Monday, September 21, 2020
Home देश-समाज यूनिवर्सल बेसिक इनकम: क्या हैं इसके मायने, क्या कहीं पर लागू हुआ है? जानिए...

यूनिवर्सल बेसिक इनकम: क्या हैं इसके मायने, क्या कहीं पर लागू हुआ है? जानिए सब कुछ

बेसिक इनकम, बाल श्रम उन्मूलन में भी मददगार साबित हो सकती है। इससे उत्पादक कार्यों में वृद्धि करके गाँवों की सूरत बदली जा सकती है और यह सही मायने में सतत विकास की दिशा में एक सराहनीय प्रयास होगा। जानिए न्यूनतम आमदनी की गारंटी क्या है?

लोकसभा चुनाव नज़दीक आते ही एक बार फिर यूनिवर्सल बेसिक इनकम चर्चा में है। वैसे भारत में सामाजिक-आर्थिक विषमता को देखते हुए, इसकी ज़रूरत शिद्दत से महसूस की जाती रही है। आइए विस्तार से उन वजहों पर विचार करते हैं कि क्यों भारत में एक बेसिक इनकम की ज़रूरत है और इस योजना के लागू करने में कौन-सी अड़चने हैं।

क़ायदे से अगर हम देंखे तो भारत में आय की असमानता साफ़ नज़र आएगी, इसकी वजह आज भी देश के कामगार वर्ग और युवाओं  के पास पिछले पाँच सालों में लोगों की आय में कुछ सुधार के बाद भी एक निश्चित आय के साधन का न होना है। आज आज़ादी के 72 साल के बाद भी, क्या देश में सभी लोगों के लिए जीवन की न्यूनतम आवश्यकताएँ पूरी हो पाई हैं? आज भी सभी के पास पीने को स्वच्छ जल नहीं है, सभी को रहने को घर और खाने को भोजन भी सुनिश्चित नहीं हो पाया है। ग़रीबों के बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा व्यवस्था भी नहीं दिखती।

देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा अपनी बुनियादी ज़रूरतें पूरी नहीं कर पा रहा तो कारण यह है कि लोगों के पास नियमित आय के पर्याप्त साधन नहीं हैं कि वो अपनी मूलभूत ज़रूरतें भी पूरी कर पाएँ। तो क्यों न तमाम सामाजिक, आर्थिक मानकों और विसंगतियों का अध्ययन करते हुए सभी के लिये एक बेसिक इनकम की व्यवस्था कर दी जाए। जिससे वो अपनी साधारण ज़रूरतें पूरी कर पाएँ।

एक लोकतान्त्रिक समाज से हम ऐसी अपेक्षाएँ पाल सकते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवन यापन के लिये कम से कम न्यूनतम आय की गारंटी मिलनी चाहिए।

- विज्ञापन -

भारत में यूनिवर्सल बेसिक इनकम पर ध्यान तब और आकर्षित हुआ जब 2016-17 के भारत के आर्थिक सर्वेक्षण में यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) को एक अध्याय के रूप में शामिल कर इसके विविध पक्षों पर चर्चा की गई। ग़ौरतलब यह भी है कि आर्थिक सर्वेक्षण में UBI योजना को ग़रीबी उन्मूलन के साधन के रूप में इसे एक संभावित उपाय बताया गया था।   

आख़िर क्या है यूनिवर्सल बेसिक इनकम

यूनिवर्सल बेसिक इनकम देश के हर ज़रूरतमंद नागरिक को, एक नियमित अंतराल पर, बिना शर्त दिया जाने वाला नगद ट्रांसफ़र है। आमतौर पर इसके लिये व्यक्ति की सामाजिक या आर्थिक स्थिति पर विचार नहीं किया जाता है। अर्थात, अगर वो इस स्थिति में नहीं है कि अपना जीवनयापन कर सके, तो उसे सरकार एक तय राशि देगी। इसकी जड़ में ग़रीबी हो सकती है, किसी का बेरोज़गार होना हो सकता है, या दो नौकरियों के बीच एक वो दौर जब कोई बिना नौकरी के रह रहा/रही हो।

