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जैसा जंगलराज वाला शहाबुद्दीन, वैसा ही RJD का लालटेन लेने वाला ओसामा शहाब: अब्बा विरोधियों को तेजाब से नहलाता था, बेटा फायरिंग से लेकर वसूली तक का सरताज

शहाबुद्दीन के आपराधिक जीवन का साया उसके बेटे ओसामा शहाब पर भी पढ़ा। पिछले साल 2024 में ही ओसामा जेल से बाहर निकला था। ओसामा पर जमीन विवाद, वसूली और फायरिंग से लेकर कई आपराधिक मामलें हैं। उसे राजस्थान से लेकर बिहार पुलिस तक गिरफ्तार कर चुकी है।

मोहम्मद शहाबुद्दीन का नाम तो आप जानते ही होंगे, वहीं शहाबुद्दीन जो बीच सड़क पर विरोधियों को तेजाब से नेहलाकर मार देता था। लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद ने उसी शहाबुद्दीन के बेटे को रघुनाथपुर सीट से विधानसभा चुनाव का उम्मीदवार बनाया है।

वही ओसामा, जो सीवान में गुंडाराज फैलाने वाले मोहम्मद शहाबुद्दीन का बेटा है। शहाबुद्दीन सीवान का पूर्व सांसद था। 90 के दशक में और 21वीं सदी की शुरुआत में सीवान में वो ऐसा नाम था, जो अपराध और राजनीति की सीमाओं को धुँधला कर देता था। आज भी सीवान के कई लोग उसके खौफ में जीवन जी रहे हैं। उसी शहाबुद्दीन का बेटा ओसामा अब अपने अब्बा के गुंडाराज को रघुनाथपुर में फैलाने के लिए वापस आया है,और उसको RJD ने टिकट देकर अपनी भूमिका भी तय कर ली है।

कौन है शहाबुद्दीन ?

मोहम्मद सैयद शहाबुद्दीन सीवान शहर से पूर्व सांसद था। 90 के दशक में और 21वीं सदी की शुरुआत में उसने शहर में गुंडाराज चलाया। विभिन्न ठेकों का टेंडर हो या फिर मुखिया से लेकर जिला परिषद तक के चुनाव, हर जगह उसकी ही पसंद चलती थी। उसने 1996, 98, 99 और 2004 में यहाँ से सांसद बन कर जीत का चौका लगाया।

मोहम्मद शहाबुद्दीन पर सीधे राजद सुप्रीमो और 15 साल तक बिहार में सत्ता के सर्वेसर्वा रहे लालू प्रसाद यादव का हाथ था। वो राजद की नेशनल एग्जीक्यूटिव कमिटी का हिस्सा था। उसके समर्थक उसे ‘साहेब’ कहकर बुलाते थे। गैंगस्टर शहाबुद्दीन पर अपहरण, हत्या और लूटे के कई मामलों में जेल जा चुका था।

चंदा बाबू के 2 बेटों की तेजाब से नहला कर की हत्या

शहाबुद्दीन ने रंगदारी नहीं देने और उनकी जमीन शहाबुद्दीन के हवाले न करने के कारण चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू के दो बेटों गिरीश और सतीश का अपहरण कर लिया था। इसके बाद उन्हें शहाबुद्दीन के गाँव प्रतापपुर स्थित उसकी कोठी पर ले जाया गया। फिर 16 अगस्त 2004 को वहाँ जो हैवानियत का नंगा नाच हुआ, उसने पूरे देश को हिला कर रख दिया। वहाँ दोनों भाइयों को तेज़ाब से नहलाया गया और तब तक ऐसा किया गया, जब तक उनकी तड़प-तड़प कर मौत न हो गई।

इस मामले में गवाह थे चंदा बाबू के तीसरे बेटे राजीव रौशन, लेकिन कोर्ट जाते समय उनकी भी हत्या कर दी गई। तीनों बेटों की माँ कलावती की शिकायत पर FIR दर्ज की गई थी।लेकिन, इस मामले में शहाबुद्दीन को अभियुक्त बनने में 5 साल लग गए। 2009 में सीवान के तत्कालीन SP अमित कुमार जैन के निर्देश पर केस के IO ने शहाबुद्दीन, असलम, आरिफ और राज कुमार साह को प्राथमिक अभियुक्त बनाया और सभी को उम्रकैद की सजा हुई।

ये मामला स्थानीय कोर्ट और हाई कोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, जहाँ कुछ ही मिनटों में तत्कालीन CJI रंजन गोगोई ने शहाबुद्दीन की याचिका खारिज कर दी और फैसला बरकरार रखा। इस मामले में गवाह थे चंदा बाबू के तीसरे बेटे राजीव रौशन, लेकिन कोर्ट जाते समय उनकी भी हत्या कर दी गई। तीनों बेटों की माँ कलावती की शिकायत पर FIR दर्ज की गई थी।

चंदा बाबू कई सालों तक भय में जीते रहे। उनको डर लगा रहता था कि शहाबुद्दीन उन्हें मरवा देगा। ऐसे में इतने बड़े अपराधी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक जाना उनके हार न मानने वाले जज्बे की ओर इशारा करता है। वहीं, शहाबुद्दीन की बीवी हीना शहाब ने इस मामले में केंद्र सरकार को दोषी माना।

