Tuesday, October 19, 2021
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‘वास्तविक परेशानियों’ से कॉन्ग्रेस ने मोदी विरोधी राष्ट्र मंच से किया किनारा, अठावले ने कहा- ये कुछ भी कर लें मोदी रहेंगे नंबर-1

"आजकल चुनाव पार्टियों के बस का नहीं रहा क्योंकि वे बपौती वाली राजनीति करते हैं। कुछ कंपनियाँ हैं जो चुनाव लड़ने में मदद करने का काम करती हैं। उनको अपना बिजनेस चलाना है। वे सबको प्रधानमंत्री बनाने का कार्यक्रम चलाएँगे तभी पैसा कमाएँगे, नहीं तो पैसा कैसे कमाएँगे।"

नेशनल कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार के आवास पर मंगलवार (22 जून) को राष्ट्र मंच की बैठक में 8 दलों के नेता शामिल हुए। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बैठक के लिए यशवंत सिन्हा ने ही एनसीपी सुप्रीमो से अनुरोध किया था। सहमति मिलने पर कॉन्ग्रेस समेत तमाम दलों को आमंत्रित किया गया। लेकिन, बैठक के लिए बुलाए जाने के बावजूद कॉन्ग्रेस के कई नेता इसमें शामिल नहीं हुए।

कौन-कौन हुआ बैठक में शामिल

जानकारी के मुताबिक आज इस बैठक में टीएमसी नेता यशवंत सिन्हा, गीतकार जावेद अख्तर, राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के अध्यक्ष जयंत चौधरी, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला, पूर्व जेडीयू नेता पवन वर्मा, सीपीआई सांसद बिनॉय विश्वम, टीएमसी नेता मजीद मेमन, सपा नेता घनश्याम चौधरी तथा अन्य नेता शामिल हुए।

बैठक के बाद टीएमसी नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि राष्ट्र मंच की बैठक ढाई घंटे तक चली और इसमें कई मुद्दों को लेकर चर्चा हुई। वहीं, आरएलडी अध्यक्ष जयंत चौधरी ने बताया कि बैठक में किसानों के मुद्दे, अर्थव्यवस्था तथा अन्य राष्टव्यापी मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि किसान राजनीति हमेशा असरदार रही है, देश की राजनीति में जब-जब परिवर्तन आए हैं, उनमें किसानों की अहम भूमिका रही है। 

सपा नेता घनश्याम तिवारी ने कहा, “राष्ट्र मंच एक ‘मंच’ होगा जिसमें देश के विकास और भविष्य के लिए दृष्टि रखने वाला हर कोई शामिल होगा, चाहे वह राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन या व्यक्ति हो। राष्ट्र मंच में भारत और विदेशों में वे लोग भी शामिल होंगे जो देश के बारे में सोचते हैं।”

कॉन्ग्रेस नेता नहीं हुए शामिल

एनसीपी नेता मजीद मेमन ने बताया कि इस बैठक के लिए कॉन्ग्रेस नेता विवेक तंखा, मनीष तिवारी, कपिल सिब्बल, डॉ अभिषेक मनु सिंघवी और शत्रुघ्न सिन्हा को निमंत्रण भेजा गया था। लेकिन उनमें से कई के पास वास्तविक परेशानियाँ थी।

मेनन कहते हैं, “ऐसा माना गया कि विपक्षी दलों की बैठक में कॉन्ग्रेस का बहिष्कार हो रहा है। ये बात गलत है। किसी पार्टी को नहीं निकाला गया है। हमने उन सभी नेताओं को निमंत्रण भेजा जो राष्ट्र मंच की विचारधारा को मानते हैं जिसमें सब राजीनितिक पार्टियाँ आ गई। कोई राजनीतिक भेदभाव नहीं। मैंने खुद व्यक्तिगत तौर पर कॉन्ग्रेस नेताओं को बुलाया था।”

मजीद मेमेन ने बताया कि मीडिया में जो बातें चल रही थीं कि शरद पवार कोई बड़ा कदम उठाने वाले हैं और कॉन्ग्रेस का बहिष्कार हो रहा है, वो सब गलत बात हैं। इसके अलावा जो मीडिया ने कहा कि राष्ट्र मंच भाजपा विरोधी पार्टियों को इकट्ठा कर रही है। ये भी गलत है। ये मीटिंग पवार के आवास पर हुई लेकिन मीटिग उन्होंने नहीं बुलाई थी।

पीएम मोदी रहेंगे नंबर 1-रामदास अठावले

बता दें कि एक ओर जहाँ शरद पवार के दिल्ली स्थित आवास पर विपक्षी दलों की बैठक हुई। वहीं भाजपा नेताओं ने इस पर अपनी राय दी। रामदास अठावले ने कहा कि कोई फर्क नहीं पड़ता चाहे जितने दल पीएम मोदी के विरोध में बना दिए जाएँ लेकिन वो हमेशा नंबर वन रहेंगे। 

वहीं भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी से जब इस बैठक पर पूछा गया तो उन्होंने कहा इस तरह के घटनाक्रम हर उन नेताओं के द्वारा किए जाते हैं जिनको जनता ने बार बार नकारा है। ये कोई नई बात नहीं है। ये 2014 से पहले भी हुए हैं उसके बाद भी हुए हैं। 2019 के बाद भी हुए हैं।

उन्होंने कहा कि आजकल चुनाव पार्टियों के बस का नहीं रहा क्योंकि वे बपौती वाली राजनीति करते हैं। कुछ कंपनियाँ हैं जो चुनाव लड़ने में मदद करने का काम करती हैं। उनको अपना बिजनेस चलाना है। वे सबको प्रधानमंत्री बनाने का कार्यक्रम चलाएँगे तभी पैसा कमाएँगे, नहीं तो पैसा कैसे कमाएँगे।

गौरतलब है कि एनसीपी प्रमुख के आवास पर हुई इस बैठक से पहले मीडिया में ऐसी चर्चा थी कि ये चर्चा 2024 में पीएम मोदी के ख़िलाफ़ विपक्ष को इकट्ठा करने का एक प्रयास है। जिसे चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से मुलाकात होने के बाद पवार ने बुलाया है।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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