UBI पर आर्थिक सर्वेक्षण की राय

आर्थिक सर्वेक्षण ग़रीबी कम करने के प्रयास में विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं के विकल्प के रूप में यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) की वकालत करता है। यह बताता है कि ग़रीबों की मदद करने का एक अधिक कुशल तरीका उन्हें UBI के माध्यम से सीधे नगद प्रदान करना होगा। यह मौजूदा अनेक कल्याणकारी योजनाओं और विभिन्न प्रकार के सब्सिडी का एक बेहतर विकल्प होगा। यह JAM (जनधन-आधार-मोबाइल) प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीधे नगद हस्तांतरण के रूप में प्रशासनिक दक्षता भी लाएगा।

भारत के लिये क्यों ज़रूरी है बेसिक न्यूनतम आय

इस बात की सुगबुगाहट पहले से है कि चुनाव से पहले मोदी सरकार द्वारा देश में ‘यूनिवर्सल बेसिक इनकम’ (Universal Basic Income-UBI) योजना लागू करने की घोषणा की जा सकती है। उससे पहले राहुल गाँधी ने ‘ग़रीबी हटाओ’ के नारे की तरह चुनावी एजेंडे के रूप में इसे फिर से हवा दे दी। उन्होंने तो यूनिवर्सल बेसिक इनकम लागू करने का लगभग आश्वासन ही दे दिया, पर हमेशा की तरह यह कैसे संभव होगा इस पर कुछ नहीं कहा।

कुछ दिन पहले सिक्किम ने भी दावा किया कि वह इस योजना को लागू करने वाला पहला राज्य होगा और उसने बिना शर्त डायरेक्ट कैश ट्रांसफर योजना लाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। मीडिया रिपोर्ट के आधार पर, सिक्किम की सत्तारूढ़ पार्टी, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (SDF), 2019 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले, अपने घोषणा-पत्र में UBI को शामिल करने का फ़ैसला कर चुकी है और उनका उद्देश्य 2022 तक राज्य में योजना को लागू करना है।

क्या सिक्किम UBI का बोझ उठाने में सक्षम है

सिक्किम के प्रस्तावित UBI के पक्ष में सबसे आम तर्क यह है कि यह सामाजिक न्याय को बढ़ावा देगा क्योंकि यह अन्य सभी कल्याणकारी योजनाओं और सब्सिडी को ख़त्म कर देगा जिससे ग़रीबों हेतु लक्षित अप्रभावी सरकारी परियोजनाओं पर फ़ालतू ख़र्च भी समाप्त हो जाएगा। सिक्किम सरकार का कहना है कि उसने इस योजना के वित्तीय प्रक्रिया पर पहले ही विचार कर लिया है।

सिक्किम ने अपने स्रोतों का ख़ुलासा करते हुए बताया कि राज्य द्वारा कई जलविद्युत परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन से राज्य को विद्युत अधिशेष प्राप्त हुआ है। राज्य में 2200 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है और अगले कुछ वर्षों में यह आँकड़ा बढ़कर 3000 मेगावाट हो जाएगा। राज्य की आवश्यकता केवल 200-300 मेगावाट है और बाकी की बिजली ट्रेडिंग कंपनियों को बेच दी जाती है जिससे राजस्व में वृद्धि होती है। इसका उपयोग UBI में किया जा सकता है।

इसके अलावा, सिक्किम टूरिज्म से पर्याप्त राजस्व प्राप्त करता है। बता दें कि, सिक्किम की प्रति व्यक्ति GDP 2004-05 से दोहरे अंकों में बढ़ रही है। सिक्किम में 2011-12 में ग़रीबी का अनुपात 22% अर्थात् 51,000 (8.2%) तक घटा है जो 2004-05 में 1.7 लाख (30.9%) था। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार कम आबादी वाला यह राज्य जीवन स्तर के मामले में भारत के बेहतर राज्यों में गिना जाता है।

सिक्किम में ग़रीबी का स्तर (Poverty Level) 8 से 9% है, जो राष्ट्रीय औसत से काफ़ी नीचे है। बता दें कि प्रति व्यक्ति सकल आय के मामले में सिक्किम का सभी भारतीय राज्यों में तीसरा स्थान होने से इसके पास पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। सिक्किम महिलाओं के लिये भी सबसे सुरक्षित और प्रगतिशील राज्यों में से एक है। जहाँ कार्यस्थल पर औसत से अधिक उपस्थिति है तथा महिलाओं के विरुद्ध अपराध के आँकड़े बहुत कम हैं। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, राज्य की साक्षरता दर 2001 के 68.8% से बढ़कर 2011 में 82.2% हो गई है।

