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त्रिवेंद्र सिंह रावत नहीं रहेंगे उत्तराखंड के CM? BJP आलाकमान में मंथन का दौर जारी, मीडिया में अटकलों का बाजार गर्म

पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री के साथ संगठन महासचिव बीएल संतोष की पर्यवेक्षक डॉ रमन सिंह और प्रभारी दुष्यंत गौतम की रिपोर्ट पर मैराथन बैठक हुई। पर्लियामेंट्री बोर्ड की मुहर लगने के बाद...

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को लेकर कुछ दिनों से भाजपा में उहापोह की स्थिति बनी हुई थी क्योंकि कुछ विधायकों के उनसे नाराज़ होने की खबरें सामने आई थीं। खबरों में कहा जा रहा था कि भाजपा के राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी या मंत्री सतपाल महाराज में से किसी एक को उनकी जगह लेने के लिए चुना जा सकता है। अब संभावना जताई जा रही है कि भाजपा आलाकमान ने उन्हें हटाने का फैसला लिया है।

उत्तराखंड भाजपा के प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम से जब इस बाबत सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, “क्यों नहीं रहेंगे वो (रावत) मुख्यमंत्री? क्या कारण है जो हटाए जाएँगे? वो एक अच्छे मुख्यमंत्री हैं। भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है उन पर। वो हैं मुख्यमंत्री अभी। अच्छा कार्य किया है उन्होंने। केंद्र की सभी योजनाओं को उन्होंने निचले स्तर तक पहुँचाया है। आयुष्मान भारत कार्ड उत्तरखंड में हर व्यक्ति को मिला हुआ है।”

उन्होंने कहा कि सीएम रावत के कार्यकाल में मात्र 1 रुपए में पानी का कनेक्शन दिया गया है। उन्होंने ये भी कहा कि त्रिवेंद्र सिंह रावत की कार्यशैली पर प्रश्न उठाना ठीक नहीं है। वहीं ABP न्यूज़ के विकास भदौरिया ने दावा किया कि उतराखंड पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर पार्टी ने सीएम त्रिवेंद्र रावत को मुख्यमंत्री से हटाने का फ़ैसला किया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही पर्लियामेंट्री बोर्ड की मुहर लगेगी और विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए विधायक दल की बैठक जल्द बुलाई जाएगी।

इस मामले में संसद भवन में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री के साथ संगठन महासचिव बीएल संतोष की पर्यवेक्षक डॉ. रमन सिंह और प्रभारी दुष्यंत गौतम की रिपोर्ट पर मैराथन बैठक हुई। वहीं कुछ ख़बरों में ये भी कहा जा रहा था कि उन्हें नहीं हटाया जाएगा और मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए मामले को सुलझाया जाएगा। ‘अमर उजाला’ की खबर में कहा गया था कि राज्य में राजपूत-ब्राह्मण संतुलन और विधानसभा चुनाव से पहले नए चहेरे के खतरे के आकलन के बाद ही फैसला होगा।

उत्तराखंड हाल ही में प्रकृति के एक बड़े प्रकोप से उबरा है, जो भीषण आपदा का रूप ले सकती थी। इसमें 200 से अधिक लोग मारे गए। हालाँकि, उस दौरान सीएम रावत खुद घटनास्थल का दौरा कर के स्थिति की समीक्षा करते हुए चौकस दिखे थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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