Homeराजनीति'जामिया-जलियाँवाला की तुलना वीरों का, देश के लिए प्राणोत्सर्ग करने वालों का अपमान'

‘जामिया-जलियाँवाला की तुलना वीरों का, देश के लिए प्राणोत्सर्ग करने वालों का अपमान’

उद्धव ठाकरे ने जामिया में विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा के ख़िलाफ़ कार्रवाई की तुलना जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड से कर दी थी। 1919 में हुआ यह हत्याकाण्ड जनरल डायर की ब्रिटिश-हिंदुस्तानी फ़ौज द्वारा...

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा के नेता विपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और शिव सेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा है। ठाकरे द्वारा जामिया के (हुड़दंगी और हिंसक) छात्रों को रोकने के लिए की गई सीमित पुलिस कार्रवाई की तुलना जलियाँवाला बाग़ हत्याकाण्ड से करने को महाराष्ट्र भाजपा के शीर्ष नेता ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। साथ ही फडणवीस ने कहा है कि इससे ठाकरे ने देश के लिए प्राणोत्सर्ग करने वाले वीरों का अपमान किया है।

गौरतलब है कि आज ही (17 दिसंबर, 2019 को) उद्धव ठाकरे ने जामिया में विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा के ख़िलाफ़ कार्रवाई की तुलना जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड से कर दी थी। 1919 में हुआ यह हत्याकाण्ड जनरल डायर की ब्रिटिश-हिंदुस्तानी फ़ौज द्वारा निहत्थे भारतीयों पर लोहड़ी के दिन किया गया लोमहर्षक अत्याचार था।

‘सेक्युलर’ कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार चला रहे उद्धव ठाकरे लगातार नागरिकता विधेयक पर अपना स्टैंड बदलते आए हैं। लोक सभा में उनकी पार्टी ने बिना कॉन्ग्रेस से कोई सलाह-मशविरा किए विधेयक को समर्थन दे दिया। लेकिन फिर कॉन्ग्रेस के आँख दिखाने पर अपना स्टैंड बदलते हुए ठाकरे राज्य सभा में इसके समर्थन के लिए तीन-पाँच करने लगे। और उस पर भी कोर वोटबैंक की प्रतिक्रिया नकारात्मक होने पर अंततः उनकी पार्टी ने वॉक आउट कर बीच का रास्ता अपनाया- ताकि न ही विधेयक की खुल कर मुख़ालफ़त करनी पड़े, न ही इसके समर्थन से कॉन्ग्रेस का महाराष्ट्र राज्य सरकार को समर्थन छूट जाए।

उद्धव के इस बयान के बाद खबर यह भी आई कि शिवसेना ने सभी विपक्षी दलों को झटका देते हुए राष्ट्रपति से मिलने जाने वाले प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया। मंगलवार शाम (दिसंबर 17, 2019) को ‘ऑल पार्टी डेलीगेशन’ की राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाक़ात की। इसमें कॉन्ग्रेस समेत सभी विपक्षी दल राष्ट्रपति के समक्ष सीएए को लेकर अपनी चिंताएँ जाहिर की। लेकिन विपक्षी पार्टी बन चुकने के बाद भी शिव सेना इससे दूर ही रही।

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