शिवराज सरकार ने मध्य प्रदेश में चलाया था पायलट प्रोजेक्ट

UBI का सुझाव लंदन यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर गाय स्टैंडिंग ने दिया था जिनकी अगुवाई में शिवराज सिंह चौहान सरकार ने मध्य प्रदेश के इंदौर के पास 8 गाँवों में पाँच साल के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया। प्रायोगिक तौर पर इन गाँवों की 6,000 की आबादी के बीच 2010 से 2016 के बीच 500 रुपए वयस्कों के बैंक खाते में हर महीने ट्रांसफ़र किए गए। वहीं, बच्चों के खाते में 150 रुपए जमा कराए गए। उस समय भी प्रयोग के सफल होने के बाद प्रोफ़ेसर स्टैंडिंग ने दावा किया कि मोदी सरकार इस योजना को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

ग़ौरतलब है कि मध्य प्रदेश में अधिकांश ग्रामीणों ने उस पैसे का उपयोग शौचालय, दीवार, छत की मरम्मत में किया। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के वंचित परिवारों में यह देखा गया कि बेहतर वित्तीय स्थिति में उन्होंने राशन की दुकानों की बजाय बाज़ार से सामान ख़रीद अपने पोषण स्तर में सुधार किया और स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति और प्रदर्शन दोनों बेहतर हुई। ऐसे आकड़ों के आधार पर हम कह सकते हैं कि बेसिक इनकम का यह विचार एक उत्तम पहल है।

बेसिक इनकम को पायलट प्रोजेक्ट के ज़रिए बढ़ाना और धीरे-धीरे सावधानीपूर्वक इसे अमल में लाना भारत में आदर्श प्रतीत हो रहा है क्योंकि इसके माध्यम से गाँवों में लोगों के रहन-सहन के स्तर को सुधारा जा सकता है। उन्हें पेयजल उपलब्ध कराया जा सकता है और बच्चों के पोषण में भी सुधार लाया जा सकता है। एक नियमित बेसिक इनकम से भूख और बीमारी से निपटने में मदद मिल सकती है।

बेसिक इनकम, बाल श्रम उन्मूलन में भी मददगार साबित हो सकती है। इससे उत्पादक कार्यों में वृद्धि करके गाँवों की सूरत बदली जा सकती है और यह सही मायने में सतत विकास की दिशा में एक सराहनीय प्रयास होगा। बेसिक इनकम की मदद से सामाजिक विषमता को भी कम किया जा सकता है। यदि एक वाक्य में कहें तो बेसिक इनकम का यह विचार आय की असमानता और इसके दुष्प्रभावों के श्राप से भारत को मुक्त कर 72 साल के पिछड़ेपन को दूर कर सकता है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

रवि अग्रहरि
अपने बारे में का बताएँ गुरु, बस बनारसी हूँ, इसी में महादेव की कृपा है! बाकी राजनीति, कला, इतिहास, संस्कृति, फ़िल्म, मनोविज्ञान से लेकर ज्ञान-विज्ञान की किसी भी नामचीन परम्परा का विशेषज्ञ नहीं हूँ!

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

ठुड्डी के बगल में 1.5 इंच छेद, आँख-नाक से खून; हाथ मुड़े: आखिर दिशा सालियान के साथ क्या हुआ था?

दिशा सालियान की मौत को लेकर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। अब एंबुलेंस ड्राइवर ने उनके शरीर पर गहरे घाव देखने का दावा किया है।

सिर्फ 194 दिन में बिहार के हर गाँव में फास्ट इंटरनेट, जुड़ेगा ऑप्टिकल फाइबर से, बनेगा देश का पहला ऐसा राज्य

गाँवों में टेली-मेडिसिन के द्वारा जनता को बड़े अस्पतालों के अच्छे डॉक्टरों की सलाह भी मिल सकेगी। छात्र तेज गति इंटरनेट उपलब्ध होने से...

