Wednesday, June 19, 2024
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उत्तराखंड की ‘घोडा लाइब्रेरी’ से लेकर राजस्थान में 30000 साँपों को बचाने वाले व्यक्ति तक, ‘मन की बात’ में PM मोदी ने बताई सच्ची कहानियाँ, बोले – देखने जाइए हेरिटेज साइट्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान शास्त्रों में वर्णित 'जीवेषु करुणा चापि, मैत्री तेषु विधीयताम्' की भी याद दिलाई। अर्थात्, जीवों पर करुणा कीजिए और उन्हें अपना मित्र बनाइए। उन्होंने ध्यान दिलाया कि हमारे तो ज्यादातर देवी-देवताओं की सवारी ही पशु-पक्षी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (24 सितंबर, 2023) को देश से मन की बात के 105वें एपिसोड में कहा कि उन्हें देश की सफलता को, देशवासियों की सफलता को, उनके प्रेरणा देने वाले जीवन को जनता से साझा करने का मौका मिला है। उन्होंने इसकी शुरुआत करते हुए कहा की इन दिनों सबसे अधिक पत्र और संदेश उन्हें 2 विषयों पर सबसे अधिक मिले हैं। पहला विषय चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग और दूसरा विषय दिल्ली में G20 का सफल आयोजन है।

पीएम ने कहा कि कहा कि जब चंद्रयान-3 का लैंडर चंद्रमा पर उतरने वाला था, तब करोड़ों लोग अलग-अलग माध्यमों के जरिए एक साथ इस घटना के पल-पल के साक्षी बन रहे थे। इसरो के यू ट्यूब लाइव चैनल पर 80 लाख से अधिक लोगों ने इसे देखा, ये अपने आप में ही एक रिकॉर्ड है। इससे पता चलता है कि चंद्रयान-3 से करोड़ों भारतीयों का कितना गहरा लगाव है।

उन्होंने कहा कि चंद्रयान की इस सफलता पर देश में इन दिनों एक बहुत ही शानदार Quiz Competition भी चल रहा है, प्रश्नस्पर्धा, और उसे नाम दिया गया है –‘चंद्रयान-3 महाक्विज’। उन्होंने जानकारी दी कि MyGov पोर्टल पर हो रही इस प्रतियोगिता में अब तक 15 लाख से ज्यादा लोग हिस्सा ले चुके हैं। MyGov की शुरुआत के बाद यह किसी भी क्विज में सबसे बड़ी भागीदारी है। उन्होंने अपील की कि अगर आपने अब तक इसमें हिस्सा नहीं लिया है तो अब देर मत करिए, अभी इसमें 6 दिन और बचे हैं।

पीएम मोदी ने देशवासियों को ‘मेरे परिवारजनों’ कह कर संबोधित करते हुए कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता के बाद G20 के शानदार आयोजन ने हर भारतीय की खुशी को दोगुना कर दिया। ‘भारत मंडपम’ तो अपने आप में एक सेलेब्रिटी की तरह हो गया है। लोग उसके साथ सेल्फी खिंचा रहे हैं और गर्व से पोस्ट भी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत ने इस समिट में अफ्रीकन यूनियन को G20 में स्थायी सदस्य बनाकर अपने नेतृत्व का लोहा मनवाया है।

उन्होंने कहा, “आपको ध्यान होगा, जब भारत बहुत समृद्ध था, उस ज़माने में, हमारे देश में, और दुनिया में, सिल्क रूट की बहुत चर्चा होती थी। ये सिल्क रूट, व्यापार-कारोबार का बहुत बड़ा माध्यम था। अब आधुनिक ज़माने में भारत ने एक और आर्थिक कॉरिडोर, G20 में सुझाया है। ये है India-Middle East-Europe Economic Corridor. ये कॉरिडोर आने वाले सैकड़ों वर्षों तक विश्व व्यापार का आधार बनने जा रहा है, और इतिहास इस बात को हमेशा याद रखेगा कि इस कॉरिडोर का सूत्रपात भारत की धरती पर हुआ था। G20 के दौरान जिस तरह भारत की युवाशक्ति, इस आयोजन से जुड़ी, उसकी आज, विशेष चर्चा आवश्यक है। साल-भर तक देश के अनेकों विश्वविद्यालयों में G20 से जुड़े कार्यक्रम हुए। अब इसी श्रृंखला में दिल्ली में एक और रोचक कार्यक्रम होने जा रहा है –’G20 University Connect Programme’. इस कार्यक्रम के माध्यम से देश-भर के लाखों विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी एक-दूसरे से जुड़ेंगे।”

