Friday, April 19, 2024
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भारत का विपक्ष भी चुटकुला है! यहाँ ‘कृष्ण-अर्जुन’ में हो रहा पंगा, अध्यक्षविहीन पार्टी कह रही- अपना टाइम आ गया

उम्मीद की जानी चाहिए कि सुशील मोदी के बताए औरंगजेब और दारा शिकोह आने वाले दिनों में जनता का भरपूर मनोरंजन करते रहेंगे। ​फिर भी मसाला कम पड़े तो घबराइएगा मत। युवराज और उनकी दादी जैसी ​नाक वाली दीदी हैं ही और यूपी में चुनाव भी होने हैं।

जब शरिया की ख्वाहिश रखने वाले अफगानी तालिबान के इस्लामी शासन से खौफजदा हैं। जब भारत के कठमुल्ले तालिबान की वापसी पर भांगड़ा कर रहे हैं। जब यौन दासी बनाने के लिए अफगानिस्तान के घर-घर से बच्चियों को उठाया जा रहा है। जब मासूमों को बचाने के लिए अम्मियाँ उन्हें कंटीले तारों के पार फेंक रही है। जब मोदी सरकार अफगानिस्तान से अपने लोगों को निकालने में व्यस्त है, तब भारत का विपक्ष क्या कर रहा है?

भारत का विपक्ष वही काम कर रहा है जिसमें वह पारंगत है। वह इस बात का ख्याल रख रहा है कि आपके जीवन में मनोरंजन का डोज कम न हो। यह काम वह अक्सर करते रहता है। कभी किसानों के नाम पर। कभी हिंदुओं और मोदी के प्रति घृणा प्रदर्शित कर। कभी कट्टरपंथ के जहाज पर सवार हो कर। वक्त-वक्त पर वह चीन-पाकिस्तान भी हो आता है। कुल मिलाकर उसका जीवन टूलकिट के हिसाब से चलता रहता है। फिर भी मनोरंजन का डोज कम न पड़े इसके लिए उसने 51 साल का एक चिर युवा भी रखा है जो मशीनों में आलू डाल सोने बनाने जैसे अविष्कार कर चुका है। बीच-बीच में आयटम सॉन्ग लेकर आने के लिए विपक्ष ने राज्यों में भी क्षत्रप रख रखे हैं। ढोल-नगाड़े पीटने के लिए मीडिया तो नेहरू ही सेट करके गए हैं।

तो इस शुक्रवार (20 अगस्त 2021) विपक्ष ने मनोरजंन के लिए दो ड्रामे रिलीज किए। एक दिल्ली से तो दूसरी पटना से। दिल्ली में 10 साल तक पर्दे के पीछे से सरकार चलाने वाली सोनिया गाँधी ने विपक्षी नेताओं के साथ वचुर्अल बैठक की और दावा किया- अपना टाइम आ गया। वहीं पटना में लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव जो खुद को ‘कृष्ण’ और अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को ‘अर्जुन’ बताते रहते हैं के बीच कलह बढ़ गई। हालाँकि दोनों सियासी ड्रामे की पृष्ठभूमि कई दिनों से लिखी जा रही थी। सो सिनेमाई भाषा में कहें तो सोनिया की विपक्षी एकता वाली फिल्म आज रिलीज हुई और लालू के पारिवारिक सीरियल में आज एक नया मोड़ आया।

पहले बात सोनिया की बैठक की। मीडिया रिपोर्ट बताते हैं कि इस बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, राहुल गाँधी के अलावा फारूक अब्दुल्ला, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, शरद पवार, शरद यादव और सीताराम येचुरी जैसे नेता शामिल थे। कुल मिलकार 18-19 दलों का प्रतिनिधित्व था। बैठक में मोदी सरकार के खिलाफ पुरानी और जानी-पहचानी खुन्नस दिखाने के अलावा 2024 के लोकसभा चुनाव को लक्ष्य बनाया गया। सोनिया गाँधी ने कहा- हमारा लक्ष्य 2024 का लोकसभा चुनाव है। हमें देश को एक ऐसी सरकार देने के उद्देश्य के साथ व्यवस्थिति ढंग से योजना बनाने की शुरुआत करनी है कि जो स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों और संविधान के सिद्धांतों एवं प्रावधानों में विश्वास करती हो।

यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि सोनिया उस पार्टी की अगुवाई कर रही हैं जो अरसे से अपने लिए एक पूर्णकालिक अध्यक्ष नहीं तलाश पाया है। जो अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर में है, जहाँ से उसके उबरने के कोई संकेत नहीं दिख रहे। जो राज्यों में कलह से परेशान है। जिस पार्टी को आए दिन कोई न कोई नेता छोड़ रहा है। उस पार्टी की नेता विपक्षी एकता के नाम पर भानुमती का कुनबा जोड़ने की जुगत में हैं। वह भी उस वाम दलों के भरोसे जो केरल के अलावा देश में कहीं बचे नहीं। उन क्षेत्रीय पार्टियों के भरोसे जो अपने अपने दड़बों में सिमटे हैं। उन नेताओं के भरोसे जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के आगे कहीं नहीं ठहरते। इससे बेहतर लोकतंत्र में प्रहसन भला क्या हो सकता है!

इस बैठक में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव भी मौजूद थे। अब इनकी एकता की बानगी ये है कि इनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव को आज अपनी माँ राबड़ी देवी के आवास से अपमानित होकर निकलना पड़ा। ये सूत्रों के हवाले से खबर नहीं है। खुद तेज प्रताप ने कहा है कि उनकी तेजस्वी से बात हो रही थी तभी संजय यादव वहाँ पहुँचे और तेजस्वी को लेकर कमरे के अंदर चले गए। तेज प्रताप ने कहा कि संजय यादव होते कौन हैं बीच में बोलने वाले और रोकने वाले?

वैसे तेज प्रताप ये सवाल अक्सर करते रहते हैं। कभी जगदानंद सिंह से तो कभी किसी और से। लेकिन इस बार बात दूर तलक निकल गई है तो भाजपा सांसद और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कह दिया है- राजद की आंतरिक लड़ाई में कौन औरंगजेब बन कर संगठन पर राज करेगा और कौन दारा शिकोह बनाया जाएगा, यह समय बताएगा।

उम्मीद की जानी चाहिए कि सुशील मोदी के बताए औरंगजेब और दारा शिकोह आने वाले दिनों में जनता का भरपूर मनोरंजन करते रहेंगे। ​फिर भी मसाला कम पड़े तो घबराइएगा मत। युवराज और उनकी दादी जैसी ​नाक वाली दीदी हैं ही और यूपी में चुनाव भी होने हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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