कॉलेज-किताबें सब झूठे, असल में जिहादियों की ‘वंडर वुमन’ बनना चाहती थी कोलकाता की तानिया परवीन

22 साल की तानिया परवीन 70 जिहादी ग्रुप्स का हिस्सा थी। पढ़िए, कैसे बनी वह लश्कर आतंकी। कितने खतरनाक थे उसके इरादे।

सपा-बसपा ने 10 साल में दी जितनी नौकरी, उससे ज्यादा योगी सरकार ने 3 साल में दिए

सपा और बसपा ने अपने 5 साल के कार्यकाल में जितनी नौकरियाँ दी, उससे ज्यादा योगी आदित्यनाथ की सरकार 3 साल में दे चुकी है।

सुदर्शन ‘UPSC जिहाद’ मामला: ऑपइंडिया, इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट और UpWord ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की ‘हस्तक्षेप याचिका’

मजहब विशेष के दोषियों को बचाने के लिए मीडिया का एक बड़ा वर्ग कैसे उनके अपराध को कम कर दिखाता है, इसको लेकर ऑपइंडिया ने एक रिपोर्ट तैयार की है।

बिहार में कुछ अच्छा हो, कोई अच्छा काम करे… और वो मोदी से जुड़ा हो तो ‘चुड़ैल मीडिया’ भला क्यों दिखाए?

सुल्तानगंज-कहलगाँव के 60 km के क्षेत्र को “विक्रमशिला गांगेय डॉलफिन सैंक्चुअरी” घोषित किया जा चुका है। इस काम को और एक कदम आगे ले जा कर...

प्रचलित ख़बरें

‘उसने अपने C**k को जबरन मेरी Vagina में डालने की कोशिश की’: पायल घोष ने अनुराग कश्यप पर लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप

“अगले दिन उसने मुझे फिर से बुलाया। उन्होंने कहा कि वह मुझसे कुछ चर्चा करना चाहते हैं। मैं उसके यहाँ गई। वह व्हिस्की या स्कॉच पी रहा था। बहुत बदबू आ रही थी। हो सकता है कि वह चरस, गाँजा या ड्रग्स हो, मुझे इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है लेकिन मैं बेवकूफ नही हूँ।”

संघी पायल घोष ने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया – जया बच्चन

जया बच्चन का कहना है कि अनुराग कश्यप पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाकर पायल घोष ने जिस थाली में खाया, उसी में छेद किया है।

व्हिस्की पिलाते हुए… 7 बार न्यूड सीन: अनुराग कश्यप ने कुबरा सैत को सेक्रेड गेम्स में ऐसे किया यूज

पक्के 'फेमिनिस्ट' अनुराग पर 2018 में भी यौन उत्पीड़न तो नहीं लेकिन बार-बार एक ही तरह का सीन (न्यूड सीन करवाने) करवाने का आरोप लग चुका है।

कहाँ गायब हुए अकाउंट्स? सोनू सूद की दरियादिली का उठाया फायदा या फिर था प्रोपेगेंडा का हिस्सा

सोशल मीडिया में एक नई चर्चा के तूल पकड़ने के बाद कई यूजर्स सोनू सूद की मंशा सवाल उठा रहे हैं। कुछ ट्विटर अकाउंट्स अचानक गायब होने पर विवाद है।

प्रेगनेंसी टेस्ट की तरह कोरोना जाँच: भारत का ₹500 वाला ‘फेलूदा’ 30 मिनट में बताएगा संक्रमण है या नहीं

दिल्ली की टाटा CSIR लैब ने भारत की सबसे सस्ती कोरोना टेस्ट किट विकसित की है। इसका नाम 'फेलूदा' रखा गया है। इससे मात्र 30 मिनट के भीतर संक्रमण का पता चल सकेगा।

जया बच्चन का कुत्ता टॉमी, देश के आम लोगों का कुत्ता कुत्ता: बॉलीवुड सितारों की कहानी

जया बच्चन जी के घर में आइना भी होगा। कभी सजते-संवरते उसमें अपनी आँखों से आँखे मिला कर देखिएगा। हो सकता है कुछ शर्म बाकी हो तो वो आँखों में...

