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लंदन यात्रा के लिए राहुल गाँधी ने नहीं ली विदेश मंत्रालय की मंजूरी: रिपोर्ट; वहाँ जाकर कहा था – भारत एक राष्ट्र नहीं

सभी संसद सदस्यों को विदेश यात्रा करने से पहले विदेश मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी लेना अनिवार्य है। यात्रा से कम से कम तीन सप्ताह पहले वेबसाइट पर जानकारी डालकर विदेश मंत्रालय की मंजूरी लेनी होती है।

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) ने इन दिनों ब्रिटेन की यात्रा पर हैं। वह लंदन स्थित कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि भारत में स्थिति ठीक नहीं है। बीजेपी ने देश भर में केरोसिन छिड़क रखा है।

अब इस मामले में जानकारी सामने आई है कि राहुल गाँधी ने बिना राजनीतिक मंजूरी के लंदन की यात्रा की। दरअसल, सभी सांसदों को अपनी विदेश यात्राओं से पहले विदेश मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी लेनी होती है। ‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक राहुल गाँधी ने अपनी हालिया लंदन यात्रा से पहले विदेश मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी के लिए आवेदन नहीं किया था।

अनिवार्य है विदेश मंत्रालय से मँजूरी लेना

गौरतलब है कि सभी संसद सदस्यों को विदेश यात्रा करने से पहले विदेश मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी लेना अनिवार्य है। यात्रा से कम से कम तीन सप्ताह पहले वेबसाइट पर जानकारी डालकर विदेश मंत्रालय की मंजूरी लेनी होती है। लेकिन राहल गाँधी ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया। इसके अलावा सभी सांसदों को विदेश मंत्रालय के माध्यम से विदेशी सरकारों, संस्थानों आदि से निमंत्रण प्राप्त करना होता है। यदि कोई सीधा निमंत्रण मिलता है तो इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय को देनी होती है। इसके बाद उन्हें मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी लेनी होती है। सूत्रों के मुताबिक राहुल गाँधी ने विदेश यात्रा करने से पहले विदेश मंत्रालय की मंजूरी नहीं ली थी।

अपनी इस विदेश यात्रा के दौरान राहुल ने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि भारत अच्छी स्थिति में नहीं है। बीजेपी ने पूरे देश में मिट्टी का तेल फैला दिया है। आपको एक चिंगारी चाहिए और हम बड़ी मुसीबत में पड़ जाएँगे। इसे रोकना विपक्ष की जिम्मेदारी है। कॉन्ग्रेस लोगों, समुदायों, राज्यों और धर्मों को एक साथ लाती है। हमें इस तापमान को कम करने की जरूरत है क्योंकि अगर यह तापमान ठंडा नहीं हुआ तो चीजें गलत हो सकती हैं। 

राहुल गाँधी ने कहा था, “भारत ऐसा देश नहीं बन सकता जिसे बोलने की अनुमति नहीं है। प्रधानमंत्री का रवैया होना चाहिए कि ‘मैं सुनना चाहता हूँ’। लेकिन हमारे प्रधानमंत्री नहीं सुनते। आपके पास ऐसा देश नहीं हो सकता जिसे बोलने की अनुमति नहीं है।”

हालाँकि, ये कोई पहली बार नहीं है जब राहुल गाँधी इस तरह से विदेश दौरे पर गए हों। मौका चाहे नए साल का हो, संसद सत्र का हो, चुनाव का हो या फिर राहुल गाँधी के जन्मदिन का… वो हर बड़े मौके पर विदेश की यात्रा पर होते हैं। पिछले दिनों गृह मंत्री अमित शाह ने वह मौके गिनाए थे, जब गाँधी परिवार के सदस्यों ने एसपीजी का अनादर  किया था। उन्होंने कहा कि 600 बार ऐसे मौके आए जब राहुल गाँधी ने ऐसा किया।

इस संबंध में आँकड़े पेश करते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी ने भारत में यात्रा करने के दौरान 1892 बार एसपीजी के नियमों का उल्लंघन किया जबकि 2015 से अब तक (2019) अपनी विदेश यात्राओं के दौरान उन्होंने 247 बार एसपीजी के नियमों की धज्जियाँ उड़ाईं। इस पर गृहमंत्री शाह ने पूछा कि आखिर यह लोग अपनी विदेश यात्राओं की जानकारी इतना छिपाते क्यों हैं?

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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