पीएम मोदी ने बताय कि इसमें IITs, IIMs, NITs और मेडिकल कॉलेजों जैसे कई प्रतिष्ठित संस्थान भी भाग लेंगे। उन्होंने अपील की कि अगर आप कॉलेज छात्र हैं, तो, 26 सितम्बर को होने वाले इस कार्यक्रम को ज़रूर देखें, इससे ज़रूर जुड़ें। पीएम मोदी ने कहा कि भारत के भविष्य में, युवाओं के भविष्य पर, इसमें, बहुत सारी दिलचस्प बातें होने वाली हैं। वो खुद भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। उन्हें भी कॉलेज के छात्रों से संवाद का इंतजार है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “मेरे परिवारजनों, आज से 2 दिन बाद, 27 सितम्बर को ‘विश्व पर्यटन दिवस’ है। पर्यटन को कुछ लोग सिर्फ सैर-सपाटे के तौर पर देखते हैं, लेकिन पर्यटन का एक बहुत बड़ा पहलू रोजगार से जुड़ा है। कहते हैं, सबसे कम निवेश में, सबसे ज्यादा रोजगार, अगर कोई सेक्टर पैदा करता है, तो वो, पर्यटन सेक्टर ही है। पर्यटन सेक्टर को बढ़ाने में, किसी भी देश के लिए गुडविल, उसके प्रति आकर्षण बहुत मायने रखता है। बीते कुछ वर्षों में भारत के प्रति आकर्षण बहुत बढ़ा है और G20 के सफल आयोजन के बाद दुनिया के लोगों की रुचि भारत में और बढ़ गई है। G20 में एक लाख से ज्यादा प्रतिनिधि भारत आए। वो यहाँ की विविधता, अलग-अलग परंपराएँ, भाँति-भाँति का खानपान और हमारी धरोहरों से परिचित हुए। यहाँ आने वाले प्रतिनिधि अपने साथ जो शानदार अनुभव लेकर गए हैं, उससे पर्यटन का और विस्तार होगा।आप लोगों को पता ही है कि भारत में एक से बढ़कर एक वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स भी हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।”

उन्होंने बताया कि कुछ ही दिन पहले शान्ति निकेतन और कर्नाटक के पवित्र होयसड़ा मंदिरों को World Heritage Sites घोषित किया गया है। उन्होंने इस शानदार उपलब्धि के लिए समस्त देशवासियों को बधाई दी। साथ ही याद किया कि उन्हें 2018 में शान्ति निकेतन की यात्रा का सौभाग्य मिला था। उन्होंने ध्यान दिलाया कि शान्ति निकेतन से गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर का जुड़ाव रहा है। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने शान्तिनिकेतन का मोटो संस्कृत के एक प्राचीन श्लोक से लिया था। वह श्लोक है – ‘यत्र विश्वम भवत्येक नीडम्’ अर्थात, जहाँ एक छोटे से घोंसले में पूरा संसार समाहित हो सकता है|

प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में ये जानकारी भी दी कि कर्नाटक के जिन होयसड़ा मंदिरों को UNESCO ने विश्व धरोहर सूची में शामिल किया है, जिन्हें, 13वीं शताब्दी के बेहतरीन आर्किटेक्चर के लिए जाना जाता है। बकौल पीएम मोदी, इन मंदिरों को यूनेस्को से मान्यता मिलना, मंदिर निर्माण की भारतीय परंपरा का भी सम्मान है। भारत में अब वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की कुल संख्या 42 हो गई है।

