Wednesday, January 27, 2021
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घोटाले में फँसी मीडिया कंपनी के कर्मचारियों को CM रिलीफ फंड से सैलरी… पूरे 23 महीने: ममता सरकार के कारनामे का खुलासा

कोलकाता हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को कंपनी के फंड से सैलरी देने को कहा था, लेकिन बंगाल सरकार ने CM रिलीफ फंड का पैसा दे दिया। एक कंपनी के कर्मचारियों को सीएम रिलीफ फंड से सैलरी देने का यह पहला मामला...

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले शारदा चिटफंड घोटाले में ममता बनर्जी सरकार का नया कारनामा उजागर हुआ है। सीबीआई ने सर्वोच्च न्यायालय में दावा किया है कि सीएम रिलीफ फंड के पैसों का इस्तेमाल सरकार ने घोटाले में फँसी कंपनी के कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए किया।

सरकारी फंड से तारा टीवी (शारदा समूह से जुड़ी कंपनी) के कर्मचारियों को पूरे 23 महीने सैलरी दी गई। यह कंपनी पूरे घोटाले का खुलासा होने के बाद जाँच के केंद्र में थी।

सीबीआई ने कोर्ट में बताया कि साल 2013 से लेकर अप्रैल 2015 के बीच तारा टीवी के कर्मचारियों के लिए रिलीफ फंड से हर माह 27 लाख रुपए कंपनी को दिए गए। अपने आवेदन में CBI ने लिखा, “ये राशि कथित तौर पर मीडिया कंपनी के कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए दी गई, जो जाँच के तहत शारदा ग्रुप ऑफ कंपनीज का हिस्सा थी।” इतना ही नहीं सीबीआई ने यह भी बताया कि फंड से इस बीच टीवी एंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन को कुल 6.21 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।

बता दें कि सीएम रिलीफ फंड का उपयोग किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए किया जाता है। लेकिन एक कंपनी के कर्मचारियों को इससे सैलरी देने का यह पहला मामला सामने आया है।

दैनिक भास्कर के अनुसार, केंद्रीय जाँच एजेंसी ने कोर्ट में बताया कि कोलकाता हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को कंपनी के फंड से सैलरी देने को कहा था, लेकिन बंगाल सरकार ने CM रिलीफ फंड का पैसा दे दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में आगे जाँच के लिए राज्य के मुख्य सचिव से जानकारी माँगी गई थी, मगर राज्य सरकार ने आधे-अधूरे दस्तावेज ही मुहैया कराए।

कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार की गिरफ्तारी की फिर माँग की, जिन्हें पिछले साल अक्टूबर में ही जमानत मिली थी। जाँच एजेंसी का कहना है कि राजीव पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे, इसलिए गिरफ्तारी जरूरी है।

गौरतलब है कि साल 2013 में राजीव कुमार के बिधाननगर पुलिस कमिश्नर होते हुए घोटाले का खुलासा किया गया था। जिसके बाद वह राज्य सरकार द्वारा गठित स्पेशल जाँच टीम का हिस्सा थे। 2014 में जब इस मामले की जाँच सीबीआई को सौंपी गई, तब कई अन्य बातें सामने आईं और इसमें जाँच एजेंसी ने पूरे मामले में राजीव कुमार की भूमिका पाई।

पूर्व कोलकाता कमिश्नर राजीव कुमार से हिरासत में पूछताछ की माँग करते हुए सीबीआई ने कहा कि जाँच से यह भी पता चला है कि पश्चिम बंगाल के सत्तारूढ़ त्रिणमूल और शारदा समूह के साथ मिलकर बिधाननगर पुलिस ने राजीव कुमार के कहने पर सबूत छुपाए।

बता दें कि शारदा चिटफंड ने पश्चिम बंगाल में तीन फर्जी स्कीमें चलाकर लाखों लोगों से लगभग 2,460 करोड़ रुपए की धोखेबाजी की थी। 2013 में जब इसका खुलासा हुआ, तो लोगों को पता चला कि उनके करोड़ों रुपए डूब गए। ईडी की जाँच रिपोर्ट बताती है कि अब भी 80 फीसद जमाकर्ताओं का भुगतान किया जाना बाकी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

 

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