Monday, May 20, 2024
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काँवड़ियों पर बरसते हर एक फूल से ओवैसी को लग रही मिर्ची, कहा – खुले में नमाज पर होता है बवाल, काँवड़ के रास्ते में गोश्त बैन

“यह 'रेवड़ी कल्चर' नहीं है? मुसलमान, खुली जगह पर चंद मिनट के लिए के नमाज़ भी अदा करे तो “बवाल” हो जाता है। मुसलमानों को सिर्फ मुसलमान होने की वजह से पुलिस की गोलियों, हिरासती तशद्दुद, NSA, UAPA, लिंचिंग, बुल्डोज़र और तोड़-फोड़ का सामना करना पड़ रहा है।”

उत्तर प्रदेश में काँवड़ यात्रा के दौरान कुछ बेहतरीन तस्वीरें आईं। कई काँवड़ यात्रा पर फूलों की बारिश की गई। कई जगह काँवड़ यात्रियों के पैर की मालिश की गई। काँवड़ियों का गर्मजोशी से स्वागत किए जाने पर अब AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का बयान आया है। हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने भेदभाव का आरोप लगाते हुए पूछा है कि एक पक्ष के लिए मोहब्बत तो दूजे के लिए नफरत क्यों अपनाई जा रही है। टैक्स के पैसों से काँवड़ियों पर फूल बरसाई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर काँवड़ियों पर फूल बरसाए जा रहे हैं, तब कम से कम उन लोगों (मुस्लिमों) के घर तो न तोड़े जाएँ।

ये सारी बातें उन्होंने इन्हीं मसलों से जुड़ी खबरें शेयर करते हुए टि्वटर के जरिए कहीं। ओवैसी ने ट्वीट किया, “पुलिस ने पंखुड़ियों की बौछार कीं। काँवड़ियों का झंडों से “इस्तक़बाल” किया। उनके पैरों पर लोशन लगाया और उनके साथ इंतेहाई शफकत से पेश आई। दिल्ली पुलिस ने लोहारों को हटाने की बात की, ताकि काँवड़िया नाराज न हो जाएँ। उत्तर प्रदेश हुकूमत ने यात्रा के रास्तों पर गोश्त पर पाबंदी लगा दी।” 

उन्होंने आगे लिखा, “यह ‘रेवड़ी कल्चर’ नहीं है? मुसलमान, खुली जगह पर चंद मिनट के लिए के नमाज़ भी अदा करे तो “बवाल” हो जाता है। मुसलमानों को सिर्फ मुसलमान होने की वजह से पुलिस की गोलियों, हिरासती तशद्दुद, NSA, UAPA, लिंचिंग, बुल्डोज़र और तोड़-फोड़ का सामना करना पड़ रहा है।”

ओवैसी ने अगले ट्वीट में लिखा, “काँवड़ियों के जज़्बात इतने मुतज़लज़ल हैं कि वे किसी मुसलमान पुलिस अहलकार का नाम भी बर्दाश्त नहीं कर सकते। यह भेद-भाव क्यों? यकसानियत नहीं होनी चाहिए? एक से नफ़रत और दूसरों से मोहब्बत क्यों? एक मज़हब के लिए ट्रैफिक डाइवर्ट और दूसरे के लिए बुलडोज़र क्यों? अगर इन पर फूल बरसा रहे हैं, तो कम से कम हमारे घर तो मत तोड़िए।”

उन्होंने कहा कि यदि काँवड़ियों के लिए ट्रैफिक को डायवर्ट किया जा सकता है तो फिर नमाज से ही क्या दिक्कत है। उन्होंने कहा कि ऐसा है तो फिर हमें भी नमाज पढ़ने दी जाए। आर्टिकल 25 के तहत सभी को धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार है। लुलु मॉल में नमाज पर ऐक्शन हुआ, जबकि 18 सेकेंड में यह खत्म हो जाती है। नमाज पढ़ने से किसी को क्या नुकसान हो जाता है। यह तो एक समुदाय से भेदभाव का मामला है।

उन्होंने इस बारे में मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमारा संविधान सेक्युलर है और वह किसी भी धर्म के प्रति नफरत या प्यार की बात नहीं करता। ओवैसी ने कहा कि इस तरह से भाजपा सरकार एक समुदाय से भेदभाव कर रही है, जो संविधान के खिलाफ है। इस पर भाजपा वाले आर्टिकल 25 का हवाला देंगे, लेकिन फिर यह भी बताएँ कि नमाज पढ़ने से किसे दिक्कत है और उन्हें क्या नुकसान हो रहा है। यदि आपका नारा सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास है तो इस तरह का काम उसके मुताबिक तो नहीं है।

केशव प्रसाद बोले- तीर्थयात्रियों की सेवा करना परंपरा है

असदुद्दीन ओवैसी की टिप्पणियों पर यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी तो देशविरोधी बातें करते रहते हैं। वह हमेशा हिंदू-मुस्लिम करते रहते हैं। ओवैसी का बयान जहर फैलाने वाला है। उन्होंने काँवड़ियों के स्वागत को लेकर कहा कि यह तो भारत की प्रथा है। उन्होंने कहा, हम तीर्थयात्रियों की सेवा करते थे, करते हैं और आगे भी करते रहेंगे। 

मौर्य ने आगे कहा, “एक से मोहब्बत और एक से नफरत वाला बयान तो इस प्रकार के घटिया लोग ही दे सकते हैं। वोट बैंक की तलाश में भटक रहे ऐसे लोग इस प्रकार का जहर फैलाने की कोशिश करते हैं। हमारी सरकार सबका साथ सबका विकास करती है। उन्हें गरीब मुसलमान की चिंता नहीं है। गरीब मुसलमान AIMIM का वोट बैंक कैसे बन जाए, इसके लिए ऐसे जहरीले बयान देने की कोशिश की जाती है। हिंदू-मुसलमान के बीच भेदभाव किए बिना सरकार की योजना का लाभ हर किसी को मिल रहा है।” 

शलभमणि त्रिपाठी ने किया ओवैसी पर पलटवार

वहीं बीजेपी विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने भी ओवैसी पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा, “पूछ रहे कि काँवड़ियों पर पुष्पवर्षा का पैसा कहाँ से आ रहा, ये भी भला सवाल है, पैसा तो वहीं से आ रहा, जहाँ से हजयात्रियों और हजहाउसों के लिए आता था। पैसा वहीं से आ रहा जहाँ से मुफ़्त की रोज़ा इफ़्तारी के लिए आता था। पैसा वहीं से आ रहा जहाँ से मदरसों की इस्लामिक तालीम के लिए आता था।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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