पीएम मोदी ने बताया कि भारत का प्रयास है कि हमारे ज्यादा-से-ज्यादा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जगहों को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की मान्यता मिले। उन्होंने आग्रह किया कि जब भी आप कहीं घूमने जाने की योजना बनाएँ तो ये प्रयास करें कि भारत की विविधता के दर्शन करें, अलग-अलग राज्यों की संस्कृति को समझें, हेरिटेज साइट्स को देखें। बकौल प्रधानमंत्री, इससे आप अपने देश के गौरवशाली इतिहास से तो परिचित होंगे ही, स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने का भी आप अहम माध्यम बनेंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय संस्कृति और भारतीय संगीत अब वैश्विक हो चुका है। दुनिया भर के लोगों का इनसे लगाव दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है। उन्होंने इस दौरान एक बच्ची का ऑडियो भी सुनाया। पीएम मोदी ने कहा कि इसे सुनकर आप भी हैरान हो गए न! उन्होंने कहा कि कितनी मधुर आवाज है और हर शब्द में जो भाव झलकते हैं, ईश्वर के प्रति इनका लगाव हम अनुभव कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर वो ये सुरीली आवाज जर्मनी की एक बेटी की है, तो शायद आप और अधिक हैरान होंगे। फिर उन्होंने ही जानकारी दी कि इस बिटिया का नाम – कैसमी है। 21 साल की कैसमी इन दिनो इंस्टाग्राम पर खूब छाई हुई है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि जर्मनी की रहने वाली कैसमी कभी भारत नहीं आई है, लेकिन वो भारतीय संगीत की दीवानी है, जिसने, कभी भारत को देखा तक नहीं, उसकी भारतीय संगीत में ये रूचि, बहुत ही प्रेरक है। उन्होंने बताया कि कैसमी जन्म से ही देख नहीं पाती है, लेकिन ये मुश्किल चुनौती उन्हें असाधारण उपलब्धियों से रोक नहीं पाई। संगीत और क्रिएटिविटी को लेकर उनका पैशन कुछ ऐसा था कि बचपन से ही उन्होंने गाना शुरू कर दिया।

पीएम ने बताया कि अफ्रीकन ड्रमिंग की शुरुआत तो उन्होंने महज 3 साल की उम्र में ही कर दी थी। भारतीय संगीत से उनका परिचय 5-6 साल पहले ही हुआ। भारत के संगीत ने उनको इतना मोह लिया, इतना मोह लिया कि वो इसमें पूरी तरह से रम गई। उन्होंने तबला बजाना भी सीखा है। बकौल प्रधानमंत्री, सबसे प्रेरक बात तो यह है कि वे कई सारी भारतीय भाषाओं में गाने में महारत हासिल कर चुकी हैं। संस्कृत, हिंदी, मलयालम, तमिल, कन्नड़ या फिर असमी, बंगाली, मराठी, उर्दू, उन्होंने इन सबमें अपने सुर साधे हैं। पीएम मोदी ने आप कल्पना कर सकते हैं, किसी को दूसरी अनजान भाषा की दो-तीन लाइनें बोलनी पड़ जाए तो कितनी मुश्किल आती है, लेकिन कैसमी के लिए जैसे बाएं हाथ का खेल है। साथ ही उन्होंने कन्नड़ में गाए उनके एक गीत भी शेयर किए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में कहा, “भारतीय संस्कृति और संगीत को लेकर जर्मनी की कैसमी के इस जुनून की मैं ह्रदय से सराहना करता हूँ। उनका यह प्रयास हर भारतीय को अभिभूत करने वाला है। हमारे देश में शिक्षा को हमेशा एक सेवा के रूप में देखा जाता है। मुझे उत्तराखंड के कुछ ऐसे युवाओं के बारे में पता चला है, जो, इसी भावना के साथ बच्चों की शिक्षा के लिए काम कर रहे हैं। नैनीताल जिले में कुछ युवाओं ने बच्चों के लिए अनोखी घोड़ा लाइब्रेरी की शुरुआत की है। इस लाइब्रेरी की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि दुर्गम से दुर्गम इलाकों में भी इसके जरिए बच्चों तक पुस्तकें पहुँच रही हैं और इतना ही नहीं, ये सेवा, बिल्कुल निःशुल्क है। अब तक इसके माध्यम से नैनीताल के 12 गाँवों को कवर किया गया है। बच्चों की शिक्षा से जुड़े इस नेक काम में मदद करने के लिए स्थानीय लोग भी खूब आगे आ रहे हैं। इस घोड़ा लाइब्रेरी के जरिए यह प्रयास किया जा रहा है, कि दूरदराज के गाँवों में रहने वाले बच्चों को स्कूल की किताबों के अलावा कविताएँ, कहानियाँ और नैतिक शिक्षा की किताबें भी पढ़ने का पूरा मौका मिले। ये अनोखी लाइब्रेरी बच्चों को भी खूब भा रही है।”

