मोदी लहर बरकरार, बहुमत के साथ केंद्र में फिर लौटेगी मोदी सरकार: टाइम्स नाउ-VMR सर्वे

यूपीए केवल 135 सीटों पर सिमट जाएगी। सर्वे में ये बात भी निकलकर सामने आई कि दक्षिण भारत में एनडीए का जादू कुछ खास नहीं चल पाएगा, लेकिन बंगाल में बीजेपी को बढ़त प्राप्त होगी।

इस बार लोकसभा चुनाव 11 अप्रैल से 19 मई तक सात चरणों में होने तय हुए हैं। ऐसे में चुनाव के पहले चरण की तारीख़ आने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। 2019 में सत्ता को लेकर हर पार्टी अपने-अपने दावे कर रही है, लेकिन आख़िरी नतीजे क्या होंगे यह तो 23 मई को ही मालूम पड़ेगा। उससे पहले लोगों की जिज्ञासा को कुछ हद तक शांत करने करने के लिए टाइम्स नाउ द्वारा एक सर्वे कराया गया है। जिसके निष्कर्ष बताते हैं कि इस बार भी लोगों का मूड एनडीए सरकार को ही सत्ता में लाने का है।

पाकिस्तान के बालाकोट में हुए हमले के बाद यह सबसे बड़ा सर्वे है। जिसका उद्देश्य ये जानना था कि क्या इस बार एनडीए सरकार को दूसरा कार्यकाल संभालने का मौक़ा मिलेगा? क्या नरेंद्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री बनेंगे? हालाँँकि, इस सर्वे के मुताबिक 2014 में चली मोदी लहर के मुकाबले इस बार एनडीए के हिस्से में कम सीटें आती दिख रही हैं, लेकिन बावजूद इसके जीत एनडीए की ही होगी।

सर्वे के मुताबिक एनडीए को 543 में से 283 सीटें मिलने का अनुमान है, वहीं यूपीए केवल 135 सीटों पर सिमट जाएगी। इसके साथ ही इस सर्वे में ये बात भी निकलकर सामने आई कि दक्षिण भारत में एनडीए का जादू कुछ खास नहीं चल पाएगा, लेकिन बंगाल में बीजेपी को बढ़त प्राप्त होगी। इसके अलावा नार्थ इस्ट और हिंदी पट्टी वाले राज्यों में बीजेपी का दबदबा खासा कायम रहने वाला है। सर्वे बताता है कि भाजपा की पकड़ हिन्दी पट्टी राज्यों में बेहद मज़बूत है और सहयोगी दलों के बहुमत का आँकड़ा छूने के आसार भी नज़र आ रहे हैं।

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यूपी में हुए सर्वेक्षण के अनुसार भाजपा अपना 2014 वाला जादू बरकरार रखने में असफल दिखाई पड़ रही है, क्योंकि 2014 में भाजपा का 43.3 फीसदी वोट साझा था और सहयोगियों के साथ मिलकर भाजपा ने 73 सीटें जीती थीं, लेकिन लग रहा है इस बार बीजेपी को केवल 42 सीटों पर ही संतुष्ट होना पड़ेगा। हालाँकि जीत तब भी बीजेपी की ही तय होने का अनुमान है, क्योंकि महागठबंधन के खाते में 36 और कॉन्ग्रेस के खाते में केवल 2 सीटें आ सकती हैं।

जैसा कि हमने बताया कि सर्वे के अनुसार बीजेपी और एनडीए को सत्ता वापसी कराने में हिंदी पट्टी के राज्य काफ़ी मददगार साबित होंगे। सर्वे कहता है कि दिल्ली की 7 सीटों पर बीजेपी का कब्जा होगा, जबकि मध्य प्रदेश के 29 में से 22 सीटों पर बीजेपी के जीतने के और राजस्थान में 25 में से 20 सीटें जीतने के अनुमान हैं।

काफी अड़चनें आने के बाद भी बीते कुछ दिनों से पश्चिम बंगाल में बीजेपी खुद को मज़बूत दिखाने में जुटी हुई है। ऐसे में यह सर्वे बीजेपी के लिए खुशखबरी लेकर आया है। अगर यह अनुमान हक़ीक़त में बदलते हैं, तो भाजपा को 32 फीसदी वोट शेयर और 11 सीटें प्राप्त हो सकती है। जबकि कॉन्ग्रेस और लेफ्ट का खाता खुलना न के बराबर नज़र आ रहा है।

बिहार में मोदी की लहर का जादू बरकरार है। 2014 में जहाँ पूरा चुनाव एकतरफा नज़र आ रहा था, वहीं हल्की फेर-बदल के साथ स्थिति वैसी ही हैं। 2014 में बिहार में बीजेपी को 51.5% वोट शेयर के साथ 30 सीटें मिली थी, जबकि 2019 में 48.40 वोट शेयर के साथ 27 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं यूपीए को चुनावों में 42.40 फीसदी वोट शेयर और 13 सीटें मिल सकती हैं।

दक्षिण राज्यों जीत हासिल करने की हर संभव कोशिशें बीजेपी द्वारा की जा रही है, लेकिन सर्वें के आधार पर इन सीटों पर भाजपा को फायदा मिलता नहीं दिख रहा है। 2014 में भी भाजपा को यहाँ से निराशा हाथ लगी थी और टाइम्स नाउ के सर्वे के मुताबिक इस बार भी परिस्थितियाँ पहले के मुकाबले बहुत बेहतर होती नहीं दिख रही हैं। तेलंगाना में टीआरएस के जीतने की संभावनाएँ हैं, क्योंकि यहाँ सर्वे भी उसे 17 में 12 सीट देता दिखा रहा है।

वहीं आन्ध्र प्रदेश में कॉन्ग्रेस को पिछले चुनावों में 8 सीटों पर जीत हासिल हुई, लेकिन इस बार यह आँकड़ा 22 सीटों के साथ जीत तक पहुँच संभव है। बता दें कि इससे पहले भी टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक मेगा पोल किया था जिसके नतीजों ने दर्शाया था कि इस बार बीजेपी को क़रीब 84 प्रतिशत लोग वापस सत्ता में लाना चाहते हैं।

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