Monday, June 17, 2024
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हिंदुओं को बदनाम करना चाहते हैं डीके शिवकुमार, काले जादू वाले आरोप बेतुके: केरल के मंत्रियों ने कॉन्ग्रेस नेता को फटकारा, पुलिस की जाँच में भी आरोप फर्जी निकले

मंत्री आर बिंदू ने शिवकुमार के आरोपों को "बेतुका" बताया। उन्होंने कहा कि केरल में इस तरह की रस्में कभी नहीं हो सकतीं, उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। योगक्षेम सभा के अध्यक्ष अकीरामन कालिदासन भट्टाथिरिपाद ने शिवकुमार के दावों को राजनीतिक नौटंकी करार देते हुए खारिज कर दिया।

केरल में कर्नाटक सरकार को डिस्टर्ब करने के लिए काला जादू का आरोप लगाने वाले डीके शिवकुमार को केरल सरकार के मंत्रियों ने जमकर घेरा है। केरल सरकार ने आरोप लगाया है कि डीके हिंदुओं को बदनाम करने के लिए इस तरह की बात कर रहे हैं। केरल सरकार के मंत्रियों ने पुलिस जाँच के बाद शिवकुमार के आरोपों को खारिज कर दिया है।

केरल के देवस्वोम मंत्री के राधाकृष्णन ने राज्य में इस तरह के अनुष्ठान की संभावना को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “यह ऐसा कुछ है जो केरल में कभी नहीं होगा। हम इन दावों की पूरी तरह से जाँच करेंगे।” वहीं, मंत्री आर बिंदू ने शिवकुमार के आरोपों को “बेतुका” बताया। उन्होंने कहा कि केरल में इस तरह की रस्में कभी नहीं हो सकतीं, उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। योगक्षेम सभा के अध्यक्ष अकीरामन कालिदासन भट्टाथिरिपाद ने शिवकुमार के दावों को राजनीतिक नौटंकी करार देते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “हिंदू समाज में ऐसी कोई गड़बड़ी नहीं है। ये आरोप निराधार हैं।”

वहीं, सीपीएम के राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने आरोप लगाया कि शिवकुमार के दावों का उद्देश्य केरल के सांस्कृतिक लोकाचार का मजाक उड़ाना और इसे सांप्रदायिक रंग देना है। उन्होंने कहा कि “तालीपरम्बा में राजराजेश्वर मंदिर देश का एक महत्वपूर्ण हिंदू मंदिर है। इस मंदिर में किसी भी तरह का काला जादू या बलि से जुड़ी रस्में नहीं होती हैं। इसे पहले पेरुवंचल्लूर के नाम से जाना जाता था। यह एक ब्राह्मण गाँव था और आर्यन आक्रमण का प्रवेश द्वार था।”

कन्नूर के तलिपरम्बा में स्थित श्री राजराजेश्वर मंदिर के अधिकारियों ने शिवकुमार के दावों का खंडन किया है। मालाबार देवस्वोम बोर्ड के सहायक आयुक्त गिरीश कुमार ने दावा किया कि मालाबार क्षेत्र के किसी भी मंदिर में अवैध अनुष्ठान नहीं किए जाते हैं। उन्होंने श्री राजराजेश्वर मंदिर और आस-पास के मंदिरों में किए जाने वाले अनुष्ठानों की सूची जारी की, जिसमें विधिसम्मत और पारंपरिक प्रथाओं का सावधानीपूर्वक पालन किया जाता है।

मालाबार देवस्वोम बोर्ड के अधिकारी ने कहा कि केरल के ज़्यादातर मंदिरों में की जाने वाली ‘शत्रु संहार’ पूजा में किसी बलि की ज़रूरत नहीं होती। उन्होंने कहा, “यह एक साधारण पूजा है जो मंत्रोच्चार तक सीमित है। कन्नूर के थिरुवरकाडु भगवती मंदिर उर्फ़ मडायी कावु में सिर्फ़ एक जीव की बलि दी जाती है। देवी के लिए मुर्गे की बलि ‘कोझी कलशम’ का आयोजन किया जाता है, लेकिन इस अनुष्ठान का कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री द्वारा किए गए दावे से कोई संबंध नहीं है।”

इस बीच, कर्नाटक पुलिस का एक विशेष दस्ता जिले में किए जा रहे विभिन्न अनुष्ठानों की जाँच करने के लिए कन्नूर पहुँचा। केरल पुलिस ने भी एक टीम तैनात की है जो यह जाँच करेगी कि राज्य में इस तरह का कोई अनुष्ठान किया जा रहा है या नहीं। दोनों टीमों ने मडायी कावु का भी दौरा किया। हालाँकि इस जाँच में कुछ नहीं निकला है।

बता दें कि शिवकुमार ने आरोप लगाया था कि केरल के “राजराजेश्वरी मंदिर” में ‘अघोरियों’ (तपस्वी शैव साधुओं) के परामर्श से ‘तांत्रिकों’ द्वारा किए गए ‘शत्रु भैरव यज्ञ’ के तहत 21 बकरियों, तीन भैंसों, 21 काली भेड़ों और पाँच सूअरों की बलि दी गई। उन्होंने कहा कि शत्रुओं के विनाश के उद्देश्य से किया गया यह यज्ञ उनके, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ था। कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि उन्हें इस अनुष्ठान के बारे में लिखित जानकारी मिली है, जिसमें इसका स्थान और इसमें शामिल व्यक्ति शामिल हैं। उन्होंने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के शामिल होने का संकेत दिया, लेकिन किसी खास व्यक्ति का नाम नहीं लिया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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