Tuesday, August 3, 2021
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समाज सुधारकों से भी ऊपर थीं इंदिरा गाँधी, उनके और सावरकर के बीच कोई तुलना नहीं: कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया

जब एंकर ने कॉन्ग्रेस की हिप्पोक्रेसी को उजागर करते हुए विभिन्न योजनाओं, पार्कों सार्वजनिक संपत्तियों का नामकरण स्थानीय नेताओं की अनदेखी कर गाँधी-नेहरू परिवार पर किए जाने जाने को लेकर सवाल किया तो सिद्धारमैया ने कहा कि इंदिरा गाँधी और वीर सावरकर जैसे अन्य नेताओं के बीच कोई तुलना नहीं है।

कर्नाटक में नए फ्लाईओवर के नामकरण को लेकर चल रहे सियासी खींचतान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गॉंधी को शरणा (Sharanas) जैसे समाज सुधारकों से भी बड़ा बताया है। स्वतंत्रता सेनानी और हिंदुत्व विचारक वीर सावरकर के नाम का विरोध करते हुए उन्होंने यह बात कही।

सिद्धारमैया ने पिछले हफ्ते कन्नड़ समाचार चैनल टीवी 9 को दिए इंटरव्यू में कोरोना वायरस महामारी से लेकर इस संकट पर मोदी सरकार की प्रतिक्रिया समेत तमाम मुद्दों पर बात की।

इंटरव्यू के दौरान, पूर्व सीएम ने बंगलुरु और मंगलुरु में नवनिर्मित फ्लाईओवर का नामकरण वीर सावरकर के नाम पर करने को लेकर सत्तारुढ़ भाजपा और विपक्षी दलों के बीच चल रही राजनीतिक लड़ाई के बारे में भी बात की।

सरकार के फैसले को खारिज करते हुए, पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वीर सावरकर एक विवादास्पद व्यक्ति थे, जो महात्मा गाँधी की हत्या के आरोपित थे। उन्होंने विरोध करते हुए कहा कि फ्लाईओवर का नाम उनके नाम पर नहीं रखा जाना चाहिए।

इसके साथ ही कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि राज्य सरकार को स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर फ्लाईओवर का नाम रखना चाहिए। उन्होंने कहा, “क्या हमारे पास राज्य से 7 ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त करने वाले नहीं हैं। उनमें से किसी एक के सम्मान में रखें। क्या हमारे पास स्वतंत्रता सेनानी नहीं हैं? उनके नाम पर नाम रखें। क्या गलत है इसमें? वे कर्नाटक से हैं, और वे कन्नडिगा हैं। इसका नाम उनके नाम पर रखें।”

भाजपा पर निशाना साधने की जल्दबाजी में शायद पूर्व मुख्यमंत्री यह भूल गए कि राज्य के सात नहीं, बल्कि आठ साहित्यकारों ने साहित्य कला के क्षेत्र में योगदान के लिए प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार जीते हैं।

जब एंकर ने कॉन्ग्रेस की हिप्पोक्रेसी को उजागर करते हुए विभिन्न योजनाओं, पार्कों सार्वजनिक संपत्तियों का नामकरण स्थानीय नेताओं की अनदेखी कर गाँधी-नेहरू परिवार पर किए जाने जाने को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि इंदिरा गाँधी और वीर सावरकर जैसे अन्य नेताओं के बीच कोई तुलना नहीं है।

एंकर ने सरकार द्वारा संचालित कैंटीनों का नामकरण राज्य के समाज सुधारकों के नाम पर न होने को लेकर भी सवाल किया, जिन्होंने सैकड़ों साल पहले इस तरह के कल्याणकारी कार्यक्रम शुरू किए थे। एंकर ने पूछा कि तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार ने कैंटीन का नाम Basavannas जैसे समाज सुधारकों या फिर किसी अन्य Sharanas के नाम पर क्यों नहीं रखा।

इसका जवाब देते हुए सिद्धारमैया कहते हैं, “इंदिरा गाँधी इन सभी व्यक्तियों से ऊपर थीं, इसीलिए हमने उनके नाम पर कैंटीन का नाम रखा।” इसे आप वीडियो में लगभग 20:00 मिनट पर सुन सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक की येदियुरप्पा सरकार बेंगलुरु के येलाहांका इलाके में नवनिर्मित फालईओवर का नाम स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के नाम पर रखने का फैसला किया है। 28 मई को मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा सावरकर के जन्मदिन पर 34 करोड़ रुपए की लागत से नगरोटाथाना योजना के तहत बनाए गए 400 मीटर लंबे फ्लाईओवर का उद्घाटन करने वाले थे। हालाँकि, बाद में इसे आगे की तारीख के लिए स्थगित कर दिया गया।

इसके बाद 3 जून को मंगलुरु में पंपवेल फ्लाईओवर के फुटपाथ पर ‘वीर सावरकर फ्लाईओवर पंपवेल’ लिखा एक बैनर सामने आया। बाद में कुछ अज्ञात लोगों द्वारा बैनर हटा दिया गया था। जेडीएस और कॉन्ग्रेस ने वीर सावरकर के नाम पर फ्लाईओवर का नाम रखने को राज्य के स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान बताया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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