जनसंख्या नियंत्रण कानून ज़रूरी है, लेकिन 3 बच्चों तक इजाज़त दो: सपा नेता हसन

"अब हम देख रहे हैं कि देश की जनसंख्या सेचुरेशन पर है। देश के संसाधन अपने सेचुरेशन पर हैं लिहाजा ऐसे कानून बने जिससे इस पर रोक लगे। लेकिन ये कानून कुछ वक्त के लिए ही बनना चाहिए।"

जनसंख्या नियंत्रण की प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद अब समाजवादी पार्टी के सांसद डॉ. एसटी हसन ने जनसंख्या नियंत्रण के विचार का समर्थन किया है। लेकिन मुरादाबाद के सांसद डॉ. हसन ने साथ में यह चेतावनी दी कि अगर भारत ने यह कानून बहुत समय तक लागू किया तो हमारी हालत चीन जैसी हो जाएगी, जहाँ वृद्धों की जनसंख्या में हिस्सेदारी बहुत अधिक हो गई है।

‘देश की जनसंख्या सेचुरेशन पर है’

मीडिया से बात करते हुए एसटी हसन ने कहा कि उनकी निजी राय है कि जनसंख्या नीति में तीन बच्चों तक की इजाज़त दी जानी चाहिए। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि कई बार लोगों के दोनों बच्चे एक ही लिंग के (दो बेटे या बेटियाँ) होते हैं, और वे बेटा-बेटी दोनों चाहते हैं, इसलिए ऐसे दम्पत्तियों के लिए एक बार और कोशिश का मौका होना चाहिए।

उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण कानून की वकालत अवश्य की, लेकिन यह विचार भी रखा कि इसे केवल सीमित समय के लिए लागू किया जाना चाहिए। “अब हम देख रहे हैं कि देश की जनसंख्या सेचुरेशन पर है। देश के संसाधन अपने सेचुरेशन पर हैं लिहाजा ऐसे कानून बने जिससे इस पर रोक लगे। लेकिन ये कानून कुछ वक्त के लिए ही बनना चाहिए।”

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उन्होंने साथ में इस कानून को अधिक समय तक चलाते रहने के खिलाफ भी चेताया। उनके अनुसार यदि भारत ने यह नीति बहुत दिनों तक अपनाई तो हमारा हाल चीन जैसा हो जाएगा। एक-बच्चा नीति कई पीढ़ियों से चली आने के चलते चीन ने जनसंख्या-वृद्धि को तो नियंत्रित कर लिया, लेकिन अब वह जनसंख्या में वृद्ध लोगों की तादाद बहुत ज़्यादा बढ़ जाने और उनकी देखभाल करने लायक युवाओं की कमी के चलते स्वास्थ्य और सामाजिक संकट से जूझ रहा है।

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