Homeराजनीतिराष्ट्रहित और विदेश नीति के मामले में दलगत राजनीति की परवाह नहीं: मोदी की...

राष्ट्रहित और विदेश नीति के मामले में दलगत राजनीति की परवाह नहीं: मोदी की तारीफ़ पर कॉन्ग्रेस नेता

प्रधानमंत्री मोदी को 'Howdy Modi' की सफलता पर शुभकामनाएँ देते हुए देवड़ा ने भारत की 'सॉफ़्ट-पावर' कूटनीति में इस मौके पर उनके भाषण को अभूतपूर्व बताया था।

मुंबई कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद मिलिंद देवड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ पर अपनी आलोचना करने वालों पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि उनके पिता मुरली देवड़ा ने हमेशा देशहित को दलगत राजनीति से ऊपर रखा, और वे भी राष्ट्रहित और विदेश नीति के मामले में दलगत राजनीति की परवाह नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि वे अपने पिता के ही पुत्र हैं, और वे राजनीतिक ध्रुवीकरण के बढ़ते जाने पर भी अपने मूल सिद्धांतों के साथ समझौता नहीं करेंगे। वे उन अटकलों का जवाब दे रहे थे, जो मोदी की तारीफ के बाद उनके भाजपा में शामिल होने को लेकर लगाई जा रही थीं। मिलिंद देवड़ा ने दावा यह भी किया था कि उनके डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों ही पार्टियों के मित्र भारत की 21वीं सदी में बढ़ती नेतृत्व क्षमता का लोहा मानने लगे हैं।

मोदी ने किया था रीट्वीट

प्रधानमंत्री मोदी को ‘Howdy Modi’ की सफलता पर शुभकामनाएँ देते हुए देवड़ा ने भारत की ‘सॉफ़्ट-पावर’ कूटनीति में इस मौके पर उनके भाषण को अभूतपूर्व बताया था। देवड़ा ने इस मौके पर अपने पिता और मुंबई के पूर्व मेयर मुरली देवड़ा को भी “भारत-अमेरिका रिश्तों के प्रारम्भिक वास्तुकारों में से एक” बताया। उनके ट्वीट के जवाब में मोदी ने भी उन्हें धन्यवाद देते हुए कहा कि मुरली देवड़ा भारत-अमेरिका संबंधों में मज़बूती देख कर बहुत खुश होते

इसके बाद खेल एवं युवा मामलों के राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी मुरली देवड़ा को उनकी “परिपक्व और ईमानदार राजनीतिक टिप्पणी” के लिए बधाई दी। इसके जवाब में देवड़ा ने कहा कि वे हमेशा से विदेश नीति और दलगत राजनीति को अलग-अलग रखने का समर्थन करते रहे हैं।

इसके बाद न केवल ट्विटर पर ट्रोलों ने मिलिंद देवड़ा पर तंज़ कसने शुरू कर दिए, बल्कि मीडिया सूत्रों के हवाले से कॉन्ग्रेस आलाकमान में भी उनके इस कदम से नाराज़गी फ़ैलने की खबरें बनाई गईं। इसी के बाद देवड़ा ने यह बयान जारी कर भाजपा में शामिल होने की अटकलों पर विराम लगाया।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।

संभल की डेमोग्राफी: हिंदू 13 हजार से हुए 47 हजार, मुस्लिम 23 हजार से हो गए 1 लाख 71 हजार – मुस्लिम भीड़ की...

2011 की जनगणना के अनुसार संभल शहर की डेमोग्राफी 77.67% मुस्लिम आबादी जबकि हिंदू आबादी सिर्फ 22% वाली बताई गई है। वर्तमान में मुस्लिम 80% तक।
- विज्ञापन -