इस दौरान प्रधानमंत्री ने ये भी याद किया कि हैदराबाद में लाइब्रेरी से जुड़े एक ऐसे ही अनूठे प्रयास के बारे में पता चला। वहाँ 7वीं क्लास में पढ़ने वाली आकर्षणा सतीश महज 11 साल की उम्र में बच्चों के लिए एक-दो नहीं, बल्कि, सात-सात लाइब्रेरी चला रही है। आकर्षणा सतीश को दो साल पहले इसकी प्रेरणा तब मिली, जब वो अपने माता-पिता के साथ एक कैंसर अस्पताल गई थी। उसके पिता जरूरतमंदों की मदद के सिलसिले में वहाँ गए थे। बच्चों ने वहाँ उनसे कलरिंग बुक्स की माँग की, और यही बात उसे इतनी छू गई कि उसने अलग-अलग तरह की किताबें जुटाने की ठान ली। उसने, अपने आस-पड़ोस के घरों, रिश्तेदारों और साथियों से किताबें इकट्ठा करना शुरू कर दिया और पहली Library उसी कैंसर अस्पताल में बच्चों के लिए खोली गई।

प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ के 105वें एपिसोड में बताया कि जरूरतमंद बच्चों के लिए अलग-अलग जगहों पर इस बिटिया ने अब तक जो सात लाइब्रेरी खोली हैं, उनमें अब करीब 6000 किताबें उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि छोटी-सी आकर्षणा जिस तरह बच्चों का भविष्य सँवारने का बड़ा काम कर रही है, वो हर किसी को प्रेरित करने वाला है। पीएम मोदी ने कहा कि ये बात सही है कि आज का दौर डिजिटल टेक्नोलॉजी और ई-बुक्स का है, लेकिन फिर भी किताबें, हमारे जीवन में हमेशा एक अच्छे दोस्त की भूमिका निभाती है। इसलिए, हमें बच्चों को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान शास्त्रों में वर्णित ‘जीवेषु करुणा चापि, मैत्री तेषु विधीयताम्’ की भी याद दिलाई। अर्थात्, जीवों पर करुणा कीजिए और उन्हें अपना मित्र बनाइए। उन्होंने ध्यान दिलाया कि हमारे तो ज्यादातर देवी-देवताओं की सवारी ही पशु-पक्षी हैं। साथ ही इस पर दुःख जताया कि बहुत से लोग मंदिर जाते हैं, भगवान के दर्शन करते हैं, लेकिन जो जीव-जंतु उनकी सवारी होते हैं, उस तरफ़ उतना ध्यान नहीं देते। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये जीव-जंतु हमारी आस्था के केंद्र में तो रहने ही चाहिए, हमें इनका हर संभव संरक्षण भी करना चाहिए।

