Homeराजनीतिलालू यादव की मुश्किलें बढ़ीं: चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट...

लालू यादव की मुश्किलें बढ़ीं: चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने माँगा जवाब

देवघर ट्रेजरी केस में आधी सजा काट लेने के आधार पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को 12 जुलाई 2019 को झारखंड हाईकोर्ट से 50-50 हजार रूपए के दो निजी मुचलके पर जमानत मिली थी।

चारा घोटाले के देवघर ट्रेजरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजद प्रमुख लालू यादव से 3 अप्रैल तक जवाब देने को कहा है। लालू यादव को इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिली थी जिसके बाद सीबीआई (CBI) ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव को नोटिस भेज जवाब दाखिल करने को कहा है, इससे लालू यादव की चुनौतियाँ बढ़ सकती है।

रिपोर्ट्स के अनुसार देवघर ट्रेजरी केस में आधी सजा काट लेने के आधार पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को 12 जुलाई 2019 को झारखंड हाईकोर्ट से 50-50 हजार रूपए के दो निजी मुचलके पर जमानत मिली थी। झारखंड हाईकोर्ट के वकील प्रभात कुमार ने बताया कि सीबीआई की जमानत के खिलाफ अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव को नोटिस भेजा है, जिस पर उन्हें 3 अप्रैल तक जवाब दाखिल करना है।

इस केस में सीबीआई कोर्ट से लालू यादव को साढ़े 3 साल की सजा और 10 लाख रुपए का जुर्माने भरने का हुक्म दिया था। देवघर ट्रेजरी केस के अलावा चारा घोटाले के तीन दूसरे मामले में भी राजद प्रमुख लालू यादव सजा काट रहे हैं। लालू यादव फ़िलहाल राँची स्थित रिम्स में अपना इलाज करवा रहे हैं।

लालू यादव को लेकर दो और तरह की खबरें भी आज सुर्खियाँ बटोरती रहीं। पहली जिसमें कोरोना वायरस से डर के कारण लालू यादव के टहलना बंद करने का जिक्र है जबकि आमदिनों में वो गलियारे में टहला करते थे और दूसरी खबरें जिसमें झारखंड में अपनी मन माफिक सरकार आने के बाद उनके द्वारा जेल के नियम कानून को ताक पर रखकर राजनीतिक दरबार लगाने की खबरें भी शामिल है। जिससे उनकी सुरक्षा नियमों की भी धज्जियाँ उड़ रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव और तेजस्‍वी यादव की बेरोजगारी यात्रा को लेकर लालू से मिलने गुरुवार को रिम्‍स में कई लोगों के पहुँचने की खबर आई, जो जेल के नियम कानून के खिलाफ है। ध्यातव्य है कि लालू यादव रिम्स में किडनी की गंभीर बीमारी समेत लगभग 12/13 बिमारियों का इलाज करवा रहे हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -