Homeराजनीतिमायावती ने राहुल गाँधी के वादों का उड़ाया मज़ाक

मायावती ने राहुल गाँधी के वादों का उड़ाया मज़ाक

मायावती ने राहुल के इस वादे पर सवाल उठाया कि ग़रीब को न्यूनतम आय देने का वादा, कॉन्ग्रेस के ‘ग़रीबी हटाओ’ और बीजेपी के ‘अच्छे दिन’ जैसा ही मज़ाक तो नहीं है।

मायावती ने मंगलवार (जनवरी, 29 2019) को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा जनता से किए वादे पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि अगर ‘गरीबी हटाओ’ और ‘अच्छे दिन’ की तरह राहुल का वादा भी एक मज़ाक हुआ तो हैरानी वाली बात नहीं होगी। बता दें कि मायावती ने राहुल पर ये तंज उनके सोमवार (जनवरी, 28 2019) को जनता से किए वादे पर कसा है। जिसमें राहुल ने कहा था कि अगर वो सरकार में आते हैं तो देश में गरीबों को न्यूनतम आय दी जाएगी।

बीएसपी प्रमुख मायावती ने राहुल को सलाह दी है कि वो पहले कॉन्ग्रेस शासित राज्य (राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़) में ग़रीबी को हटाने से जुड़ी योजनाओं और जनता के लिए कल्याणकारी योजनाओं को लागू करें, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर लोग उनके किए वादों पर विश्वास दिखा सकें।

मायावती ने कहा कि लोकसभा चुनावों के नज़दीक आते ही राहुल द्वारा किए जा रहे ‘न्यूनतम आय’ के लिए वादे, लोगों को हैरान भी कर रहे हैं और उनके मन में सवालों को भी खड़ा कर रहे हैं।

मायावती ने राहुल के इस वादे पर सवाल उठाया कि ग़रीब को न्यूनतम आय देने का वादा, कॉन्ग्रेस के ‘ग़रीबी हटाओ’ और बीजेपी के ‘अच्छे दिन’ जैसा ही मज़ाक तो नहीं है।

उन्होंने कहा कि चुनावी वादों पर अगर बात करें तो पता चलेगा कि बीजेपी और कॉन्ग्रेस दोनों ही इन्हें पूरा करने में असफल रहे हैं। मायावती का कहना है कि जनता ने पिछले 72 सालों में बीजेपी और कॉन्ग्रेस दोनों को अपनाकर देख लिया है। इसलिए उन्होंने जनता से बीएसपी की ओर से अपील करते हुए कहा कि वो एक बार उनकी  पार्टी पर विश्वास दिखाएँ जो अपने वादों को पूरा करने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -