Wednesday, August 4, 2021
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‘दिल्ली में बेड और ऑक्सीजन पर्याप्त, लॉकडाउन के आसार नहीं’: NDTV पर दावा करने के बाद CM केजरीवाल ने टेके घुटने

केजरीवाल ने एक सप्ताह पहले कहा था कि ऑक्सीजन या बेड्स की कमी से लोगों की मौत की स्थिति दिल्ली में वो नहीं आने देंगे। लॉकडाउन लगाने की स्थिति उन्हें नजर नहीं आ रही। ध्यान देने वाली बात ये है कि इस इंटरव्यू के अगले ही हफ्ते दिल्ली में पूर्ण लॉकडाउन लगा दिया गया।

हाल ही में एक आरटीआई से यह बात सामने आई थी कि 2015-19 के बीच दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार ने कोई नया अस्पताल नहीं बनाया। जैसा कि हम जानते हैं 2020 में पूरी दुनिया कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गई। 20 अप्रैल 2021 को ही दिल्ली हाई कोर्ट ने माना कि बीते साल लॉकडाउन के दौरान आप सरकार प्रवासी और दिहाड़ी मजदूरों को मदद पहुँचाने में नाकाम रही। हमने यह भी देखा है कि पिछले साल संक्रमण की शुरुआत में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल रोजाना प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़े-बड़े दावे करते रहे और दिल्ली में हालात बदतर होते रहे। आखिर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मोर्चा सँभालना पड़ा था और उसके बाद हालात काबू में आए थे।

अब एक बार फिर से दिल्ली में वही सब दोहराया जा रहा है। मात्र एक सप्ताह में काफी कुछ बदल गया है। AAP सरकार की भाषा बदल गई है। राज्य में कोरोना के कारण हाहाकार की स्थिति है। नेताओं के सुर बदल गए हैं। 20 अप्रैल को दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर केजरीवाल ने ट्वीट किया, जबकि ज्यादा दिन नहीं बीते जब वे दिल्ली के अस्पतालों में बेड खाली होने और पर्याप्त ऑक्सीजन होने के दावे कर रहे थे। इसके बाद संक्रमण चेन तोड़ने के नाम पर वे पहले नाइट कर्फ्यू लेकर आए। उसके बाद वीकेंड कर्फ्यू और अब 26 अप्रैल की सुबह 5 बजे तक का लॉकडाउन। लॉकडाउन के ऐलान के बाद घर वापसी के लिए प्रवासी मजदूरों की पिछले साल जैसी होड़ ही देखने को मिली। और अब अस्पताल भी उसी पुराने संकट से जूझ रहे हैं, लेकिन केजरीवाल सरकार क्रेडिट लेने का कोई मौका चूक नहीं रही।

ऐसे में एक सप्ताह पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जो बातें कही थीं, वो सुनने लायक है। तब दिल्ली में सब ठीक होने का दावा करने वाले AAP सुप्रीमो ने अब हॉस्पिटल बेड्स और ऑक्सीजन सप्लाई की जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर डाल कर खुद को ट्वीट करने तक ही सीमित रखा है।

अप्रैल 15, 2021 को उन्होंने NDTV को दिए गए इंटरव्यू में दावा किया था कि दिल्ली में 500 के करीब ICU उपलब्ध हैं और दिल्ली सरकार के एप पर जाकर देखा जा सकता है कि किस अस्पताल में कितने बेड्स उपलब्ध हैं। उन्होंने तब 5000 बेड्स उपलब्ध होने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि कुछ ही अस्पतालों में बेड ख़त्म हुए हैं, दिल्ली में नहीं। उन्होंने स्थिति के दैनिक मॉनिटरिंग की बात करते हुए कहा था कि वे लॉकडाउन के खिलाफ हैं।

दिल्ली सरकार के एप की अब क्या हालत है, ये छिपी नहीं है। केजरीवाल के दावों के बाद जब एप पर चेक कर अस्पतालों को फोन कॉल किया गया तो स्थिति कुछ और ही निकली। जिन अस्पतालों में एप पर दर्जनों बेड्स खाली दिख रहे थे, वहाँ से कहा गया कि यहाँ एक भी मरीज को भर्ती करने लायक जगह नहीं है। कहीं-कहीं कहा गया कि स्थिति पल-पल बदलती रहती है। फिर उस एप का फायदा ही क्या?

केजरीवाल ने एक सप्ताह पहले कहा था कि ऑक्सीजन या बेड्स की कमी से लोगों की मौत की स्थिति दिल्ली में वो नहीं आने देंगे। लॉकडाउन लगाने की स्थिति उन्हें नजर नहीं आ रही। ध्यान देने वाली बात ये है कि इस इंटरव्यू के अगले ही हफ्ते दिल्ली में पूर्ण लॉकडाउन लगा दिया गया।

दिल्ली में पिछले 1 दिन में कोरोना के 28,395 नए मामले सामने आए हैं, जबकि केजरीवाल ने जिस दिन ये बयान दिए थे तब ये आँकड़ा 17,000 के करीब था। उस दिन जहाँ कोरोना ने 115 लोगों की जान ली है, पिछले 1 दिन में ये आँकड़ा लगभग ढाई गुना बढ़ कर 277 हो गया है। हाँ, उलटा टीकाकरण की संख्या में कमी आई है। पिछले 1 दिन में जिनका भी टेस्ट किया गया, उनमें से एक तिहाई कोरोना संक्रमित निकले हैं।

अब उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया कह रहे हैं कि ऑक्सीजन को लेकर सब अस्पतालों से SOS फ़ोन आ रहे हैं और सप्लाई करने वाले लोगों को अलग-अलग राज्यों में रोक दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन की सप्लाई को लेकर राज्यों के बीच जंगलराज न हो, इसके लिए केंद्र सरकार को बेहद संवेदनशील और सक्रिय रहना होगा। केजरीवाल कह रहे हैं कि दिल्ली में कुछ ही घंटों का ऑक्सीजन बचा है।

जहाँ पहले ऑक्सीजन और बेड्स की कमी वाली स्थिति न आने की बातें इन्हीं लोगों द्वारा की जा रही थी, अब दूसरे राज्यों पर दोष मढ़ने से पहले AAP को उन किसान प्रदर्शनकारियों की निंदा करनी चाहिए, जिनकी वजह से ऑक्सीजन की सप्लाई रुक रही है। सप्लायर कंपनी ने स्पष्ट कहा है कि सीमा पर बैठे किसान आंदोलनकारियों की वजह से घंटों की देरी हो रही, क्योंकि 100 किलोमीटर ज्यादा चक्कर काटने पड़ रहे।

एक सप्ताह पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा था, “दिल्ली के अस्पतालों में इस वक्त पर्याप्त बेड्स मौजूद हैं। जनता से मेरी अपील है कि घबराएँ नहीं, हो सकता है कि किसी को उसकी पसंद का अस्पताल शायद ना मिले लेकिन किसी और अस्पताल में बेड और इलाज ज़रूर मिलेगा।” अब दिल्ली में न बेड है और न ऑक्सीजन। केंद्र से ऑक्सीजन माँगी जा रही है। क्या सरकार एक सप्ताह आगे का भी अनुमान नहीं लगा सकी?

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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