Wednesday, April 14, 2021
Home राजनीति शुरुआती रुझानों में भाजपा और जेएमएम के बीच कड़ी टक्कर, क्या मिथक तोड़ पाएँगे...

शुरुआती रुझानों में भाजपा और जेएमएम के बीच कड़ी टक्कर, क्या मिथक तोड़ पाएँगे रघुवर दास?

पिछला विधानसभा चुनाव तो पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए कब्रगाह ही साबित हुआ था। चार-चार पूर्व मुख्यमंत्री चुनाव हार गए थे। बाबूलाल से लेकर अर्जुन मुंडा तक। माना जाता है कि खरसांवा से मुंडा की हार ने ही रघुवर दास के रूप में राज्य को पहला गैर आदिवासी मुख्यमंत्री मिलने का रास्ता खोला था।

81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजे अगले कुछ घंटों में स्पष्ट हो जाएँगे। शुरुआती रुझानों में झामुमो-कॉन्ग्रेस-राजद गठबंधन को बढ़त दिख रही है। यदि अंतिम नतीजे भी इसी तरह के रहे तो एक और राज्य भाजपा के हाथ से निकल सकता है। हालॉंकि पोस्टल बैलेट की गिनती पूरी होने के बाद रुझानों में भाजपा की सीटें धीरे-धीरे बढ़ रही है। इन सबके बीच एक सीट जिसके नतीजे को लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता है वह है जमशेदपुर पूर्वी सीट। यह सीट भाजपा का गढ़ रहा और खुद मुख्यमंत्री रघुवर दास यहॉं से मैदान में हैं। बावजूद इसके दो कारणों से इस बार यहॉं भाजपा की राह मुश्किल मानी जा रही है।

पहला, रघुवर दास को चुनौती केवल कॉन्ग्रेस के गौरव वल्लभ से ही नहीं मिली है। इस सीट से रघुवर कैबिनेट में मंत्री रहे सरयू राय भी मैदान में हैं। राय झारखंड भाजपा के कद्दावर नेताओं में से रहे हैं और चुनाव से ऐन पहले उन्होंने अलग राह पकड़ी थी। इस इलाके में उनकी भी जबर्दस्त पकड़ मानी जाती है।

दूसरा, मुख्यमंत्रियों से झारखंड की जनता का पुराना वैर। यह दिलचस्प है कि झारखंड के 19 साल के राजनीतिक सफर में जो भी मुख्यमंत्री रहा है उसे चुनावी हार का स्वाद चखना पड़ा है। राज्य में अब तक छह मुख्यमंत्री हो चुके हैं। बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा, शिबू सोरेन, मधु कोड़ा, हेमंत सोरेन और रघुवर दास। रघुवर एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिन्होंने बतौर मुख्यमंत्री पॉंच साल का कार्यकाल पूरा किया है। लेकिन, एक मिथक यह भी है कि मुख्यमंत्री के तौर पर जो भी चुनाव मैदान में गया है उसे हार भी मिली है।

शिबू सोरेन तो मुख्यमंत्री बनने के बाद विधायक तक नहीं बन पाए थे। तमाड़ में राजा पीटर ने उन्हें पटखनी दे दी थी। पिछला विधानसभा चुनाव तो पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए कब्रगाह ही साबित हुआ था। चार-चार पूर्व मुख्यमंत्री चुनाव हार गए थे। मधु कोड़ा और हेमंत सोरेन चुनाव हार गए थे। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी और फिलहाल केंद्र में मंत्री और तीन राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके अर्जुन मुंडा भी जीत नहीं पाए थे। माना जाता है कि खरसांवा से मुंडा की हार ने ही रघुवर दास के रूप में राज्य को पहला गैर आदिवासी मुख्यमंत्री मिलने का रास्ता खोला था।

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या इस इतिहास को रघुवर दास बदल पाएंगे? जानकार उनकी राह मुश्किल मानते हैं। जैसा कि राजनीतिक विश्लेषक और जन की बात के सीईओ प्रदीप भंडारी ने ऑपइंडिया को बताया- “राज्य में एंटी इंकंबेंसी महत्वपूर्ण फैक्टर है। यदि खुद मुख्यमंत्री चुनाव हार जाएँ या बेहद मामूली अंतर से ही जीत पाएँ तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।”

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

7000 वाली मस्जिद में सिर्फ 50 लोग नमाज पढ़ेंगे… प्लीज अनुमति दीजिए: बॉम्बे HC का फैसला – ‘नहीं’

"हम किसी भी धर्म के लिए अपवाद नहीं बना सकते, खासकर इस 15-दिन की प्रतिबंध अवधि में। हम इस स्तर पर जोखिम नहीं उठा सकते।"

CBSE 10वीं की बोर्ड परीक्षा रद्द, मनीष सिसोदिया ने कहा-12वीं के छात्र भी प्रमोट हों

कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते हुए सरकार ने CBSE की 10वीं बोर्ड की परीक्षाओं को इस साल निरस्त कर दिया है, वहीं 12वीं की परीक्षा...

