी तरफ सेवाओं के आयात में 5 बिलियन डॉलर (लगभग ₹40,000 करोड़) की कमी आई है। सेवाओं के आयात में कमी का अर्थ है कि भारत तकनीकी रूप से भी आत्मनिर्भर हो रहा है। सेवा क्षेत्र के अधिकांश आयात-निर्यात आईटी और फाइनेंस क्षेत्र से सम्बंधित होते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स के आयात को मिल रही नई रफ़्तार

मोदी सरकार में सबसे बड़ी छलाँग इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में भारत ने लगाई है। इन इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात भी अब बड़े स्तर पर हो रहा है। भारत आज से कुछ वर्ष अपने इलेक्ट्रॉनिक सामानों के लिए चीन पर निर्भर था जबकि अब वह उन्हें दूसरे देशों को बेंच रहा है। रिपोर्ट बताती है कि वित्त वर्ष 2023-24 में भारत ने 29.12 बिलियन डॉलर (लगभग ₹2.4 लाख करोड़) के इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात किया है। यह 2022-23 में 23.55 बिलियन डॉलर (₹1.9 लाख करोड़) था। इसमें एक वर्ष में ही 23% से अधिक की वृद्धि हुई है।

इलेक्ट्रॉनिक्स के निर्माण को देश में नई रफ़्तार मोदी सरकार में मिली है। एक रिपोर्ट के अनुसार, केवल एप्पल कम्पनी ने ही 2023-24 के दौरान भारत में 14 बिलियन डॉलर से अधिक का निर्माण किया। एप्पल ने भारत से 2023-24 में 12 बिलियन डॉलर (₹1.2 लाख करोड़) से अधिक का निर्यात किया है।

भारत से 2023-24 के दौरान 16 बिलियन डॉलर (₹1.3 लाख करोड़) से अधिक के स्मार्टफ़ोन निर्यात किए गए हैं। इस सफलता में बड़ा हिस्सा मोदी सरकार द्वारा लाई गई PLI स्कीम का है। इसके अंतर्गत भारत में निर्माण करने वाली कम्पनियों को सरकार सब्सिडी देती है।

दवा के निर्यात में भी तेजी

इलेक्ट्रॉनिक्स के अलावा भारत ने दवाइयों के निर्यात में भी बड़ी सफलता हासिल की है। भारत ने वर्ष 2023-24 में 27.85 बिलियन डॉलर (₹2.2 लाख करोड़) से अधिक की दवाओं का निर्यात किया है। दवाओं के क्षेत्र में विश्व के कई देश भारत पर निर्भर हैं। सस्ती दरों में अच्छी गुणवत्ता की दवाई बनाने के कारण भारत विश्वास के दवाखाने के नाम से जाना गया है। यह 2013-14 दौरान मात्र ₹90,483 करोड़ के आसपास था।

कई वस्तुओं के मामले में कम हुई विदेशों पर निर्भरता

2023-24 के दौरान भारत की कई वस्तुओं के मामले में निर्भरता विदेशों पर कम हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 के दौरान खाद के लिए विदेशों पर निर्भरता घटी है। 2023-24 में भारत को विदेशों से 40% कम खाद और रसायन मँगाने पड़े।

भारत खाद के क्षेत्र में अब बड़े स्टार पर आत्मनिर्भर हो गया है। खाने के तेल के आयात में भी 28% की कमी आई है। कोयले के आयात में भी 21% की कमी आई है। इसके उलट भारत से विदेशों को जाने वाले देरी उत्पादों में 12.3% की बढ़त, फल और सब्जियों में 13% की बढ़त और मसालों के निर्यात में 12.3% की बढ़त हुई।

(1 डॉलर = ₹82)

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