पवार क्या कहते हैं यह समझने के लिए 100 जन्म लेने पड़ेंगे: शिवसेना

"क्या गलत है कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पवार की तारीफ कर दी? इससे पहले मोदी ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि पवार उनके राजनीतिक गुरु हैं। इसलिए इसमें कोई राजनीति न देखें।"

महाराष्ट्र में भाजपा से गठबंधन तोड़ने के बाद सरकार बनाने के लिए एनसीपी का मुँह ताक रही शिवसेना के नेता संजय राउत ने शरद पवार को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शिवसेना से राज्यसभा सांसद संजय राउत ने दिल्ली स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा था कि “पवार क्या कहते हैं यह समझने के लिए 100 जन्म लेने पड़ेंगे।”

दरअसल राउत ने ऐसा तब कहा जब उनसे महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर शरद पवार के यू-टर्न लेने पर सवाल पूछा गया। बता दें कि महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए शिवसेना के एनसीपी से गठबंधन की भी खबर सामने आई थी। मगर इस पर एनसीपी ने खुद सोनिया गाँधी और उनकी पार्टी का मुँह ताकना शुरू कर दिया।

राउत ने आगे कहा, “आपको पवार और हमारे गठबंधन को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं। दिसंबर की शुरुआत में महाराष्ट्र में शिवसेना की एक स्थिर सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि सरकार गठन को लेकर शिवसेना को किसी भी तरह का कोई संदेह नहीं है, उलटे उन्होंने मीडिया पर ही संदेह पैदा करने का आरोप लगाया। राउत ने बातचीत के दौरान यह भी बताया कि महाराष्ट्र के किसानों के मुद्दों पर एनसीपी अध्यक्ष से उनकी चर्चा भी हुई थी। वहीं नरेंद्र मोदी और पवार को लेकर राउत ने कहा, “क्या गलत है कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पवार की तारीफ कर दी? इससे पहले मोदी ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि पवार उनके राजनीतिक गुरु हैं। इसलिए इसमें कोई राजनीति न देखें।”

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सोमवार को एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मिलने पहुँचे थे। दोनों पार्टियों के अध्यक्षों की इस मुलाक़ात की बाद महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर अटकलें तेज़ हो गई थीं। मगर इसके बावजूद उन्होने राज्य में शिवसेना को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने जैसी किसी भी बात को लेकर कुछ कहा तक नहीं।

बता दें कि 288 सीट वाली महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में 105 सीट के साथ भाजपा ने सबसे बड़े दल के रूप जीत दर्ज की थी मगर सरकार बनाने के लिए ज़रूरी बहुमत नहीं जुटा पाई थी। वहीं भाजपा के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन के साथ इस चुनाव में उतरी शिवसेना को कुल 56 सीटें मिली थीं। जबकि एनसीपी को 44 और कॉन्ग्रेस को कुल 4 सीट मिली थीं। इसके बाद भाजपा और शिवसेना के बीच उद्धव ठाकरे के 50-50 प्लान पर मतभेद गहरा गए थे।इसके बाद ही शिवसेना ने भाजपा को समर्थन न देने का ऐलान कर दिया था।

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