Tuesday, October 19, 2021
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मुंबई कर्नाटक का हिस्सा, महाराष्ट्र से काट कर केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया जाए: गरमाई मराठी-कन्नड़ राजनीति

“हमारी माँग है कि मुंबई को कर्नाटक में शामिल किया जाए। कर्नाटक में शामिल किए जाने तक मुंबई को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया जाना चाहिए।”

हाल ही में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कर्नाटक में मराठी भाषी क्षेत्रों के महाराष्ट्र में विलय की बात कह पुरानी राजनीति को नए ढंग से पेश किया। इसके बाद कर्नाटक और महाराष्ट्र सरकार के बीच सीमा विवाद पर बयानबाजी बढ़ती है।

सीएम उद्धव ठाकरे की बयानबाजी के बाद अब कर्नाटक की ओर से जवाब आया है। कर्नाटक के डिप्टी सीएम लक्ष्मण सावदी ने इसका जवाब दिया है। उनका कहना है कि कर्नाटक के लोग चाहते हैं कि मुंबई को कर्नाटक में शामिल कर लिया जाए। 

कर्नाटक के डिप्टी सीएम लक्ष्मण सावदी ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा कि महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई को केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर देना चाहिए। मुंबई कर्नाटक का हिस्सा है। कर्नाटक के लोगों का मानना है कि मुंबई लंबे समय तक कर्नाटक में रही है, इसलिए मुंबई पर उनका अधिकार है।

डिप्टी सीएम लक्ष्मण सावदी ने उद्धव ठाकरे के बयान का जवाब देते हुए कहा, “हमारी माँग है कि मुंबई को कर्नाटक में शामिल किया जाए। कर्नाटक में शामिल किए जाने तक मुंबई को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया जाना चाहिए।” 

दरअसल हाल ही में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कर्नाटक में मराठी भाषी क्षेत्रों के विलय के विरोध जैसे अपने पुराने एजेंडे को पुनर्जीवित करने के प्रयासों को हवा दी थी। शिवसेना बेलगाम क्षेत्र को कर्नाटक में शामिल करने के खिलाफ रही है और इसके लिए उसने मराठी को आधार बनाया है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बुधवार (जनवरी 27, 2021) को कहा था कि जब तक सर्वोच्च न्यायालय इस मुद्दे पर अपना अंतिम फैसला नहीं दे देता, तब तक कर्नाटक की राज्य की सीमा पर मराठी भाषी लोगों के वर्चस्व वाले क्षेत्रों को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया जाना चाहिए।

दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद पर एक पुस्तक के लोकार्पण पर बोलते हुए, उद्धव ठाकरे ने कहा था कि हम सभी को कर्नाटक सरकार के अन्याय और अत्याचार का विरोध करने के लिए एक मंच पर आना चाहिए। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के मुताबिक़ अगर मराठी बोलने वाले लोग कर्नाटक सरकार के खिलाफ आवाज उठाते हैं तो उनके खिलाफ झूठे केस दायर किए जाते हैं, जिसके खिलाफ हमें एकजुट होने की जरूरत है।

उल्लेखनीय है कि बेलगाम क्षेत्र कर्नाटक और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित है, जहाँ मराठी भाषी बहुसंख्यक रहते हैं। महाराष्ट्र कुछ क्षेत्रों पर अपना दावा करता है, जिनमें बेलगाम, करवार और निप्पनी शामिल हैं और ये कर्नाटक का हिस्सा हैं, इन क्षेत्रों में अधिकांश आबादी मराठी भाषी है। दोनों राज्यों के बीच विवाद का मामला कई वर्षों से उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित है।

इस पर ठाकरे ने कहा, “जब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही है, तो कर्नाटक सरकार बेलगाम का नाम बदलकर उसे दूसरी राजधानी घोषित करती है, एक विधानमंडल भवन का निर्माण करती है और वहाँ एक विधायिका सत्र आयोजित करती है। क्या यह अदालत की अवमानना ​​नहीं है?”

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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