Homeराजनीति'हर चोर का मोदी सरनेम क्यों': सूरत की कोर्ट में पेश हुए राहुल गाँधी,...

‘हर चोर का मोदी सरनेम क्यों’: सूरत की कोर्ट में पेश हुए राहुल गाँधी, कहा- कटाक्ष किया था, अब याद नहीं

लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक के कोलार में नीरव मोदी, ललित मोदी और नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए तत्कालीन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने पूछा था कि सभी चोरों के उपनाम मोदी क्यों है?

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी गुजरात के सूरत की एक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश हुए। मामला ‘सारे मोदी चोर’ वाले बयान को लेकर उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मानहानि के मामले से जुड़ा है। राहुल गाँधी ने गुरुवार (24 जून 2021) को इस मामले में अपना बयान दर्ज कराया।

गुजरात के भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी ने यह मामला दर्ज करवाया था। सूरत के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एक हफ्ते पहले राहुल 24 जून को अदालत में मौजूद रहने के निर्देश दिए थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कॉन्ग्रेस नेता ने अदालत को बताया कि उन्होंने चुनाव के दौरान राजनीतिक कटाक्ष किया था। उन्होंने यह बात किसी समाज के लिए नहीं कही थी। साथ ही कहा कि इस मामले में अब उन्हें ज्यादा कुछ याद नहीं है।

अब इस मामले में अगली सुनवाई 12 जुलाई को होगी। सूरत की कोर्ट में पेशी से पहले राहुल गाँधी ने एक ट्वीट किया था। इसमें लिखा था, ”अस्तित्व का पूरा रहस्य यही है कि कोई डर ना हो।”  

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक के कोलार में नीरव मोदी, ललित मोदी और नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए तत्कालीन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने पूछा था कि सभी चोरों के उपनाम मोदी क्यों है? 13 अप्रैल 2019 को उन्होंने कहा था, “नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी इन सभी के नाम में मोदी लगा हुआ है। सभी चोरों के नाम में मोदी क्यों लगा होता है।”

इसके बाद सूरत से भारतीय जनता पार्टी के विधायक पूर्णेश मोदी ने कॉन्ग्रेस नेता के खिलाफ पूरे मोदी समुदाय को बदनाम करने की शिकायत दर्ज कराई थी। पूर्णेश ने अप्रैल 2019 में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत केस दर्ज करवाया था, जो आपराधिक मानहानि से संबंधित है। राहुल अपने विवादित बयानों को लेकर देश भर की विभिन्न अदालतों में मानहानि के कई मामलों का सामना कर रहे हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -