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‘हम केरल के CM के गुलाम नहीं’: आर्थोडॉक्स चर्च ने वामपंथी सरकार को चेताया, कहा- अदब से पेश आएँ विजयन

“मुख्यमंत्री को केवल पार्टी के स्थानीय कार्यालय में राजनीतिक प्रतिक्रिया देने की जरूरत है। अगर वह चर्च के साथ सम्मान के साथ व्यवहार करते हैं तो यह उनके लिए फायदेमंद होगा।”

केरल की वामपंथी सरकार को आर्थोडॉक्स चर्च ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री पी विजयन के तानाशाही रवैए पर तंज कसते हुए कहा है कि केरल में कम्युनिस्ट पार्टी के फासीवादी शासन को अनुमति नहीं दी जा सकती।

चर्च के मीडिया प्रमुख डॉ. गिवर्गीस मार यूलिओस मेथ्रोपोलिथ ने कहा कि मुख्यमंत्री का राजनीतिक संदेश सीपीआईएम के पार्टी कार्यालयों के लिए होना चाहिए, न कि ऑर्थोडॉक्स चर्च के लिए। उन्होंने कहा कि विजयन को राज्य में सीएम का पद दिया गया है और अगर वह चाहते हैं कि उन्हें दिया गया सम्मान बरकरार रहे तो उन्हें चर्च से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

ऑर्थोडॉक्स चर्च के मीडिया प्रमुख ने कहा, “मुख्यमंत्री को केवल पार्टी के स्थानीय कार्यालय में राजनीतिक प्रतिक्रिया देने की जरूरत है। अगर वह चर्च के साथ सम्मान के साथ व्यवहार करते हैं तो यह उनके लिए फायदेमंद होगा।”

जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री ने एक पादरी से ऑर्थोडॉक्स चर्च और जैकबाइट चर्च के बीच विवाद एवं प्रवेश के बारे में सवाल पूछा था। इसकी जह से ऑर्थोडॉक्स चर्च मीडिया प्रमुख उत्तेजित थे। डॉ. गिवर्गीस ने सीएम को फटकारते हुए कहा, “हम केरल के मुख्यमंत्री के गुलाम नहीं हैं।” उन्होंने आगे कहा कि पिनाराई विजयन को चर्च के साथ व्यवहार करते समय शालीनता दिखानी चाहिए।

चर्च ने विजयन पर कथित तौर पर झूठ बोलने और पादरियों की अखंडता पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। मीडिया प्रमुख ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनकी तरफ था और विवादित चर्चों को जब्त करना और उन्हें सौंपना राज्य सरकार की जिम्मेदारी थी। उन्होंने यह भी कहा कि चर्च का निष्कासन अदालत के आदेशों के अनुसार है और यह राज्य सरकार की मंशा के अनुसार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि मुख्यमंत्री को कभी भी गलत धारणा नहीं बनानी चाहिए कि चर्चा के माध्यम से अदालत के फैसले से ऊपर जाया जा सकता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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