Monday, May 20, 2024
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संविधान दिवस पर PM मोदी ने की एक राष्ट्र और एक चुनाव पर बात, कहा- ये केवल विमर्श का नहीं बल्कि देश की जरूरत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संबोधन में एक राष्ट्र और एक चुनाव पर बात की। उन्होंने कहा कि यह केवल विमर्श का विषय नहीं है बल्कि देश की जरूरत है। इससे विकासात्मक कार्य बाधित होता है, जिसके बारे में सब जानते हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा, विधानसभा और अन्य चुनावों के लिए एक लिस्ट का इस्तेमाल होना चाहिए।

संविधान दिवस के मौके पर आज (नवंबर 26, 2020) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया। उन्होंने गुजरात के केवड़िया में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपना संबोधन देते हुए कई मुद्दों पर राय रखी। इस दौरान उन्होंने 26/11 हमले में मारे गए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही उन सभी सम्मानित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया जिन्होंने संविधान को बनाने में योगदान दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संबोधन में एक राष्ट्र और एक चुनाव (One Nation, One Election) पर बात की। उन्होंने कहा कि यह केवल विमर्श का विषय नहीं है बल्कि देश की जरूरत है। इससे विकासात्मक कार्य बाधित होता है, जिसके बारे में सब जानते हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा, विधानसभा और अन्य चुनावों के लिए एक लिस्ट का इस्तेमाल होना चाहिए। अब क्यों पैसा और समय इन पर बर्बाद कर रहे हैं?

उन्होंने पूर्ण डिजिटाइजेशन पर जोर देते हुए कहा कि आम आदमी के पास हर सदन के कामकाज का डाटा होना चाहिए और देश के हर सदन के पास भी ऐसा डाटा होना चाहिए। उन्होंने इस विषय पर सोचने को कहा कि कैसे युवा विधानसभा की चर्चा में बात कर सकता है।

उन्होंने संविधान और कानून को लेकर भी अपने विचार रखे। पीएम ने कहा कि हमारे यहाँ बड़ी समस्या ये भी रही है कि संवैधानिक और कानूनी भाषा, उस व्यक्ति को समझने में मुश्किल होती है जिसके लिए वो कानून बना है। मुश्किल शब्द, लंबी-लंबी लाइनें, बड़े-बड़े पैराग्राफ, क्लॉज-सब क्लॉज, यानि जाने-अनजाने एक मुश्किल जाल बन जाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे कानूनों की भाषा इतनी आसान होनी चाहिए कि सामान्य से सामान्य व्यक्ति भी उसको समझ सके। हम भारत के लोगों ने ये संविधान खुद को दिया है। इसलिए इसके तहत लिए गए हर फैसले, हर कानून से सामान्य नागरिक सीधा कनेक्ट महसूस करे, ये सुनिश्चित करना होगा।”

उन्होंने बताया कि समय के साथ जो कानून अपना महत्व खो चुके हैं, उनको हटाने की प्रक्रिया भी आसान होनी चाहिए। बीते सालों में ऐसे सैकड़ों कानून हटाए जा चुके हैं।

इस संबोधन की शुरुआत में पीएम मोदी ने संविधान दिवस पर अधिकारियों की अध्यक्षता पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा आप सभी कानूनविद के रूप में, लोगों और राष्ट्र के बीच एक महत्तवपूर्ण कड़ी हैं। आप कार्यकारी, न्यायपालिका और विधायिका के बीच समन्वय को बेहतर बनाने में महत्तवपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

अपनी बात रखते हुए पीएम ने डॉ राजेंद्र प्रसाद और बाबा अंबेडकर से लेकर सभा के सभी व्यक्तियों को नमन किया और इस दिन को महात्मा गाँधी की प्रेरणा और सरदार पटेल की प्रतिबद्धता को प्रणाम करने का दिन बताया। उन्होंने 26/11 में मारे गए जवानों को याद करते हुए आज आतंकी साजिश नाकाम करने के लिए सुरक्षाबल का वंदन किया।

आगे वैश्विक महामारी के समय में किस प्रकार जनता ने परिपक्वता का परिचय दिया, उसके लिए भी पीएम ने भारतीय संविधान के तीनों के अंगों को श्रेय दिया और कहा कि भारतीयों का संविधान के तीनों अंगों पर पूर्ण विश्वास है। इस विश्वास को बढ़ाने के लिए निरंतर काम भी हुआ है।

वे बोले, “हमारे निर्णय का आधार एक ही मानदंड होना चाहिए और वो है राष्ट्रहित। राष्ट्रहित ही हमारा तराजू होना चाहिए। हमें ये याद रखना है कि जब विचारों में देशहित और लोकहित की बजाय राजनीति हावी होती है तो उसका नुकसान देश को उठाना पड़ता है।”

इस मौके पर पीएम मोदी ने सरदार सरोवर डैम पर बात की और कहा कि केवड़िया प्रवास के दौरान आपने विशालता देखी है, भव्यता देखी है, उसकी शक्ति देखी है। लेकिन इस डैम का काम बरसों तक अटका रहा। आजादी के कुछ वर्षों बाद शुरु हुआ था, अभी कुछ वर्ष पहले ये पूरा हुआ। जनहित का ये प्रोजेक्ट लंबे समय तक अटका रहा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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