उन्होंने जानकारी दी कि बीते कुछ वर्षों में, देश में, शेर, बाघ, तेंदुआ और हाथियों की संख्या में उत्साहवर्धक बढ़ोतरी देखी गई है। कई और प्रयास भी निरंतर जारी हैं, ताकि इस धरती पर रह रहे दूसरे जीव-जंतुओं को बचाया जा सके। उन्होंने राजस्थान में हो रहे ऐसे ही एक अनोखे प्रयास के बारे में बताया, जहाँ सुखदेव भट्ट जी और उनकी टीम मिलकर वन्य जीवों को बचाने में जुटे हैं, और उनकी टीम का नाम है – कोबरा।

प्रधानमंत्री ने समझाया कि ये ख़तरनाक नाम इसलिए है, क्योंकि उनकी टीम इस क्षेत्र में खतरनाक साँपों का रेस्क्यू करने का काम भी करती है। इस टीम में बड़ी संख्या में लोग जुड़े हैं, जो सिर्फ एक कॉल पर मौके पर पहुँचते हैं और अपने मिशन में जुट जाते हैं। सुखदेव की इस टीम ने अब तक 30,000 से ज्यादा जहरीले साँपों का जीवन बचाया है। इस प्रयास से जहाँ लोगों का खतरा दूर हुआ है, वहीं प्रकृति का संरक्षण भी हो रहा है। ये टीम अन्य बीमार जानवरों की सेवा के काम से भी जुड़ी हुई है।

साथियों, तमिलनाडु के चेन्नई में Auto Driver एम.राजेंद्र प्रसाद जी भी एक अनोखा काम कर रहे हैं। वो पिछले 25-30 साल से कबूतरों की सेवा के काम में जुटे हैं। खुद उनके घर में 200 से ज्यादा कबूतर हैं। वहीं पक्षियों के भोजन, पानी, स्वास्थ्य जैसी हर जरुरत का पूरा ध्यान रखते हैं। इस पर उनका काफी पैसा भी खर्च होता है, लेकिन वो, अपने काम में डटे हुए हैं। साथियो, लोगों को नेक नीयत से ऐसा काम करते देखकर वाकई बहुत सुकून मिलता है, काफी खुशी होती है। अगर आपको भी ऐसे ही कुछ अनूठे प्रयासों के बारे में जानकारी मिले तो उन्हें जरुर Share कीजिए।

मेरे प्यारे परिवारजनों, आजादी का ये अमृतकाल, देश के लिए हर नागरिक का कर्तव्यकाल भी है। अपने कर्तव्य निभाते हुए ही हम अपने लक्ष्यों को पा सकते हैं, अपनी मंजिल तक पहुँच सकते हैं। कर्तव्य की भावना, हम सभी को एक सूत्र में पिरोती है। यूपी के  सम्भल में, देश ने कर्तव्य भावना की एक ऐसी मिसाल देखी है, जिसे मैं आपसे भी Share करना चाहता हूँ।

आप सोचिए, 70 से ज्यादा गाँव हों, हजारों की आबादी हो और सभी लोग मिलकर, एक लक्ष्य, एक ध्येय की प्राप्ति के लिए साथ आ जाएँ, जुट जाएँ ऐसा कम ही होता है, लेकिन, सम्भल के लोगों ने ये करके दिखाया। इन लोगों ने मिलकर जन-भागीदारी और सामूहिकता की बहुत ही शानदार मिसाल कायम की है। दरअसल, इस क्षेत्र में दशकों पहले, ‘सोत’ नाम की एक नदी हुआ करती थी।

अमरोहा से शुरू होकर सम्भल होते हुए बदायूँ तक बहने वाली ये नदी एक समय इस क्षेत्र में जीवनदायिनी के रूप में जानी जाती थी। इस नदी में अनवरत जल प्रवाहित होता था, जो यहाँ के किसानों के लिए खेती का मुख्य आधार था। समय के साथ नदी का प्रवाह कम हुआ, नदी जिन रास्तों से बहती थी वहां अतिक्रमण हो गया और ये नदी विलुप्त हो गई। नदी को माँ मानने वाले हमारे देश में, सम्भल के लोगों ने इस सोत नदी को भी पुनर्जीवित करने का संकल्प ले लिया।

