Homeराजनीति'30 साल से ज्यादा गँवा दिए, अब आजादी की हवा में साँस लेंगे': राजीव...

’30 साल से ज्यादा गँवा दिए, अब आजादी की हवा में साँस लेंगे’: राजीव गाँधी के हत्यारे की रिहाई पर CM स्टालिन ने जाहिर की खुशी

"एजी पेरारिवलन की रिहाई स्वागत योग्य है। उन्होंने जेल में 30 साल से ज्यादा गँवा दिए और अब वह आजादी की हवा में साँस लेंगे। मैं उन्हें शुभकामनाएँ देता हूँ।"

सुप्रीम कोर्ट से एजी पेरारिवलन को मिली रिहाई के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने न सिर्फ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया बल्कि अपनी ख़ुशी भी जाहिर की है। उन्होंने पेरारिवलन को रिहा होने पर भी दी हैं। एजी पेरारीवलन पूर्व पीएम राजीव गाँधी की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दोषियों में से एक हैं।

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एजी पेरारिवलन की रिहाई पर उनकी माँ अर्पुथम्मल को फोन कर अपनी खुशी जाहिर किया। वहीं अर्पुथम्मल का कहना है कि उनका परिवार और वह सीएम से मिलने आ रही है। इस अवसर पर सीएम स्टालिन ने कहा, “एजी पेरारिवलन की रिहाई स्वागत योग्य है। उन्होंने जेल में 30 साल से ज्यादा गँवा दिए और अब वह आजादी की हवा में साँस लेंगे। मैं उन्हें शुभकामनाएँ देता हूँ।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश देते हुए पीठ ने कहा, ”राज्य मंत्रिमंडल ने प्रासंगिक विचार-विमर्श के आधार पर अपना फैसला किया था। अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए, दोषी को रिहा किया जाना उचित होगा।”

गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के हत्यारे ए. जी. पेरारिवलन को न्यायालय ने यह देखते हुए 9 मार्च, 2022 को जमानत दे दी थी कि सजा काटने और पैरोल के दौरान उसके आचरण को लेकर किसी तरह की शिकायत नहीं मिली।

बता दें कि तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बदुर में 21 मई, 1991 को एक चुनावी रैली के दौरान एक महिला आत्मघाती हमलावर ने खुद को विस्फोट से उड़ा लिया था, जिसमें राजीव गाँधी की मृत्यु हो गई थी। हमलावर महिला की पहचान धनु के तौर पर हुई थी।

इस मामले में न्यायालय ने मई 1999 के अपने आदेश में चारों दोषियों पेरारिवलन, मुरुगन, संथन और नलिनी को मौत की सजा बरकरार रखी थी। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने 18 फरवरी 2014 को पेरारिवलन, संथन और मुरुगन की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘मेविस्तान’ बनाने का सपना, अलवर-भरतपुर में हिंसा और फिर गाँधी-नेहरू का हस्तक्षेप: जानिए मेवात के उस इतिहास की पूरी कहानी, जिसने बदल दिया इलाके...

मेविस्तान की माँग, 1933 का गोविंदगढ़ संघर्ष, 1947 का अलवर-भरतपुर घटनाक्रम और गाँधी-नेहरू के हस्तक्षेप से जुड़ी मेवात की पूरी कहानी जानिए।

59 करोड़ अकाउंट्स, लाखों करोड़ की कैपिटल और आखिरी व्यक्ति तक पहुँचता बैंकिंग सिस्टम… फिर क्यों जनधन योजना से सुभाष गर्ग को लगी मिर्ची?

सुभाष गर्ग ने जनधन योजना के 59 करोड़ खातों पर सवाल उठाए, जानिए जीरो बैलेंस, इनएक्टिव अकाउंट्स और DBT से जुड़ी पूरी कहानी।
- विज्ञापन -