रिया का ड्रग्स कनेक्शन छोटा नहीं, दुबई और आतंकी समूहों से जुड़े हैं तार: NCB प्रमुख राकेश अस्थाना

एनसीबी प्रमुख राकेश अस्थाना ने एक इंटरव्यू में कहा है कि रिया के मामले से बड़े ड्रग्स रैकेट का पता चला है कि जिसके लिंक दुबई और आतंकी समूहों से जुड़े हुए हैं।

ठुड्डी के बगल में 1.5 इंच छेद, आँख-नाक से खून; हाथ मुड़े: आखिर दिशा सालियान के साथ क्या हुआ था?

दिशा सालियान की मौत को लेकर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। अब एंबुलेंस ड्राइवर ने उनके शरीर पर गहरे घाव देखने का दावा किया है।

सिर्फ 194 दिन में बिहार के हर गाँव में फास्ट इंटरनेट, जुड़ेगा ऑप्टिकल फाइबर से, बनेगा देश का पहला ऐसा राज्य

गाँवों में टेली-मेडिसिन के द्वारा जनता को बड़े अस्पतालों के अच्छे डॉक्टरों की सलाह भी मिल सकेगी। छात्र तेज गति इंटरनेट उपलब्ध होने से...

जिसे आज ताजमहल कहते हैं, वो शिव मंदिर ‘तेजो महालय’ है: शंकराचार्य ने CM योगी से की ‘दूषित प्रचार’ रोकने की अपील

ओडिशा के पुरी स्थित गोवर्धन मठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने ताजमहल को लेकर बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि ये प्राचीन काल में भगवान शिव का मंदिर था और इसका नाम 'तेजो महालय' था।

बिहार को ₹14000+ करोड़ की सौगात: 9 राजमार्ग, PM पैकेज के तहत गंगा नदी पर बनाए जाएँगे 17 पुल

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार के 45945 गाँवों को ऑप्टिकल फाइबर इंटरनेट सेवाओं से जोड़ने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि गाँव के किसान...

‘गलत साबित हुई तो माफी माँग छोड़ दूँगी ट्विटर’: कंगना ने ट्रोल करने वालों को कहा पप्पू की चंपू सेना

अपने ट्वीट को तोड़-मरोड़कर पेश करने वालों को कंगना रनौत ने चुनौती दी है। उन्होंने कहा है कि यदि यह साबित हो गया कि उन्होंने किसानों को आतंकी कहा था तो वे ट्विटर छोड़ देंगी।

कॉलेज-किताबें सब झूठे, असल में जिहादियों की ‘वंडर वुमन’ बनना चाहती थी कोलकाता की तानिया परवीन

22 साल की तानिया परवीन 70 जिहादी ग्रुप्स का हिस्सा थी। पढ़िए, कैसे बनी वह लश्कर आतंकी। कितने खतरनाक थे उसके इरादे।

सपा-बसपा ने 10 साल में दी जितनी नौकरी, उससे ज्यादा योगी सरकार ने 3 साल में दिए

सपा और बसपा ने अपने 5 साल के कार्यकाल में जितनी नौकरियाँ दी, उससे ज्यादा योगी आदित्यनाथ की सरकार 3 साल में दे चुकी है।

सुदर्शन ‘UPSC जिहाद’ मामला: ऑपइंडिया, इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट और UpWord ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की ‘हस्तक्षेप याचिका’

मजहब विशेष के दोषियों को बचाने के लिए मीडिया का एक बड़ा वर्ग कैसे उनके अपराध को कम कर दिखाता है, इसको लेकर ऑपइंडिया ने एक रिपोर्ट तैयार की है।

प्रेगनेंसी टेस्ट की तरह कोरोना जाँच: भारत का ₹500 वाला ‘फेलूदा’ 30 मिनट में बताएगा संक्रमण है या नहीं

दिल्ली की टाटा CSIR लैब ने भारत की सबसे सस्ती कोरोना टेस्ट किट विकसित की है। इसका नाम 'फेलूदा' रखा गया है। इससे मात्र 30 मिनट के भीतर संक्रमण का पता चल सकेगा।

हमसे जुड़ें

263,159FansLike
77,972FollowersFollow
322,000SubscribersSubscribe
Advertisements