‘कल के कायर आज के मुस्लिम’: यति नरसिंहानंद को गाली देती भीड़ को हिन्दुओं ने ऐसे दिया जवाब

यमुनानगर में माइक लेकर भड़काऊ बयानबाजी करती भीड़ को पीछे हटना पड़ा। जानिए हिन्दू कार्यकर्ताओं ने कैसे किया प्रतिकार?

‘1 लाख का धर्मांतरण, 50000 गाँव, 25 साल के बराबर चर्च बने’: भारत में कोरोना से खूब फले ईसाई मिशनरी

ईसाई संस्था के CEO डेविड रीव्स का कहना है कि हर चर्च को 10 गाँवों में प्रार्थना आयोजित करने को कहा गया। जैसे-जैसे पाबंदियाँ हटीं, मिशनरी उन क्षेत्रों में सक्रिय होते चले गए।

14 सिम कार्ड, 1 व्हाट्सएप कॉल और मुंबई की बार डांसर… ATS ने कुछ यूँ सुलझाया मनसुख हिरेन की हत्या का मामला

एंटीलिया केस और मनसुख हिरेन मर्डर की गुत्थी सुलझने में एक बार डांसर की अहम भूमिका रही। उसकी वजह से ही सारे तार आपस में जुड़े।

मुंबई में हो क्या रहा है! बिना टेस्ट ₹300 में कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट, ₹10000 देकर क्वारंटाइन से मिल जाती है छुट्टी: रिपोर्ट

मिड डे ने मुंबई में कोरोना की आड़ में चल रहे एक और भ्रष्टाचार को उजागर किया है। बिना टेस्ट पैसे लेकर RT-PCR नेगेटिव रिपोर्ट मुहैया कराई जा रही है।

प्रचलित ख़बरें

‘हमें बार-बार जाना पड़ता है, वो वॉशरूम कब जाती हैं’: साक्षी जोशी का PK से सवाल- क्या है ममता बनर्जी का टॉयलेट शेड्यूल

क्लबहाउस पर बातचीत में ‘स्वतंत्र पत्रकार’ साक्षी जोशी ने ममता बनर्जी की शौचालय की दिनचर्या के बारे में उनके चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से पूछताछ की।

छबड़ा में मुस्लिम भीड़ के सामने पुलिस भी थी बेबस: अब चारों ओर तबाही का मंजर, बिजली-पानी भी ठप

हिन्दुओं की दुकानों को निशाना बनाया गया। आँसू गैस के गोले दागे जाने पर हिंसक भीड़ ने पुलिस को ही दौड़ा-दौड़ा कर पीटा।

जहाँ खालिस्तानी प्रोपेगेंडाबाज, वहीं मन की बात: क्लबहाउस पर पंजाब का ठेका तो कंफर्म नहीं कर रहे थे प्रशांत किशोर

क्लबहाउस पर प्रशांत किशोर का होना क्या किसी विस्तृत योजना का हिस्सा था? क्या वे पंजाब के अपने असायनमेंट को कंफर्म कर रहे थे?

भाई ने कर ली आत्महत्या, परिवार ने 10 दिनों तक छिपाई बात: IPL के ग्राउंड में चमका टेम्पो ड्राइवर का बेटा, सहवाग भी हुए...

IPL की नीलामी में चेतन सकारिया को अच्छी खबर तो मिली, लेकिन इससे तीन सप्ताह पहले ही उनके छोटे भाई ने आत्महत्या कर ली थी।

पहले कमल के साथ चाकूबाजी, अगले दिन मुस्लिम इलाके में एक और हिंदू पर हमला: छबड़ा में गुर्जर थे निशाने पर

राजस्थान के छबड़ा में हिंसा क्यों? कमल के साथ फरीद, आबिद और समीर की चाकूबाजी के अगले दिन क्या हुआ? बैंसला ने ऑपइंडिया को सब कुछ बताया।

रूस का S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम और US नेवी का भारत में घुसना: ड्रैगन पर लगाम के लिए भारत को साधनी होगी दोधारी नीति

9 अप्रैल को भारत के EEZ में अमेरिका का सातवाँ बेड़ा घुस आया। देखने में जितना आसान है, इसका कूटनीतिक लक्ष्य उतनी ही कॉम्प्लेक्स!
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,985FansLike
82,197FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe