Wednesday, August 4, 2021
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चिल्लाती माँ, लगातार फोन कॉल… और बच गई 25 जिंदगियाँ: उत्तराखंड के चमोली में माँ मंगश्री देवी के आगे मौत ने मानी हार

“हमारा गाँव ऊँचाई पर है। जब बाढ़ आई, तब मेरी माँ बाहर काम कर रही थीं। इसके बाद वो पागलों की तरह मुझे कॉल करने लगीं। पहले मुझे मजाक लगा... फिर उन्होंने कई बार कॉल किया। उनकी बात नहीं मानता तो..."

उत्तराखंड के चमोली में आई त्रासदी से जुड़ी कई कहानियाँ धीरे-धीरे सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में एक और कहानी सामने आई है – हेवी ड्यूटी वाहन चालक विपुल कैरेनी (27 साल) तपोवन स्थित एनटीपीसी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में काम करते थे। उनकी माँ ने रविवार (7 फरवरी 2021) को उन्हें कई कॉल किए थे, ताकि वो बैराज से हट जाएँ लेकिन विपुल ने कॉल पर गौर नहीं किया।

इसके बावजूद विपुल की माँ मंगश्री देवी ने हार नहीं मानी। वो तब तक कॉल करते रहीं, जब तक उन्होंने अपने बेटे को बता नहीं दिया कि धौलीगंगा उफ़ान पर है और बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ विपुल ने बताया, “हमारा गाँव ऊँचाई पर स्थित है। जिस वक्त बाढ़ आई, उस वक्त मेरी माँ बाहर काम कर रही थीं। अगर हमें उनकी चेतावनी नहीं मिली होती तो मैं और मेरे लगभग दो दर्जन साथी अब तक मर चुके होते। जैसे ही हमें जानकारी मिली, हमने पास की एक टूटी सीढ़ियों पर शरण ली।”

दो महीने पहले ही विपुल की शादी हुई थी और वह 7 साल की उम्र से वहाँ काम कर रहे हैं। रविवार की सुबह 9 बजे वह तपोवन स्थित अपने गाँव ढाक से प्रोजेक्ट की जगह के लिए निकले थे, जहाँ अब सिर्फ मलबा बचा हुआ है। विपुल के अनुसार:

“आम दिनों में हमारी कमाई लगभग 600 रुपए होती है लेकिन रविवार के दिन हमारी कमाई लगभग दोगुनी होती है। इसलिए मैं रविवार को काम करने के लिए गया था। सुबह 10:35 बजे मेरी माँ का फोन आया और उन्होंने मुझे वहाँ से भागने के लिए कहा।” 

इसके बाद उस दिन के हालातों के बारे में बताते हुए विपुल ने कहा, “शुरुआत में मैंने उन्हें चिल्लाते हुए सुना लेकिन मैंने उन्हें गम्भीरता से नहीं लिया। मैंने उनसे कहा मज़ाक मत करिए, पहाड़ कैसे फट सकते हैं। उन्होंने मुझे फिर से फोन किया और भागने के लिए कहा। मेरी माँ और पत्नी ने पानी को उसकी औसत ऊँचाई से 15 मीटर ऊपर देखा था, उसके रास्ते में जो कुछ भी आया, वह तबाह हो गया। हम सभी सीढ़ियों की तरफ दौड़े और उसकी वजह से ही हमारी जान बची।” 

मंगश्री देवी की कॉल के चलते बचने वाले लोगों में एक और नाम था संदीप लाल। ढाक के ही रहने वाले संदीप लाल ने बताया, “मैं अंदर था और पावर लाइन की गड़बड़ी ठीक कर रहा था। जैसे ही मेरे पास विपुल का कॉल आया, मैं वहाँ से बाहर भागा। मैं आज ज़िंदा हूँ तो सिर्फ और सिर्फ विपुल की माँ द्वारा दी गई चेतावनी की वजह से। इस घटना से पता चलता है कि हमें अपने माता-पिता की चेतावनी को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।”

विपुल और संदीप के लगभग 100 दोस्त अभी भी लापता हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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