पिछले साल दिसंबर में सोत नदी के कायाकल्प का काम 70 से ज्यादा ग्राम पंचायतों ने मिलकर शुरू किया। ग्राम पंचायतों के लोगों ने सरकारी विभागों को भी अपने साथ लिया। आपको ये जानकर खुशी होगी कि साल के पहले 6 महीने में ही ये लोग नदी के 100 किलोमीटर से ज्यादा रास्ते का पुनरोद्धार कर चुके थे। जब बारिश का मौसम शुरू हुआ तो यहां के लोगों की मेहनत रंग लाई और सोत नदी, पानी से, लबालब भर गई।

यहाँ के किसानों के लिए यह खुशी का एक बड़ा मौका बनकर आया है। लोगों ने नदी के किनारे बाँस के 10 हजार से भी अधिक पौधे भी लगाए हैं, ताकि इसके किनारे पूरी तरह सुरक्षित रहें। नदी के पानी में तीस हजार से अधिक गम्बूसिया मछलियों को भी छोड़ा गया है ताकि मच्छर न पनपें।साथियो, सोत नदी का उदाहरण हमें बताता है कि अगर हम ठान लें तो बड़ी से बड़ी चुनौतियों को पार कर एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं। आप भी कर्तव्य पथ पर चलते हुए अपने आसपास ऐसे बहुत से बदलावों का माध्यम बन सकते हैं।

मेरे परिवारजनों, जब इरादे अटल हों और कुछ सीखने की लगन हो, तो कोई काम, मुश्किल नहीं रह जाता है। पश्चिम बंगाल की श्रीमती शकुंतला सरदार ने इस बात को बिल्कुल सही साबित करके दिखाया है। आज वो कई दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। शकुंतला जी जंगल महल के शातनाला गांव की रहने वाली हैं। लंबे समय तक उनका परिवार हर रोज मजदूरी करके अपना पेट पालता था। उनके परिवार के लिए गुजर-बसर भी मुश्किल थी।

फिर उन्होंने एक नए रास्ते पर चलने का फैसला किया और सफलता हासिल कर सबको हैरान कर दिया। आप ये जरुर जानना चाहेंगे कि उन्होंने ये कमाल कैसे किया! इसका जवाब है – एक सिलाई मशीन। एक सिलाई मशीन के जरिए उन्होंने ‘साल’ की पत्तियों पर खूबसूरत Design बनाना शुरू किया। उनके इस हुनर ने पूरे परिवार का जीवन बदल दिया। उनके बनाए इस अद्भुत Craft की माँग लगातार बढ़ती जा रही है। शकुंतला जी के इस हुनर ने, न सिर्फ उनका, बल्कि, ‘साल’ की पत्तियों को जमा करने वाले कई लोगों का जीवन भी बदल दिया है।

अब, वो, कई महिलाओं को Training देने का भी काम कर रही हैं। आप कल्पना कर सकते हैं, एक परिवार, जो कभी, मजदूरी पर निर्भर था, अब खुद दूसरों को रोजगार के लिए प्रेरित कर रहा है। उन्होंने रोज की मजदूरी पर निर्भर रहने वाले अपने परिवार को अपने पैरों पर खड़ा कर दिया है। इससे उनके परिवार को अन्य चीजों पर भी Focus करने का अवसर मिला है।

एक बात और हुई है, जैसे ही शकुंतला जी की स्थिति कुछ ठीक हुई, उन्होंने बचत करना भी शुरू कर दिया है। अब वो जीवन बीमा योजनाओं में निवेश करने लगी हैं, ताकि उनके बच्चों का भविष्य भी उज्जवल हो। शकुंतला जी के जज्बे के लिए उनकी जितनी सराहना की जाए वो कम है। भारत के लोग ऐसी ही प्रतिभा से भरे होते हैं – आप, उन्हें अवसर दीजिए और देखिए वे क्या-क्या कमाल कर दिखाते हैं।

