Thursday, July 25, 2024
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‘खुले में नमाज’ बर्दाश्त से बाहर: CM खट्टर ने कहा- इसे न बनाएँ शक्ति प्रदर्शन का जरिया

सीएम खट्टर ने कहा, "नमाज को नमाज की तरह होना चाहिए। कुछ लोग इसे शक्ति प्रदर्शन का जरिया बना रहे हैं। अगर कोई सार्वजनिक स्थल पर पूजा करना चाहता है तो वो ये काम प्रशासन से बात करके कर सकता है। ऐसे आयोजनों के लिए कुछ नियम हैं जो हर धर्म के लिए एक हैं।"

गुरुग्राम में ‘खुले में नमाज’ पढ़ने के मामले पर हरियाणा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपना फिर बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग नमाज पढ़ने को शक्ति प्रदर्शन का जरिया बना रहे हैं। दिल्ली में महिला पत्रकारों से बात करते हुए सीएम खट्टर ने अपनी यह टिप्पणी की।

वह बोले, “नमाज को नमाज की तरह होना चाहिए। कुछ लोग इसे शक्ति प्रदर्शन का जरिया बना रहे हैं। अगर कोई सार्वजनिक स्थल पर पूजा करना चाहता है तो वो ये काम प्रशासन से बात करके कर सकता है। ऐसे आयोजनों के लिए कुछ नियम हैं जो हर धर्म के लिए एक हैं।”

बता दें कि सीएम खट्टर ने इससे पहले बयान दिया था कि खुले में नमाज पढ़ना किसी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकेगा। इसी के साथ गुरुग्राम प्रशासन ने 37 निर्धारित स्थलों में से 8 पर नमाज अदा करने की अनुमति को वापस ले लिया था। जिला प्रशासन के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, स्थानीय लोगों और आरडब्ल्यूए की आपत्ति के बाद अनुमति रद्द कर दी गई थी।

इससे पहले सीएम ने कहा था “सभी धर्मों के लोग मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्चों जैसी धार्मिक जगहों पर ही प्रार्थना करते हैं। इसके अलावा सभी बड़े त्योहारों के मौके पर खुले में प्रार्थना की अनुमति दी जाती है। लेकिन ताकत का प्रदर्शन करना जो दूसरे समुदाय की भावनाओं को भड़काता है, उचित नहीं है।” मुख्यमंत्री के मुताबिक, किसी को भी खुले इस तरह के आयोजन नहीं करने चाहिए। यह हम सब जिम्मेदारी है कि शांतिपूर्ण माहौल बना रहे।

10 दिसंबर को भी सीएम ने सख्त हिदायत देते हुए कहा था कि खुले में नमाज की प्रथा को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि खुले में नमाज किसी भी हाल में नहीं होना चाहिए। खट्टर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा था, “हमने यहाँ पुलिस को भी कहा है और डिप्टी कमिश्नर को भी कहा है। इस विषय का समाधान निकालना है। कोई अपनी जगह पर नमाज़ पढ़े या पूजा-पाठ करे, इससे हमें कोई दिक्क्त नहीं है। धार्मिक स्थल इसीलिए बने होते हैं। खुले में ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं होना चाहिए। ये नमाज़ पढ़ने की जो प्रथा यहाँ खुले में शुरू की गई है, वो कतई सहन नहीं की जाएगी। सबके साथ बैठकर इसका समाधान निकाला जाएगा।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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