मई 2021 में शहाबुद्दीन की कोविड से मौत

शहाबुद्दीन कई मामलों में तिहाड़ जेल में सजा काट रहा था। इसी दौरान कोरोनाकाल का वक्त आया। तिहाड़ जेल में बंद मोहम्मद शहाबुद्दीन कोरोना पॉजिटिव निकला। उसे दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। हाँ अपराधी और हत्यारे शहाबुद्दीन की 01 मई, 2021 को मौत हो गई।

शहाबुद्दीन के बेटे पर आपराधिक मामले

शहाबुद्दीन के आपराधिक जीवन का साया उसके बेटे ओसामा शहाब पर भी पढ़ा। पिछले साल 2024 में ही ओसामा जेल से बाहर निकला था। ओसामा पर कई आपराधिक मामलों में कुछ महीनों तक जेल में बंद रहा। आखिर में उसे हाई कोर्ट से जमानत मिली। इस वक्त तक ओसामा को शहाबुद्दीन की गुडंराज और डर की राजनीति का विरासत कहा जाने लगा था।

सबसे पहला मामला हुसैनगंज थाना क्षेत्र के छपिया बुजुर्ग स्थित 42 कट्ठा जमीन में दर्ज हुआ था। उसके बाद मोतिहारी में उसके बहनोई से आपसी जमीन विवाद में फायरिंग करने पर भी ओसामा पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इसी बीच साल 2023 में ओसामा को राजस्थान के कोटा में ट्रैफिक पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

तभी हुसैनगंज पुलिस ने कोटा पहुँचकर ओसामा को गिरफ्तार कर लिया और वापस ले आई। अब उसपर दर्ज फायरिंग और जमीन विवाद मामले में कोर्ट में पेशी हुई। कोर्ट ने ओसामा को मंडल कारा भेज दिया। कुछ दिन बाद ओसामा को हुसैनगंज मामले में जमानत मिल गई। लेकिन मोतिहारी में दर्ज FIR में वह जेल में बंद रहा। इस मामले में मोतिहारी व्यवहार कोर्ट में उसकी जमानत याचिका खारिज की गई, जिसके बाद पटना हाई कोर्ट से उसे जमानत मिली। आखिर में ओसामा साल 2024 में जेल से रिहा हो गया।

इस बीच शहाबुद्दीन के समर्थकों ने ओसामा के भीतर अपने अब्बा की विरासत को आगे बढ़ाने की ललक देखी क्योंकि शहाबुद्दीन पर भी 19 साल की उम्र में ही पहा आपराधिक केस दर्ज हुआ था, जो साल 2016 तक 39 तक बढ़ गया। शहाबुद्दीन के समर्थकों के मुताबिक, ओसामा भी अब अपराध की बदौलत राजनीति में करियर शुरू कर सकता था।

राजद का शहाबुद्दीन के परिवार पर हाथ

बिहार में राजद सरकार में ‘जंगलराज’ प्रदेश की बर्बादी का कारण रहा है। लालू प्रसाद यादव के इस ‘जंगलराज’ में शहाबुद्दीन का आतंक चरम पर था। इस जंगलराज में शहाबुद्दीन ‘बंदर’ और लालू यादव ‘मदारी‘ थे। लालू यादव और शहाबुद्दीन के बीच रिश्ता अब तक राजद निभा रही है।

शहाबुद्दीन की मौत के बाद भी राजद उसके परिवार का पूरा खयाल रखती है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद ने लोकसभा चुनाव 2024 में सीवान से शहाबुद्दीन की बीवी हिना शहाब को उम्मीदवार बनाया लेकिन उसकी हार के बाद राजद को ये सीट गँवानी पड़ी।

इसके बाद भी खबरें आईं कि बिहार चुनाव 2025 में राजद शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा को दावेदार बना सकती है। जुलाई 2025 में तेजस्वी यादव का शहाबुद्दीन के घर पहुँचकर डिनर करने के बाद ये खबरें और तेज हो गईं।

तेजस्वी यादव का आतंक फैलाने वाले शहाबुद्दीन के परिवार को लेकर काफी ‘नरम’ दिल रहा है। इसीलिए जुलाई 2025 में राजद के स्थापना दिवस पर भी वे शहाबुद्दीन को याद करना नहीं भूले। मंच से तेजस्वी यादन ने ‘शहाबुद्दीन अमर रहे’ के नारे लगवाए।

अब ओसामा शहाब राजद के सिंबल पर बिहार चुनाव में मैदान में है। ये वही समय है जब शहाबुद्दीन पहली बार राजद से चुनाव लड़ा था। फर्क सिर्फ यह है कि अपराधी का चेहरा बदल गया है, चरित्र नहीं। राजद ने ओसामा को टिकट देकर साफ कर दिया कि वह बिहार की राजनीति में अब भी अपराधी छवि को ऊपर मानती है। जबकि नीतीश सरकार में बिहार से जंगलराज हटा है और प्रदेश शिक्षा, विकास की ओर बढ़ा है।


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