मेरे परिवारजनों, दिल्ली में G-20 Summit के दौरान उस दृश्य को भला कौन भूल सकता है, जब कई World Leaders बापू को श्रद्धासुमन अर्पित करने एक साथ राजघाट पहुंचे। यह इस बात का एक बड़ा प्रमाण है कि दुनिया-भर में बापू के विचार आज भी कितने प्रासांगिक है। मुझे इस बात की भी खुशी है कि गांधी जयंती को लेकर पूरे देश में स्वच्छता से सबंधित बहुत सारे कार्यक्रमों का Plan किया गया है। केंद्र सरकार के सभी कार्यालयों में ‘स्वच्छता ही सेवा अभियान’ काफी जोर-शोर से जारी है। Indian Swachhata League में भी काफी अच्छी भागीदारी देखी जा रही है।

आज मैं ‘मन की बात’ के माध्यम से सभी देशवासियों से एक आग्रह भी करना चाहता हूं – 1 अक्टूबर यानि रविवार को सुबह 10 बजे स्वच्छता पर एक बड़ा आयोजन होने जा रहा है। आप भी अपना वक्त निकालकर स्वच्छता के जुड़े इस अभियान में अपना हाथ बटाएँ। आप अपनी गली, आस-पड़ोस, पार्क, नदी, सरोवर या फिर किसी दूसरे सार्वजनिक स्थल पर इस स्वच्छता अभियान से जुड़ सकते हैं और जहाँ-जहाँ अमृत सरोवर बने हैं वहाँ तो स्वच्छता अवश्य करनी है। स्वच्छता की ये कार्यांजलि ही गाँधी जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मैं आपको फिर से याद दिलाना चाहूँगा कि इस गाँधी जयंती के अवसर पर खादी का कोई ना कोई Product ज़रूर ख़रीदें।

मेरे परिवारजनों, हमारे देश में त्योहारों का Season भी शुरू हो चुका है। आप सभी के घर में भी कुछ नया खरीदने की योजना बन रही होगी। कोई इस इंतजार में होगा कि नवरात्र के समय वो अपना शुभ काम शुरू करेगा। उमंग, उत्साह के इस वातावरण में आप Vocal For Local का मंत्र भी जरुर याद रखें। जहाँ तक संभव हो, आप, भारत में बने सामानों की खरीदारी करें, भारतीय Product का उपयोग करें और Made In India सामान का ही उपहार दें। आपकी छोटी सी ख़ुशी, किसी दूसरे के परिवार की बहुत बड़ी ख़ुशी का कारण बनेगी। आप, जो भारतीय सामान खरीदेंगे, उसका सीधा फ़ायदा, हमारे श्रमिकों, कामगारों, शिल्पकारों और अन्य विश्वकर्मा भाई-बहनों को मिलेगा। आजकल तो बहुत सारे Start-Ups भी स्थानीय Products को बढ़ावा दे रहे हैं। आप स्थानीय चीजें खरीदेंगे तो Start-Ups के इन युवाओं को भी फ़ायदा होगा।

पीएम ने अंत में कहा, मेरे प्यारे परिवारजनों, ‘मन की बात’ में बस आज इतना ही। अगली बार जब आपसे ‘मन की बात’ में मिलूँगा तो नवरात्रि और दशहरा बीत चुके होंगे। त्योहारों के इस मौसम में आप भी पूरे उत्साह से हर पर्व मनाएँ, आपके परिवार में खुशियां रहें – मेरी यही कामना है। इन पर्वों की आपको बहुत सारी शुभकामनाएँ। आपसे फिर मुलाकात होगी, और भी नए विषयों के साथ, देशवासियों की नई सफलताओ के साथ।आप, अपने संदेश मुझे ज़रूर भेजते रहिए, अपने अनुभव शेयर करना ना भूलें। मैं प्रतीक्षा करूँगा।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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