’14 महीने तक कॉन्ग्रेस के लिए गुलामों की तरह काम किया, लेकिन कभी सराहना नहीं मिली’

"मैं घृणित हूँ, व्यक्तिगत रूप से मुझे राजनीति में बने रहने का कोई शौक नहीं है, लेकिन मेरी पार्टी के कार्यकर्ताओं के कारण, मैं निरंतर काम कर रहा हूँ। अब राजनीति जातिगत, बाहुबल और धन शक्ति से चल रही है। आजकल राजनीतिक गतिविधियों में कोई निष्पक्षता नहीं है। अच्छे लोगों के लिए, यह बहुत मुश्किल है।"

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस-जेडीएस के गठबंधन वाली सरकार गिरने के बाद जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने कई बातों का खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने 14 महीने कॉन्ग्रेस के लिए गुलाम की तरह काम किया, लेकिन उनके काम की कभी किसी ने सरहाना नहीं की। उनकी मानें तो उन्होंने सभी विधायकों और निगम अध्यक्षों को पूरी स्वतंत्रता दी थी, लेकिन फिर भी कॉन्ग्रेस सरकार गिरने का दोष उन्हें दे रही है।

गौरतलब है कि कर्नाटक में लंबे समय से चले राजनैतिक संकट के कारण 14 महीने पुरानी सरकार गिरने के बाद राज्य में येदियुरप्पा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी है। जिसके बाद कुमार स्वामी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वह मुख्यमंत्री का पद छोड़ने के बाद बेहद खुश हैं। उनकी मानें तो उन्होंने 14 महीने तक राज्य के विकास के लिए काम किया। लेकिन उन्हें दुख सिर्फ़ ये हुआ कि किसी ने भी उनके काम की सराहना नहीं की।

एचडी कुमारस्वामी ने बातचीत के दौरान यह भी बताया कि राज्य में कई कॉन्ग्रेसी नेता गठबंधन की सरकार नहीं बनाना चाहते थे। लेकिन राज्य में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था। ऐसे में कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेता दिल से चाहते थे कि वह जेडीएस के साथ सरकार बनाएँ। हालाँकि, कुछ स्थानीय नेता इसमें दिलचस्पी नहीं रख रहे थे लेकिन फिर भी सरकार बनी।

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मीडिया खबरों की मानें तो कर्नाटक के पूर्व सीएम कहते है कि सरकार के गठन के पहले दिन से ही कॉन्ग्रेस नेताओं के एक वर्ग ने जनता के साथ कैसा व्यवहार किया, यह सभी जानते हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने जेडीएस की तुलना में कॉन्ग्रेस विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अधिक धन आवंटित किया था ताकि विकास कार्य में दुविधा न आए।

अपना दुख जाहिर करते हुए कुमारस्वामी ने बताया कि जब भी कोई विधायक बिना अपॉइंटमेंट के उनसे मिलने आता था, तो भी वे उनसे मिलते थे। वह कहते है कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों के विकास के लिए उनके पास जो भी अनुरोध आए, उन्होंने तत्काल उन पर फैसला लिया।

पूर्व मुख्यमंत्री के अनुसार “मैंने 14 महीनों में जितना काम किया, पिछली कॉन्ग्रेस सरकार ने कुछ नहीं किया। मैंने कॉन्ग्रेस विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों को 14 महीनों में 19,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का आवंटन किया।”

बता दें कि कुछ मीडिया खबरों के मुताबिक कर्नाटक में जेडीएस-कॉन्ग्रेस की सरकार गिरने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री राजनीति छोड़ने की सोच रहे हैं। वह कहते हैं, “मैं घृणित हूँ, व्यक्तिगत रूप से मुझे राजनीति में बने रहने का कोई शौक नहीं है, लेकिन मेरी पार्टी के कार्यकर्ताओं के कारण, मैं निरंतर काम कर रहा हूँ। अब राजनीति जातिगत, बाहुबल और धन शक्ति से चल रही है। आजकल राजनीतिक गतिविधियों में कोई निष्पक्षता नहीं है। अच्छे लोगों के लिए, यह बहुत मुश्किल है।”

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